Entertainment

खेसारी लाल यादव की संघर्ष गाथा: गांव से ग्लैमर तक

हर कलाकार की सफलता के पीछे एक कहानी होती है - मेहनत, संघर्ष और सपनों की। भोजपुरी सिनेमा के सुपरस्टार खेसारी लाल यादव का नाम आज लाखों-करोड़ों दर्शकों की ज़ुबान पर है। लेकिन इस मुकाम तक पहुँचने का उनका सफर आसान नहीं रहा। एक छोटे से गांव से निकलकर, गरीबी और मज़ाक का सामना करते हुए, खेसारी ने आज भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री को नई पहचान दी है।उनकी ज़िंदगी हमें यह सिखाती है कि हालात चाहे जैसे भी हों, अगर सपनों पर भरोसा हो और मेहनत में ईमानदारी हो तो सफलता ज़रूर मिलती है।सुपरस्टार खेसारी लाल यादव की अनकही कहानी। गांव के छोटे से जीवन से लेकर सुपरस्टार बनने तक का संघर्ष, उनकी बड़ी फिल्में, कमाई, विवाद और भविष्य की संभावनाओं पर विशेष रिपोर्ट।

  • आशुतोष गुप्ता

भोजपुरी सिनेमा की दुनिया में जब भी सुपरस्टार की चर्चा होती है, तो सबसे आगे खड़े नज़र आते हैं खेसारी लाल यादव। यह नाम आज करोड़ों दर्शकों की धड़कन है, लेकिन इस नाम के पीछे एक लंबी जद्दोजहद की कहानी छिपी है। यह कहानी है एक छोटे से गांव के गरीब परिवार से निकलकर संघर्षों का सामना करने वाले उस कलाकार की, जिसने कभी दूध बेचा, कभी शादी-ब्याह में गाना गाया, और आज करोड़ों रुपये की फिल्में करने वाला सितारा बन गया।

खेसारी लाल यादव का जन्म 15 मार्च 1986 को बिहार के छपरा जिले में हुआ था। असली नाम शत्रुघ्न कुमार यादव, पर पहचान बनी खेसारी नाम से। बचपन बेहद तंगहाली में गुज़रा। पिता मजदूरी करते थे और मां घर संभालती थीं। सात भाई-बहनों के बीच पला-बढ़ा यह बच्चा जब बड़ा हुआ तो घर की हालत इतनी खराब थी कि मकान तक पक्का नहीं था। लेकिन इस गरीबी ने उसे सपने देखने से नहीं रोका।

गांव की परंपरा ‘लौंडा नाच’ से खेसारी ने अपनी पहचान बनानी शुरू की। महिला वेशभूषा पहनकर मंच पर नाचना उस वक्त गांववालों को अजीब लगता था। लोग मजाक उड़ाते, अपमान करते, यहां तक कि “नामर्द” कहकर ताना मारते। मगर खेसारी ने हार नहीं मानी। वह जानते थे कि यही कला एक दिन उनकी पहचान बनेगी।

जीवन चलाने के लिए उन्होंने दूध बेचा, खेतों में काम किया और छोटे-मोटे मजदूरी की। इन्हीं पैसों से पहली म्यूजिक एल्बम बनाई, लेकिन असफल रही। दूसरी एल्बम आई तो थोड़ी चली और नाम बनने लगा। फिर उन्होंने गांव-गांव, शादी-ब्याह और मेलों में गाना शुरू किया। उनकी आवाज़ और देसी अंदाज़ ने लोगों को दीवाना बना दिया।

यह सफर 2011 में उस मोड़ पर पहुंचा जब उन्हें पहली भोजपुरी फिल्म “साजन चले ससुराल” में काम करने का मौका मिला। फिल्म सफल रही और खेसारी रातों-रात स्टार बन गए। इसके बाद “जान तेरे नाम”, “दिल ले गई ओढ़निया वाली” और “मेहंदी लगा के रखना” जैसी फिल्मों ने उन्हें सुपरस्टार बना दिया। विशेष रूप से “मेहंदी लगा के रखना” ने उन्हें नई ऊँचाई दी। यह फिल्म इतनी लोकप्रिय हुई कि शादियों में इसके गाने आज भी बजते हैं।

साल दर साल उन्होंने एक से बढ़कर एक फिल्में दीं। “संगर्ष” और “संगर्ष 2” जैसी फिल्में बड़े बजट और बड़े कैनवस पर बनीं, जिनमें तकनीक और VFX का इस्तेमाल हुआ। “नागदेव” ने यह साबित कर दिया कि भोजपुरी सिनेमा तकनीकी प्रयोगों में पीछे नहीं है। “दुल्हनिया लंदन से लाएंगे” और “फरिश्ता” जैसी फिल्मों ने उनके स्टारडम को मजबूत किया। खासकर “फरिश्ता” ने दर्शकों को भावुक कर दिया और यह साबित किया कि खेसारी सिर्फ मसाला हीरो नहीं, बल्कि गहरे किरदार निभाने की क्षमता रखते हैं।

उनकी फिल्मों के साथ-साथ गाने भी जबरदस्त हिट रहे। YouTube पर उनके गानों को करोड़ों-करोड़ों व्यूज़ मिलते हैं। “लॉलीपॉप लागेलु” और “ठीक है” जैसे गानों ने उन्हें डिजिटल युग का भी सितारा बना दिया। उनकी कमाई के बारे में आधिकारिक आंकड़े नहीं हैं, लेकिन माना जाता है कि वे एक फिल्म के लिए 50 लाख से 1 करोड़ रुपये तक लेते हैं। स्टेज शो और ब्रांड एंडोर्समेंट से भी उनकी आमदनी करोड़ों में है।

आज खेसारी लाल यादव की नेटवर्थ 15 से 20 करोड़ रुपये तक आंकी जाती है। यह वही इंसान है जिसने कभी 12,000 जुटाकर पहली एल्बम बनाई थी और आज बड़े बजट की फिल्में कर रहे हैं।

खेसारी लाल यादव: विवाद, हिट गानों की क्रांति और सबसे लोकप्रिय जोड़ी

सुपरस्टार की चमक के साथ हमेशा कुछ विवाद भी जुड़े रहते हैं। खेसारी लाल यादव का करियर भी इससे अछूता नहीं रहा। एक तरफ जहां दर्शक उन्हें भोजपुरी सिनेमा का चेहरा मानते हैं, वहीं दूसरी तरफ कई बार उन पर अश्लील गाने और परिवार के लिए अनुपयुक्त फिल्मों का आरोप लगता रहा है।

भोजपुरी समाज में यह बहस लगातार रही है कि खेसारी जैसे कलाकार इंडस्ट्री को किस दिशा में ले जा रहे हैं। उनके कई गाने जैसे “लॉलीपॉप लागेलु”, “चुनरी झलकावेला” और “ठीक है” युवाओं में धूम मचाते हैं, लेकिन बुजुर्ग और पारिवारिक दर्शक इन्हें असहज मानते हैं। यही वजह है कि अक्सर कहा जाता है कि उनकी फिल्में घर-परिवार में साथ बैठकर देखना मुश्किल होता है।

विवादों का एक बड़ा पहलू उनकी इंडस्ट्री के दूसरे सितारों के साथ प्रतिस्पर्धा भी है। खेसारी और पवन सिंह के बीच की टक्कर किसी से छिपी नहीं है। सोशल मीडिया पर दोनों के फैन ग्रुप्स कई बार भिड़ जाते हैं और इंडस्ट्री में यह प्रतिस्पर्धा चर्चा का विषय बनती है। आलोचक मानते हैं कि यह खींचतान भोजपुरी सिनेमा की छवि को नुकसान पहुंचाती है, जबकि समर्थक इसे स्टारडम की स्वाभाविक प्रतिस्पर्धा मानते हैं।

खेसारी के करियर में सोशल मीडिया ने भी बड़ी भूमिका निभाई है। YouTube पर उनके गाने अरबों व्यूज़ पाते हैं। यह वही दौर था जब भोजपुरी गाने कैसेट और सीडी से आगे बढ़कर सीधे मोबाइल फोन और डिजिटल प्लेटफॉर्म तक पहुंचे। होली हो या छठ, सावन हो या करवा चौथ—हर त्यौहार पर उनका नया गाना रिलीज होता है और देखते ही देखते वायरल हो जाता है। यही कारण है कि खेसारी को “YouTube स्टार” कहा जाने लगा।

उनकी निजी जिंदगी भी उतनी ही संघर्षपूर्ण रही है जितनी उनकी पेशेवर यात्रा। पत्नी चंदा देवी ने हर कठिनाई में उनका साथ दिया। जब खेसारी दूध बेचते थे, तब उनकी पत्नी घर-घर जाकर दूध पहुंचाने में मदद करती थीं। कई बार गहने बेचकर उन्होंने पति का साथ निभाया। आज उनके दो बच्चे- बेटा कृष्णा और बेटी कृति- भी सोशल मीडिया पर लोकप्रिय हो चुके हैं। खेसारी का कहना है कि उनका असली सहारा उनका परिवार ही है।

अगर बात की जाए कि खेसारी लाल यादव के साथ किस अभिनेत्री की जोड़ी सबसे ज्यादा हिट रही, तो सबसे पहले नाम आता है काजल राघवानी का। खेसारी और काजल की जोड़ी ने भोजपुरी सिनेमा में एक के बाद एक हिट फिल्में दीं। “मेहंदी लगा के रखना”, “मुश्किल प्यार”, “संघर्ष” और कई अन्य फिल्मों में दोनों की केमिस्ट्री दर्शकों के दिल को छू गई। भोजपुरी दर्शक इन्हें “सुपरहिट जोड़ी” के नाम से पहचानते हैं। इसके अलावा अक्षरा सिंह और रितु सिंह के साथ भी खेसारी की जोड़ी पर्दे पर जमी, लेकिन लोकप्रियता के मामले में काजल राघवानी के साथ उनका मेल सबसे यादगार माना जाता है।

भविष्य की ओर देखें तो खेसारी लाल यादव के सामने कई रास्ते हैं। भोजपुरी सिनेमा में वे बड़े बजट की फिल्में लाकर इंडस्ट्री को और ऊंचाई दे सकते हैं। बॉलीवुड में उनकी एंट्री मुश्किल जरूर है लेकिन नामुमकिन नहीं। अगर उन्हें सही स्क्रिप्ट और बड़े प्रोडक्शन हाउस का साथ मिला तो वे हिंदी सिनेमा में भी अपनी पहचान बना सकते हैं। ओटीटी प्लेटफॉर्म पर भी उनके लिए मौके हैं, जहां क्षेत्रीय कलाकारों को नया दर्शक वर्ग मिलता है।

राजनीति में उतरने की अटकलें भी समय-समय पर लगती रहती हैं। रवि किशन और मनोज तिवारी की तरह अगर खेसारी भी राजनीति में कदम रखते हैं, तो भोजपुरी समाज की बड़ी आबादी उनका समर्थन कर सकती है।

साफ है – खेसारी लाल यादव की कहानी सिर्फ एक कलाकार की नहीं बल्कि एक युग की कहानी है। गरीबी, अपमान और संघर्ष से निकलकर उन्होंने यह दिखाया कि सपनों पर विश्वास और मेहनत इंसान को कहां तक ले जा सकती है। वे भोजपुरी सिनेमा को ग्लोबल मंच तक ले जाने वाले उन कलाकारों में से हैं, जिन्होंने गांव की मिट्टी से उठकर ग्लैमर की दुनिया में अपनी अमिट छाप छोड़ी।

खेसारी लाल यादव की सबसे हिट जोड़ी

भोजपुरी सिनेमा में खेसारी लाल यादव की कई अभिनेत्रियों के साथ जोड़ी बनी, लेकिन सबसे चर्चित और हिट जोड़ी काजल राघवानी के साथ रही।दोनों ने साथ में कई सुपरहिट फिल्में दीं — मेहंदी लगा के रखना, संघर्ष, मुश्किल प्यार और दुल्हन गंगा पार के जैसी फिल्मों में दोनों की ऑन-स्क्रीन केमिस्ट्री ने दर्शकों का दिल जीत लिया। भोजपुरी दर्शक इस जोड़ी को “सुपरहिट जोड़ी” के नाम से जानते हैं। इसके अलावा अक्षरा सिंह और रितु सिंह के साथ भी खेसारी की जोड़ी खूब जमी, लेकिन लोकप्रियता और लगातार हिट फिल्मों के मामले में काजल राघवानी के साथ उनकी जोड़ी सबसे सफल मानी जाती है।

“भोजपुरी सिनेमा क्यों खो बैठा अपना सुनहरा दौर?”

“भोजपुरी सिनेमा क्यों खो बैठा अपना सुनहरा दौर?”

गांव की माटी से ग्लैमर तक: भोजपुरी सिनेमा की नायिकाओं का सफर

गांव की माटी से ग्लैमर तक: भोजपुरी सिनेमा की नायिकाओं का सफर

गांव की माटी से मसाले तक: भोजपुरी सिनेमा की गिरती साख और सुधार की राह

गांव की माटी से मसाले तक: भोजपुरी सिनेमा की गिरती साख और सुधार की राह

गांव की माटी से ग्लैमर तक: भोजपुरी सिनेमा के नायकों का सफर और संकट

गांव की माटी से ग्लैमर तक: भोजपुरी सिनेमा के नायकों का सफर और संकट

गांव की माटी से ग्लैमर तक और फिर गिरावट: भोजपुरी सिनेमा की असफलताओं का काला सच

गांव की माटी से ग्लैमर तक और फिर गिरावट: भोजपुरी सिनेमा की असफलताओं का काला सच

भोजपुरी सिनेमा का पतन: जहाँ कभी गूंजते थे बिरहा-भजन, वहाँ अब अश्लीलता का बोलबाला

भोजपुरी सिनेमा का पतन: जहाँ कभी गूंजते थे बिरहा-भजन, वहाँ अब अश्लीलता का बोलबाला

भोजपुरी गानों में अश्लीलता: संस्कृति का सबसे बड़ा घाव

भोजपुरी गानों में अश्लीलता: संस्कृति का सबसे बड़ा घाव

“भोजपुरी फिल्मों के पोस्टर और प्रचार में फूहड़ता: सिनेमा की साख पर धब्बा”

“भोजपुरी फिल्मों के पोस्टर और प्रचार में फूहड़ता: सिनेमा की साख पर धब्बा”

भोजपुरी फिल्मों में अश्लील गानों की बाढ़: समाज और संस्कृति पर गहरा संकट

भोजपुरी फिल्मों में अश्लील गानों की बाढ़: समाज और संस्कृति पर गहरा संकट

भोजपुरी फिल्मों का घटिया तकनीकी स्तर: गुणवत्ता से समझौता, इंडस्ट्री की बदनामी

भोजपुरी फिल्मों का घटिया तकनीकी स्तर: गुणवत्ता से समझौता, इंडस्ट्री की बदनामी

भोजपुरी सिनेमा का भविष्य: सुधार की आख़िरी घड़ी, वरना इतिहास बन जाएगी इंडस्ट्री

भोजपुरी सिनेमा का भविष्य: सुधार की आख़िरी घड़ी, वरना इतिहास बन जाएगी इंडस्ट्री

BABA GANINATH BHAKT MANDAL  BABA GANINATH BHAKT MANDAL

Related Articles

Back to top button