गांव की माटी से ग्लैमर तक और फिर गिरावट: भोजपुरी सिनेमा की असफलताओं का काला सच

अतीत की चमक और वर्तमान की धुंध भोजपुरी सिनेमा का सफर एक बार फिर संकट से गुजर रहा है। कभी “गंगा मईया तोहे पियरी चढ़ाइबो” (1963), “बिदेसिया” (1965) और “नदिया के पार” (1982) जैसी फिल्मों ने इसे परिवारों का पसंदीदा बनाया था। इन फिल्मों में गांव की माटी, बोली की … Continue reading गांव की माटी से ग्लैमर तक और फिर गिरावट: भोजपुरी सिनेमा की असफलताओं का काला सच