गांव की माटी से मसाले तक: भोजपुरी सिनेमा की गिरती साख और सुधार की राह

भोजपुरी सिनेमा कभी भारतीय क्षेत्रीय फिल्मों की आत्मा माना जाता था। 1960 और 70 के दशक में बनी फिल्में जैसे गंगा मईया तोहे पियरी चढ़इबो (1962), नदिया के पार (1982), विदेसिया,  गंगा किनारे मोरा गांव ने न केवल भोजपुरी दर्शकों का दिल जीता बल्कि उत्तर भारत की संस्कृति और संवेदनाओं को … Continue reading गांव की माटी से मसाले तक: भोजपुरी सिनेमा की गिरती साख और सुधार की राह