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काशी पुराधिपति की नगरी में गौरी पूजन की तैयारी, चैत्र नवरात्र दो अप्रैल से

वाराणसी । काशीपुराधिपति की नगरी में मातृशक्ति (गौरी पूजन) आराधना की तैयारी चल रही है। घर-घर में जहां कलश स्थापित करने के लिए साफ-सफाई हो रही है। वहीं, देवी मंदिरों में भी साफ-सफाई के साथ सजावट का कार्य युद्धस्तर पर चल रहा है। बासंतिक चैत्र नवरात्र की शुरूआत दो अप्रैल से हो रही है। इस बार नवरात्र शनिवार को प्रारम्भ हो रहा है।

सर्वार्थ सिद्धि, अमृत सिद्धि योग इस दिन बना है। ये दोनों योग एक अप्रैल को सुबह 10:40 बजे से लेकर दो अप्रैल प्रात: 06 बजकर 10 मिनट तक रहेगा। खास योग से धन्य व धान की वृद्धि होगी। इस बार पूरे नौ दिन के नवरात्र में माता रानी अश्व पर आ रही हैं, विदाई भैंसे पर होगी। ज्योतिषविद मनोज पाठक ने सोमवार को बताया कि चैत्र शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि एक अप्रैल को दिन में 11:54 बजे लगेगी। जो अगले दिन दो अप्रैल को दिन में 11:59 मिनट तक रहेगी। उन्होंने बताया कि काशी में बासंतिक नवरात्र में गौरी पूजन का विधान है। पहले दिन मुख निर्मालिका गौरी, दूसरे दिन ज्येष्ठा गौरी, तीसरे दिन सौभाग्य गौरी, चौथे दिन शृंगार गौरी, पांचवें दिन विशालाक्षी गौरी, छठे दिन ललिता गौरी, सातवें दिन भवानी गौरी, आठवें दिन मंगला गौरी और नौवें दिन महालक्ष्मी गौरी का पूजन अर्चन किया जाता है।

उन्होंने बताया कि नवरात्र के पहले दिन दो अप्रैल को हिन्दू नववर्ष (विक्रम संवत् 2079) आरम्भ हो रहा है। वासंतिक नवरात्र में कलश स्थापना दो अप्रैल को होगी। चैत्र शुक्ल पक्ष प्रतिपदा में कलश स्थापन का शुभ मुहूर्त प्रात: 9.22 बजे तक वैधृति योग से पूर्व में करना चाहिए। अभिजीत मुहूर्त सुबह अपराह्न: 12 बजे से लेकर 12:50 तक है, लेकिन सूर्योदय से लेकर पूरे दिन कलश स्थापना किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि 09 अप्रैल को महाअष्टमी का व्रत श्रद्धालु करेंगे। 10 अप्रैल को मर्यादा पुरूषोत्तम भगवान श्रीराम का जन्मोत्सव मनाया जायेगा।

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