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बाबा विश्वनाथ की प्रतिमा को चढ़ेगी सगुन की हल्दी

महंत-आवास पर होगा महाशिवरात्रि के पुर्व लोकपरंपरा।

वाराणसी। एक मार्च को महाशिवरात्रि पर शिव-पार्वती विवाह के उत्सव का क्रम 27 फरवरी से विश्वनाथ मंदिर के महंत आवास पर आरंभ हो जाएगा। टेढ़ीनीम स्थित महंत आवास पर बाबा विश्वनाथ की पंचबदन रजत विग्रह पर हल्दी तेल का अर्पण कर लोकाचार पूर्ण किया जाएगा। रविवार संध्याबेला में  (लगभग 7:00 बजे) भगवान शिव की प्रतिमा पर काशीवासी महिलाओं द्वारा लोकगीत गाते हुए हल्दी व तेल लगातार (चढाकर) परम्पराओं का निर्वाहन करेगें। इसके पूर्व बसंत पंचमी पर बाबा श्रीकाशी विश्वनाथ की प्रतिमा के समक्ष तिलकोत्सव की परंपरा का निर्वाह किया गया था।

हल्दी की रस्म के लिए गवनहिरयों की टोली संध्या बेला में महंत आवास पर जमा होगी। एक तरफ मंगल गीतों का गान के बीच बाबा को हल्दी लगाई जाएगी। यह रस्म महंत डा. कुलपति तिवारी के सानिध्य में होगी। मांगलिक गीतों से महंत आवास गुंजायमान होगा। ढोलक की थाप और मंजीरे की खनक के बीच शिव-पार्वती के मंगल दाम्पत्य की कामना के गीत मुखर होंगे। हल्दी के पारंपरिक शिव गीतों में दुल्हे की खूबियों का बखान किया जाएगा। वहीं इन्हीं गीतों के जरिये भूतभावन महादेव को दूल्हन का ख्याल रखने की ताकीद भी दी जाएगी। महंत डा. कुलपति तिवारी ने बताया लोक मान्यताओं के अनुसार जिन लड़को और लड़कियों के विवाह में अड़चने आती है उनके बाबा को हल्दी अर्पण करने से लाभ मिलता है।

बाबा के विवाहोत्सव पर टेढ़ीनीम महंत-आवास पर “शिवांजलि” के तहत स्थानीय कलाकारों द्वारा भक्ति संगीत का कार्यक्रम भी प्रस्तुत किया जाएगा। प्रियंका पांडेय, रीता शर्मा सहित कई कलाकार इसमें भाग लेंगे। हल्दी के बाद महाशिवरात्रि की महानिशा के चारों प्रहर में महंत परिवार द्वारा की जाने वाली बाबा विश्वनाथ की आरती के विधान पूर्ण करने की तैयारी कर ली गई है। महंत परिवार के सदस्यों के मार्गदर्शन में बाबा विश्वनाथ और माता पार्वती के विवाह का कर्मकांड पूर्ण परंपरानुसार पूर्ण किया जाएगा।

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