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नीट-यूजी 2026 अचानक रद्द, लाखों छात्रों के भविष्य पर बड़ा फैसला, अब आगे क्या होगा?

देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट-यूजी 2026 को एनटीए ने अचानक रद्द कर दिया है। पेपर लीक और अनियमितताओं की शिकायतों के बाद केंद्र सरकार ने मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी है। अब परीक्षा दोबारा आयोजित की जाएगी। छात्रों को दोबारा आवेदन नहीं करना होगा और कोई अतिरिक्त शुल्क भी नहीं लगेगा। इस फैसले से लाखों छात्र और अभिभावक असमंजस में हैं। आखिर परीक्षा रद्द करने के पीछे क्या वजह रही और अब आगे क्या होगा, जानिए पूरी खबर।

नई दिल्ली । राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (एनटीए) ने देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट-यूजी 2026 को रद्द करने की घोषणा कर दी है। तीन मई को आयोजित परीक्षा में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक की आशंकाओं के बीच केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद यह बड़ा फैसला लिया गया। अब परीक्षा दोबारा आयोजित की जाएगी, जिसकी नई तारीखें जल्द घोषित की जाएंगी।

एनटीए ने मंगलवार को जारी आधिकारिक बयान में कहा कि परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए यह कदम उठाया गया है। एजेंसी ने माना कि दोबारा परीक्षा कराने से लाखों छात्रों और उनके अभिभावकों को असुविधा होगी, लेकिन परीक्षा प्रणाली पर भरोसा कायम रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है।

आठ मई को केंद्रीय एजेंसियों को सौंपा गया था मामला

एनटीए के अनुसार परीक्षा में गड़बड़ी और अनियमितताओं की शिकायतें मिलने के बाद आठ मई को पूरे मामले को स्वतंत्र जांच और आवश्यक कार्रवाई के लिए केंद्रीय एजेंसियों को सौंप दिया गया था। जांच एजेंसियों से प्राप्त प्रारंभिक इनपुट और तथ्यों के आधार पर परीक्षा रद्द करने का निर्णय लिया गया।

केंद्र सरकार ने मामले की व्यापक और निष्पक्ष जांच के लिए इसे केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपने का भी निर्णय लिया है। एनटीए ने कहा है कि वह सीबीआई को सभी आवश्यक दस्तावेज और तकनीकी सहायता उपलब्ध कराएगी।

छात्रों को दोबारा पंजीकरण नहीं करना होगा

एनटीए ने छात्रों को राहत देते हुए स्पष्ट किया कि पुनर्परीक्षा के लिए अभ्यर्थियों को फिर से आवेदन या पंजीकरण कराने की आवश्यकता नहीं होगी। मई 2026 परीक्षा चक्र का पुराना आवेदन डेटा और परीक्षा केंद्र ही मान्य रहेंगे। इसके अलावा अभ्यर्थियों से कोई अतिरिक्त शुल्क भी नहीं लिया जाएगा।

एजेंसी ने यह भी घोषणा की कि छात्रों द्वारा जमा किया गया परीक्षा शुल्क वापस किया जाएगा, जबकि पुनर्परीक्षा का पूरा खर्च एनटीए अपने आंतरिक संसाधनों से वहन करेगी।

शिक्षा मंत्रालय ने कहा- छात्रों के हित सर्वोपरि

शिक्षा मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार सरकार परीक्षा प्रक्रिया की विश्वसनीयता को लेकर किसी भी तरह का समझौता नहीं करना चाहती। मंत्रालय का कहना है कि यदि परीक्षा में गड़बड़ी की आशंका भी हो तो निष्पक्ष जांच और पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित करना आवश्यक है।

सरकारी सूत्रों ने कहा कि “छात्रों के भविष्य से जुड़े मामलों में सरकार की प्राथमिकता पारदर्शिता और समान अवसर सुनिश्चित करना है। दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।”

विपक्ष ने सरकार और एनटीए पर उठाए सवाल

विपक्षी दलों ने परीक्षा रद्द होने को केंद्र सरकार और एनटीए की बड़ी विफलता बताया है। विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि लगातार प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और अव्यवस्था की घटनाएं सामने आ रही हैं, जिससे छात्रों का भविष्य प्रभावित हो रहा है।

कई विपक्षी नेताओं ने शिक्षा मंत्री से जवाबदेही तय करने और एनटीए की कार्यप्रणाली की व्यापक समीक्षा की मांग की है। कुछ छात्र संगठनों ने भी परीक्षा प्रबंधन में सुधार और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग उठाई है।

छात्र और अभिभावक तनाव में

देशभर में लाखों छात्र और उनके परिवार इस फैसले के बाद मानसिक दबाव और अनिश्चितता की स्थिति में हैं। कई छात्रों ने कहा कि उन्होंने महीनों की तैयारी और मानसिक तनाव के बाद परीक्षा दी थी, ऐसे में दोबारा परीक्षा का फैसला उनके लिए चुनौतीपूर्ण है। हालांकि बड़ी संख्या में छात्रों ने निष्पक्ष परीक्षा सुनिश्चित करने के लिए पुनर्परीक्षा के निर्णय का समर्थन भी किया है।

कोचिंग संस्थानों और शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि नई परीक्षा तिथि जल्द घोषित की जानी चाहिए ताकि छात्रों की तैयारी प्रभावित न हो और अनिश्चितता समाप्त हो सके।

केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करने की अपील

एनटीए ने अभ्यर्थियों और अभिभावकों से सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों से बचने और केवल आधिकारिक वेबसाइट एवं अधिसूचनाओं पर भरोसा करने की अपील की है। एजेंसी ने कहा कि पुनर्परीक्षा से संबंधित सभी जानकारियां समय-समय पर सार्वजनिक की जाएंगी।

नीट-यूजी देशभर के मेडिकल, डेंटल और संबंधित पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए आयोजित की जाने वाली सबसे महत्वपूर्ण परीक्षा है। हर वर्ष लाखों छात्र इसमें शामिल होते हैं। ऐसे में परीक्षा रद्द होने का असर राष्ट्रीय स्तर पर मेडिकल प्रवेश प्रक्रिया पर भी पड़ सकता है।

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