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एलआईसी का नहीं हो रहा है निजीकरण, किसी की नौकरी को खतरा नहीं : अनुराग ठाकुर

भारतीय जीवन बीमा निगम के निजीकरण को लेकर चल रही अफवाहों पर विराम लगाते हुए आज सरकार ने स्पष्ट किया कि भारतीय जीवन बीमा निगम का निजीकरण नहीं किया गया है। लोकसभा में वित्त राज्य मंत्री, अनुराग ठाकुर ने बताया कि सरकार निगम में पारदर्शिता लाने और इसका बेहतर मूल्यांकन करने के लिए आईपीओ लाने की योजना बना रही है। उन्होंने बताया कि इस आईपीओ से जीवन बीमा निगम में निवेश बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि इसमें मौजूदा शेयरधारकों की हिस्सेदारी के बारे में फैसला बाद में किया जाएगा। एलआईसी का कोई निजीकरण नहीं किया जा रहा है। आईपीओ लाने की बात की जा रही है, ताकि बाजार में उसकी वैल्यू और बढ़े, ज्यादा लोग उसमें निवेश कर सकें, उसकी ई-वेल्युवेशन हो सके।

निवेश बढ़ाने के लिए आईपीओ

इस दौरान उन्होंने जानकारी दी कि 2013 में उस समय की सरकार ने कहा था कि कुल सरप्लस आता है उसका 95 प्रतिशत शेयर धारकों को वापस जाएगा। जो वापस पांच पर्सेंट है, वो केन्द्र सरकार के पास आता है। इसी तरह 2019-20 में जो 53 हजार नौ सौ 54 करोड़ रुपये टोटल सरप्लस था, उसमें से 51 हजार दो सौ 57 करोड़ रुपया शेयर धारकों को पॉलिसी होल्डर्स को गया और जो वापस सरप्लस था वो केन्द्र सरकार को आया है। इसमें से न किसी की नौकरी जा रही है बल्कि एलआईसी की मार्केट कैप बढ़ेगी, उसमें इनवेसमेंट ज्यादा आएंगी। कुल मिलाकर एलआईसी और देश को और खाताधारकों को लाभ मिलने वाला है।

बता दें कि बजट भाषण में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ऐलान किया था कि 2021-22 के वित्तीय वर्ष में LIC का IPO लाया जाएगा। जिसके बाद से एलआईसी के निजीकरण की चर्चा होने लगी थी। वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर ने हाल ही में संसद को जानकारी दी थी कि IPO में LIC के ग्राहकों को 10 फीसदी रिजर्वेशन मिलेगा।

क्या है आईपीओ

जब एक कंपनी अपने सामान्य स्टॉक या शेयर पहली बार जनता के लिए जारी करती है तो उसे आइपीओ या सार्वजनिक प्रस्ताव कहा जाता है।

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