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काशी की वरुणा पर मंडरा रहा अस्तित्व का संकट, गंगा की सेहत पर भी पड़ा असर

वाराणसी स्थित आईआईटी बीएचयू के केमिकल इंजीनियरिंग विभाग में आयोजित परिचर्चा एवं डॉक्यूमेंट्री शो में विशेषज्ञों ने वरुणा नदी की बिगड़ती स्थिति पर चिंता व्यक्त की। पूर्व निदेशक प्रो. सिद्धनाथ उपाध्याय ने बताया कि भदोही से काशी तक नदी का अस्तित्व और जल गुणवत्ता गंभीर संकट में है। वक्ताओं ने कहा कि सीवेज, नालों और अवजल के कारण वरुणा का प्रदूषण गंगा तक पहुंच रहा है। कार्यक्रम में नदी संरक्षण, जल गुणवत्ता सुधार और जनभागीदारी पर विशेष जोर दिया गया।

वाराणसी।वरुणा दो समस्याओं से संघर्ष कर रही है एक मैलहन से भदोही तक इसका अस्तित्व समाप्त हो चुका है और भदोही में पहली बार इसमे अवजल और मलजल बहता हुआ दिखता है। ये बातें आज आईआईटी बीएचयू के केमिकल इंजीनियरिंग विभाग में आयोजित परिचर्चा और डाक्यूमेंट्री शो के दौरान आईआईटी के पूर्व निदेशक प्रो0 सिद्धनाथ उपाध्याय ने कही। उन्होंने कहा कि मल जल की समस्या वाली वरुणा के काशी में प्रवेश करने के साथ ही समस्या विकराल रूप ले लेती है। जिसमें स्थानीय होटल इंडस्ट्री के सीधे वरुणा में गिरते नाले और सीवेज पम्पिंग स्टेशन के लीकेज ने विकरालता को बहुत बढ़ावा दिया है।

रामनगर इंडस्ट्रियल एरिया के अध्यक्ष डीएस मिश्रा और स्मॉल इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेश भाटिया ने कहा कि बनारस के उद्योग धंधों ने अपना कर्तव्य समझा है, जिससे पिछले दस सालों में औद्योगिक अवजल वरुणा में गिरना कम हुआ है। गंगा समग्र काशी प्रांत के सह संयोजक दिवाकर द्विवेदी ने गंगा के जल की गुणवत्ता में वरुणा के पानी की भूमिका को रेखांकित किया और गंगा समग्र से जुड़कर भूतल और भूगर्भ जल सहित मां गंगा और उनकी सहायक नदियों के निर्मलता और अविरलता की बड़ी चुनौतियों के लिए शिक्षा क्षेत्र और समाज क्षेत्र के लोगों से आगे आने का आवाहन किया।

वाराणसी स्थित आईआईटी बीएचयू के केमिकल इंजीनियरिंग विभाग में आयोजित परिचर्चा एवं डॉक्यूमेंट्री शो में विशेषज्ञों ने वरुणा नदी की बिगड़ती स्थिति पर चिंता व्यक्त की। पूर्व निदेशक प्रो. सिद्धनाथ उपाध्याय ने बताया कि भदोही से काशी तक नदी का अस्तित्व और जल गुणवत्ता गंभीर संकट में है। वक्ताओं ने कहा कि सीवेज, नालों और अवजल के कारण वरुणा का प्रदूषण गंगा तक पहुंच रहा है। कार्यक्रम में नदी संरक्षण, जल गुणवत्ता सुधार और जनभागीदारी पर विशेष जोर दिया गया।
भदोही से काशी तक संकट में वरुणा, विशेषज्ञों ने बताया गंगा के लिए कितना बड़ा खतरा

कार्यक्रम का शुभारंभ मां गंगा के चित्र और पंडित मदन मोहन मालवीय जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण के साथ हुआ। गंगा गीत गंगा समग्र के भाग संयोजक चंद्र प्रकाश ने प्रस्तुत किया।इस दौरान कार्यक्रम संयोजक कपीन्द्र तिवारी ने अतिथियों का स्वागत किया। केमिलकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर और यूपीटीयू के पूर्व वाइस चांसलर प्रदीप कुमार मिश्र ने परिचर्चा की रूप रेखा प्रस्तुत की। साथ ही सरकार द्वारा किए गए प्रयासों को भी साझा किया। कार्यक्रम के दौरान फोटो जर्नलिष्ट अनिरुद्ध पांडेय की वरुणा पर आधारित डॉक्यूमेंट्री दिखाई गई, मां वरुणा पर बनाई गई प्रभावपूर्ण डॉक्यूमेंट्री में अवजल के कारण सरायमोहाना में लोग गंगा में स्नान करना बंद कर दिए हैं, यह देख उपस्थित लोग काफी भावुक हुए। उन्होंने डॉक्यूमेंट्री के माध्यम से वरुणा का गंगा पर पड़ते प्रभाव को दर्शाया।

परिचर्चा में आमंत्रित विद्वानों से वरुणा और गंगा की निर्मलता के सुझाव लिए गये। इसी कड़ी में हिंदी विभाग के पूर्व विधागाध्यक्ष प्रो0 सदानंद साही ने कहा कि यदि गंगा को अविरल रखना है तो वरुणा समेत उसके 900 सहायक नदियों को प्रदूषण मुक्त करना होगा। दीनापुर वार्ड नंबर आठ के पार्षद अनिल सोनकर ने बताया कि वरुणा के कारण सरायमोहाना में गंगा पूरी तरह से चार किलोमीटर तक प्रदूषित हो गई हैं, और गंगा के तटीय जल में कीड़े पड़ गए हैं।

इसके अतिरिक्त केमिकल इंजीनियरिंग विभाग के छात्र डॉ आनंद गुप्ता,सुशील सिंह, वेस इंडिया के राजेश श्रीवास्तव, वरुणा पर कार्य करने वाले प्रियो दीप, वरिष्ठ पत्रकार अत्रि भारद्वाज, काशी पत्रकार संघ के अध्यक्ष अरुण मिश्र, वरिष्ठ पत्रकार अजय चतुर्वेदी, अजय राय, शिवदत्त द्विवेदी, मालवीय पत्रकारिता संस्थान विद्यापीठ के निदेशक डॉ नागेन्द्र सिंह, बृजेश सिंह और बलराम आदि ने विचार व्यक्त किए।

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