Education

अब ‘एक भी बच्चा स्कूल से बाहर नहीं रहेगा’, 1 मई से चलेगा विशेष नामांकन अभियान

Yogi Adityanath सरकार ने ‘स्कूल चलो अभियान’ को मिशन मोड में लागू करते हुए 6 से 14 वर्ष तक के हर बच्चे का नामांकन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। श्रमिक बस्तियों, ईंट-भट्ठों और वंचित वर्गों के बच्चों पर विशेष फोकस किया जा रहा है। वहीं Right to Education Act के तहत नामांकन में तेजी आई है और चार दिनों में 15,679 नए दाखिले दर्ज हुए हैं, जिससे कुल नामांकन 63.6% तक पहुंच गया है।

लखनऊ : योगी सरकार ने शिक्षा के मोर्चे पर बड़ा और निर्णायक कदम उठाते हुए ‘स्कूल चलो अभियान’ को उत्तर प्रदेश में मिशन मोड में लागू कर दिया है। सरकार का स्पष्ट संदेश है कि अब कोई भी बच्चा स्कूल से बाहर नहीं रहेगा। इसी क्रम में अपर मुख्य सचिव, बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा, पार्थ सारथी सेन शर्मा ने प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि 6 से 14 वर्ष तक के प्रत्येक बच्चे का नामांकन हर हाल में सुनिश्चित किया जाए।

पहली मई से प्रदेशभर में विशेष अभियान चलाकर श्रमिक बस्तियों, ईंट-भट्ठों और वंचित वर्गों के बच्चों को चिह्नित कर स्कूल से जोड़ा जाएगा। यह अभियान खास तौर पर उन बच्चों पर केंद्रित होगा, जो अब तक शिक्षा की मुख्यधारा से बाहर हैं। दिव्यांग बच्चों के नामांकन को प्राथमिकता देने, आरटीई के अंतर्गत लॉटरी के माध्यम से चयनित पात्र बच्चों का आवंटित विद्यालय में शत-प्रतिशत नामांकन कराने और कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में बालिकाओं के प्रवेश को बढ़ाने के निर्देश भी दिए गए हैं।

सरकार ने ड्रॉपआउट और आउट-ऑफ-स्कूल बच्चों की पहचान कर उन्हें पुनः शिक्षा से जोड़ने के लिए जमीनी स्तर पर रणनीति तैयार की है। कक्षा 5 से 6, 8 से 9 और 10 से 11 तक 100% ट्रांजिशन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि बच्चों की पढ़ाई बीच में न छूटे और शिक्षा की निरंतरता बनी रहे।

जागरूकता अभियान, स्थानीय प्रशासन की सक्रिय भागीदारी और निरंतर मॉनिटरिंग के माध्यम से इस अभियान को प्रभावी बनाने की योजना है। अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश हैं कि प्रत्येक गांव, वार्ड और बस्ती स्तर पर सर्वे कर बच्चों को चिह्नित किया जाए और उन्हें विद्यालय से जोड़ा जाए। जहां पहले ड्रॉपआउट चिंता का विषय था, अब सरकार घर-घर पहुंचकर हर बच्चे को स्कूल से जोड़ रही है।

आरटीई: योगी सरकार की सख्ती का असर, आदेश के बाद महज चार दिनों में 15,679 नामांकन

लखनऊ : उत्तर प्रदेश में शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के अंतर्गत नामांकन को लेकर योगी सरकार की सख्ती अब सीधे नतीजों में बदलती दिखाई दे रही है। अपर मुख्य सचिव, बेसिक व माध्यमिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा के कड़े निर्देश और स्पष्ट चेतावनी के बाद महज चार दिनों में ही पूरे प्रशासनिक तंत्र की रफ्तार बदल गई है और नामांकन प्रक्रिया ने तेज गति पकड़ ली है।

आरटीई के अंतर्गत आवंटित सीटों पर प्रवेश सुनिश्चित कराने को लेकर शासन स्तर से स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि कोई भी पात्र बच्चा प्रवेश से वंचित नहीं रहना चाहिए और जहां भी लापरवाही मिलेगी, वहां सीधे कार्रवाई की जाएगी। इसी सख्ती का असर अब जमीनी स्तर पर स्पष्ट दिखाई दे रहा है। गरीब और वंचित बच्चों के लिए कुल 1,95,740 आवंटनों के सापेक्ष अब तक 1,24,545 बच्चों का नामांकन सुनिश्चित किया जा चुका है, जो कुल लक्ष्य का लगभग 63.6 प्रतिशत है। उल्लेखनीय है कि 22 अप्रैल तक यह संख्या 1,08,866 थी, लेकिन सख्त निर्देशों के बाद चार दिनों में 15,679 नए नामांकन जुड़ गए, जो लगभग 14.4 प्रतिशत की तेज बढ़त को दर्शाता है।

यह उछाल बताता है कि योगी सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति जमीन पर असर दिखाने वाली कार्यशैली है। अब हर जिले में अधिकारी लक्ष्य हासिल करने के लिए पूरी सक्रियता के साथ जुटे हैं और जवाबदेही स्पष्ट हो गई है।

योगी सरकार ने शिक्षा का अधिकार अधिनियम के अंतर्गत नामांकन को मिशन मोड में संचालित करते हुए जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग को प्रतिदिन प्रगति की समीक्षा करने के निर्देश दिए हैं। यह भी स्पष्ट कर दिया गया है कि समयबद्ध लक्ष्य हासिल करना सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी स्तर पर ढिलाई अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

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