ईडी का बड़ा आरोप: ममता बनर्जी पर छापेमारी में बाधा और सबूत हटाने का दावा
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर हवाला और कोयला तस्करी से जुड़े पीएमएलए मामले में कार्रवाई में बाधा डालने का गंभीर आरोप लगाया है। ईडी के अनुसार, कोलकाता में छापेमारी के दौरान मुख्यमंत्री पुलिस अधिकारियों के साथ आई-पैक से जुड़े एक परिसर में पहुँचीं और महत्वपूर्ण दस्तावेज व इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस हटाए गए। एजेंसी का दावा है कि यह मामला अनूप माझी के कथित कोयला तस्करी सिंडिकेट और हवाला लेन-देन से जुड़ा है। विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी ने इस कदम को अनैतिक बताया।
नयी दिल्ली : प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर अनूप माझी और अन्य से जुड़े हवाला कारोबार के मामले में ईडी की कार्रवाई में बाधा डालने और सबूत जब्त करने का आरोप लगाया है।ईडी ने गुरुवार को कहा कि वह अनूप माझी और अन्य से जुड़े हवाला कारोबार रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) मामले में कोलकाता में छापेमारी कर रही थी और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री के आने तक यह कार्रवाई शांतिपूर्वक और पेशेवर तरीके से चल रही थी। इसी दौरान सुश्री बनर्जी काफी संख्या में पुलिस अधिकारियों के साथ प्रतीक जैन के आवासीय परिसर में घुस गयीं और भौतिक दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस सहित अहम सबूत हटा दिये।
एजेंसी ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री का काफिला फिर भारतीय राजनीतिक कार्रवाई समिति (आई-पीएसी) के ऑफिस पहुंचा, जहां से सुश्री बनर्जी, उनके सहयोगियों और राज्य पुलिस कर्मियों ने जबरन अतिरिक्त डॉक्यूमेंट और इलेक्ट्रॉनिक सबूत हटा दिये। ईडी का मामला 2020 में दर्ज केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की प्राथमिकी (एफआईआर) पर आधारित है। जांच के दौरान एजेंसी ने दावा किया कि उसने अनूप माझी के नेतृत्व वाले एक कोयला तस्करी सिंडिकेट का पर्दाफाश किया है, जिसने कथित तौर पर पश्चिम बंगाल में ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ईसीएल) के लीज वाले इलाकों से कोयला चुराया।ईडी के मुताबिक बाद में कोयला बांकुरा, बर्धमान, पुरुलिया और दूसरे ज़िलों की फ़ैक्टरियों और संयंत्रों को बेचा गया।
ईडी ने कहा, “ जांच में पता चला कि अवैध रूप से निकाले गये कोयले का एक बड़ा हिस्सा शाकंभरी ग्रुप ऑफ़ कंपनियों को बेचा गया था। हवाला कारोबार करने वालों से भी लिंक का पता चला, और कई सबूतों (जिसमें अलग-अलग लोगों के बयान शामिल हैं) ने हवाला कारोबार से जुड़ाव की पुष्टि की। एक अधिकारी ने बताया कि कोयला तस्करी के अपराध से मिले पैसे को ठिकाने लगाने में शामिल एक हवाला ऑपरेटर ने आई-पैक कंसल्टिंग प्राइवेट लिमिटेड को करोड़ों रुपये के लेन-देन में मदद की।बाद में कोयला बांकुरा, बर्धमान, पुरुलिया और दूसरे ज़िलों की फ़ैक्टरियों और भूखंडों को बेचा गया।
ईडी ने कहा, “ जांच में पता चला कि अवैध रूप से निकाले गये कोयले का एक बड़ा हिस्सा शाकंभरी ग्रुप ऑफ़ कंपनियों को बेचा गया था। हवाला संचालकों से भी लिंक का पता चला, और कई सबूतों (जिसमें अलग-अलग लोगों के बयान शामिल हैं) ने हवाला कनेक्शन की पुष्टि की। ”उन्होंने कहा, “ अपराध से मिले पैसे, हवाला ऑपरेटरों और हैंडलर्स से जुड़े लोग पीएमएलए की तलाशी के दायरे में आते हैं। आई-पैक भी हवाला पैसे से जुड़ी संस्थाओं में से एक है। आज के ऑपरेशन के दौरान पश्चिम बंगाल में छह जगहों और दिल्ली में चार जगहों पर तलाशी ली गयी।
”ईडी के अनुसार तलाशी के दौरान, पुलिस उपायुक्त (दक्षिण कोलकाता) और सारणी थाना के प्रभारी अधिकारी ईडी अधिकारियों की पहचान सत्यापित करने के लिए एक जगह पर पहुंचे। बाद में, कोलकाता के पुलिस आयुक्त कई अधिकारियों के साथ उस जगह पर पहुंचे और अधिकृत अधिकारी ने उन्हें कार्यवाही के बारे में जानकारी दी, जिन्होंने अपना पहचान पत्र भी दिखाया।
प्रतीक जैन के घर ईडी के छापेमारी के बीच पहुंची ममता बनर्जी
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी एक हैरान करने वाले घटनाक्रम में गुरुवार दोपहर आई-पैक के संस्थापक प्रतीक जैन के लाउडन स्ट्रीट स्थित आवास पर उस वक्त पहुंच गयीं, जब उनके आवास पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच चल रही थी। आई-पैक वह संस्था है, जो आगामी विधानसभा चुनाव से पहले तृणमूल कांग्रेस की राजनीतिक रणनीति तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।तलाशी अभियान सुबह से ही चल रहा था, लेकिन दोपहर करीब 12 बजे हालात तब बदलने लगे जब कोलकाता पुलिस आयुक्त मनोज वर्मा मौके पर पहुँचे। उनके पहुँचने के कुछ ही मिनटों में मुख्यमंत्री भी वहां पहुँच गईं। चश्मदीदों के मुताबिक, सुश्री बनर्जी श्री जैन के घर में अंदर गयीं और कुछ मिनटों बाद हाथ में एक हरी फाइल लिए बाहर निकल आईं।
मुख्यमंत्री ने बाहर मीडिया से बात करते हुए आरोप लगाया कि उनकी पार्टी के दस्तावेज जब्त किए जा रहे थे। उन्होंने कहा, “वे मेरी पार्टी के सारे दस्तावेज जब्त कर रहे थे। मैं उन्हें वापस ले आई हूँ। यह केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का काम है। वह देश नहीं संभाल पा रहे हैं, इसलिए मेरी पार्टी के कागजात जब्त करवा रहे हैं।”सुश्री बनर्जी ने बताया कि प्रतीक जैन उनकी पार्टी के काम के प्रभारी थे और तलाशी के दौरान हार्ड डिस्क और मोबाइल फोन जब्त किये जा रहे थे।विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी ने मुख्यमंत्री के वहाँ पहुंचने के इस कदम को ‘अनैतिक’ बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ने पहले भी संवैधानिक एजेंसियों के कामकाज में हस्तक्षेप किया है।
श्री अधिकारी ने याद दिलाया कि 2021 में ममता बनर्जी ने फिरहाद हाकिम, सुब्रत मुखर्जी और मदन मित्रा की गिरफ्तारी के विरोध में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) के निजाम पैलेस कार्यालय में धरना दिया था। इसी तरह का विरोध तब किया था जब सीबीआई ने तत्कालीन पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार के आवास पर छापेमारी की थी। अधिकारी ने यह सवाल भी उठाया कि तृणमूल कांग्रेस के दस्तावेज आई-पैक के पास क्यों रखे जाएंगे।लाउडन स्ट्रीट से निकलने के बाद, सुश्री बनर्जी साल्ट लेक के सेक्टर पांच स्थित आई-पैक के दफ्तर के लिए रवाना हो गईं। मुख्यमंत्री के सेक्टर पांच पहुँचने से पहले ही हालंकि बिधाननगर की महापौर कृष्णा चक्रवर्ती आई-पैक कार्यालय पहुँच गईं। उन्होंने बताया कि वह वहां ‘उन्नयनर पांचाली’ अभियान के सिलसिले में गई थीं।
सुश्री चक्रवर्ती ने कहा कि ये छापे राज्य सरकार को परेशान करने के लिए किये जा रहे हैं और इसे देखते हुए कार्यालय के बाहर पुलिस सुरक्षा कड़ी कर दी गयी है।राज्य मंत्री सुजीत बोस और बिधाननगर पुलिस आयुक्त भी मौके पर पहुँच गये। जबकि तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ता कार्यलाय के बाहर नारेबाजी करते रहे।(वार्ता)
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