
महामना मालवीय और अटल जी की जयंती पर संगोष्ठी, राष्ट्र निर्माण के मूल्यों पर हुआ मंथन
वाराणसी में भारत रत्न पंडित मदन मोहन मालवीय एवं भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती के अवसर पर अखिल भारतीय मनीषी परिषद द्वारा संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कारमाइकल लाइब्रेरी सभागार में हुई इस संगोष्ठी में वक्ताओं ने महामना मालवीय के शिक्षा, समाज सेवा और राष्ट्र निर्माण में योगदान को रेखांकित किया। साथ ही अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा स्थापित राजनीतिक शुचिता और नैतिक मूल्यों को आज के समय में भी प्रासंगिक बताया गया। संगोष्ठी में शिक्षाविदों, अधिवक्ताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं की उल्लेखनीय उपस्थिति रही।
- काशी हिंदू विश्वविद्यालय में आयोजित संगोष्ठी में शिक्षा, राजनीति और समाज सेवा के आदर्शों पर वक्ताओं के विचार
वाराणसी ।भारत रत्न पंडित मदन मोहन मालवीय के व्यक्तित्व में विद्यार्थी जीवन से ही लेखन और काव्य-रचना का समावेश था। बैरिस्टर बनने के बाद उन्होंने प्रयागराज में वकालत की और वहीं से पत्रकारिता जीवन का भी आरंभ किया। दोनों ही क्षेत्रों में उन्होंने उच्चतम मानदंड स्थापित किए। शिक्षा जगत से जुड़कर प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने काशी हिंदू विश्वविद्यालय जैसे विश्वस्तरीय शिक्षाकेंद्र की स्थापना कर देश को अनुपम धरोहर दी।
मां गंगा की अविरलता के लिए हरिद्वार में गंगा की मुख्य धारा पर प्रस्तावित बांध के विरोध में अनशन कर उन्होंने तत्कालीन ब्रिटिश सरकार को अनुबंध के लिए विवश किया, जिसके परिणामस्वरूप आज गंगा की धारा अविरल है। गौ-रक्षा हेतु काशी जीव दया विस्तारिणी की स्थापना के साथ-साथ वे स्वतंत्रता आंदोलन में निरंतर सक्रिय रहे। चार बार कांग्रेस के अध्यक्ष रहने के साथ ही वे जीवनपर्यंत हिंदू महासभा से जुड़े रहे। सनातन संस्कृति की रक्षा में उनके योगदान को देश कभी विस्मृत नहीं कर सकता। ‘महामना’ की उपाधि से विभूषित मालवीय जी का व्यक्तित्व समाज-सेवा, राजनीति और शिक्षा-उन्नयन का अद्भुत समन्वय प्रस्तुत करता है—ऐसा व्यक्तित्व सदियों में विरल होता है।

उक्त विचार प्रो. राजा राम शुक्ल, संकायाध्यक्ष, संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय, काशी हिंदू विश्वविद्यालय ने भारत रत्न महामना पंडित मदन मोहन मालवीय एवं भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती के अवसर पर आयोजित संगोष्ठी में व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि राष्ट्र-निर्माण के लिए अटल जी ने विशिष्ट चिंतनधारा दी और मात्र एक वोट से गिरने वाली सरकार को बचाने से इनकार कर राजनीति में शुचिता का अद्वितीय मानदंड स्थापित किया।
“समाज जीवन और महामना मदन मोहन मालवीय का व्यक्तित्व” विषयक संगोष्ठी का आयोजन कारमाइकल लाइब्रेरी सभागार में अखिल भारतीय मनीषी परिषद द्वारा किया गया। संगोष्ठी में काशी हिंदू विश्वविद्यालय के प्रबंध विज्ञान संकाय के संकायाध्यक्ष प्रो. सुजीत कुमार दुबे, रत्नाकर त्रिपाठी एडवोकेट, प्रो. अलका पांडेय, श्रीनाथ पांडेय एडवोकेट, मनीषी परिषद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शशि प्रकाश मिश्र, महानगर अध्यक्ष नीरज चौबे सहित अन्य वक्ताओं ने विचार व्यक्त किए।
कार्यक्रम का आयोजन अखिल भारतीय मनीषी परिषद के जिला अध्यक्ष कपिल नारायण पांडे ने किया। अध्यक्षता परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. विद्यासागर पांडेय ने की। संगोष्ठी में घनश्याम पांडे, सुनील शुक्ला, कृष्णकांत पांडे, शेखर चौबे, महेंद्र पांडे, अजय कुमार पांडे, रवि शंकर पांडे, इंद्रप्रकाश पांडे एडवोकेट, प्रशांत पांडे, राजकुमार श्रीवास्तव, अमित श्रीवास्तव, अनिल मिश्रा, कमल कुमार वर्मा, रत्न शंकर पाठक, अशोक कुमार मिश्रा, डॉ. के.एस. दुबे, श्रीपति मिश्रा, विवेक कुमार पांडे, गोरखनाथ यादव, इंद्रेश नारायण पांडे, सूर्यबली तिवारी, दिलीप चौबे, विपिन शुक्ला एडवोकेट, कौशल मिश्रा एडवोकेट सहित बड़ी संख्या में गणमान्य उपस्थित रहे।
संगोष्ठी का संचालन अखिल भारतीय मनीषी परिषद के राष्ट्रीय महासचिव दिवाकर द्विवेदी ने किया।
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