Varanasi

काशी में भक्ति और सेवा का संगम : संकल्प अन्न क्षेत्र ने चौक में लगाया विशेष सेवा शिविर

वाराणसी के चौक क्षेत्र में संकल्प संस्था द्वारा संचालित संकल्प अन्न क्षेत्र के तत्वावधान में विशेष सेवा शिविर का आयोजन किया गया। श्रद्धालुओं और जरूरतमंदों को खिचड़ी, मिष्ठान और जल सेवा की गई। संस्था का उद्देश्य है - कोई भूखा न रहे, हर व्यक्ति तक प्रेम, प्रसाद और सेवा का संदेश पहुँचे।

  • मां अन्नपूर्णा और बाबा विश्वनाथ की कृपा से संकल्प संस्था का मानवीय प्रयास – जरूरतमंदों को खिचड़ी, मिष्ठान और जल सेवा के साथ प्रेम और प्रसाद का वितरण।

वाराणसी। काशी नगरी के हृदय स्थल चौक क्षेत्र में आज सुबह से ही भक्ति, प्रेम और सेवा का अनूठा संगम देखने को मिला। संकल्प संस्था द्वारा संचालित संकल्प अन्न क्षेत्र के तत्वावधान में यहाँ एक विशेष सेवा शिविर का आयोजन किया गया, जिसने काशी की पुरातन परंपरा “अन्न दान महा दान” को जीवंत कर दिया।

श्री संकटमोचन हनुमान जी को भोग अर्पित करने के बाद श्रद्धापूर्वक खिचड़ी, मिष्ठान और जल सेवा आरंभ की गई। यह सेवा चौक स्थित कन्हैयालाल गुलालचंद सर्राफ के सामने आयोजित की गई थी, जहाँ सुबह से ही श्रद्धालु, राहगीर, श्रमिक और जरूरतमंद बड़ी संख्या में एकत्रित होने लगे। धीरे-धीरे पूरा क्षेत्र “जय श्री राम” और “हर हर महादेव” के जयघोषों से गूंज उठा। प्रसाद ग्रहण करने वालों के चेहरों पर तृप्ति और प्रसन्नता झलक रही थी – मानो सेवा का यह प्रसाद उनके जीवन में नई ऊर्जा भर गया हो।

संस्था के संरक्षक अनिल कुमार जैन ने कहा, “काशी की इस पावन भूमि पर सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है। मां अन्नपूर्णा और बाबा विश्वनाथ की कृपा से हमें यह सौभाग्य मिला कि हम जरूरतमंदों की सेवा कर सके। संकल्प अन्न क्षेत्र का उद्देश्य स्पष्ट है – कोई भूखा न रहे, हर व्यक्ति तक प्रेम, प्रसाद और अन्न का संदेश पहुँचे।”

उन्होंने आगे कहा कि यह अन्न क्षेत्र केवल भोजन वितरण का नहीं, बल्कि मानवता की सेवा का एक सतत अभियान है। संस्था का लक्ष्य है कि इस कार्य को वाराणसी के प्रत्येक क्षेत्र तक पहुँचाया जाए, ताकि कोई भी व्यक्ति भूख के कारण व्यथित न रहे। इस सेवा शिविर में राकेश अग्रवाल, माला अग्रवाल, पूजा अग्रवाल, अभय अग्रवाल, अंकुर अग्रवाल, सुचिता अग्रवाल, अनुज केशरी और मृदुला अग्रवाल का उल्लेखनीय योगदान रहा।

कार्यक्रम में गिरधर दास अग्रवाल (मद्रास क्लॉथ सेंटर), संजय अग्रवाल (गिरिराज), राजेंद्र अग्रवाल (माड़ी वाले), अमित श्रीवास्तव, प्रमोद, रंजनी यादव, भइया लाल, और मनीष अग्रवाल सहित अनेक गणमान्यजन उपस्थित रहे जिन्होंने सेवा के इस महाअभियान को आत्मिक सहयोग प्रदान किया।

स्थानीय निवासियों ने संकल्प संस्था की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के सेवा शिविर न केवल जरूरतमंदों की मदद करते हैं, बल्कि समाज में एकता, करुणा और मानवता के भाव को भी सशक्त बनाते हैं। काशी की इस सेवा भावना ने एक बार फिर सिद्ध कर दिया कि – जहाँ भक्ति है, वहीं सेवा है, और जहाँ सेवा है, वहीं सच्चा धर्म है।

काशी अन्नदान का महात्म्य : काशी की आत्मा में बसी सेवा और करुणा की परंपरा

भारत की धार्मिक और आध्यात्मिक राजधानी कही जाने वाली काशी केवल ज्ञान और भक्ति की नगरी नहीं, बल्कि सेवा और अन्नदान की भूमि भी है। यहां अन्नदान को सबसे श्रेष्ठ दान माना गया है ।सनातन धर्म में कहा गया है – “अन्नदानं परं दानं, विद्यानं चतुरंगं स्मृतम्।” अर्थात अन्नदान सबसे श्रेष्ठ दान है, क्योंकि यह भूखे प्राणी के प्राणों की रक्षा करता है।काशी में मां अन्नपूर्णा देवी की आराधना इसी भाव का मूर्त रूप है। ऐसा विश्वास है कि मां अन्नपूर्णा स्वयं भगवान शिव को भी अन्न प्रदान करती हैं, जिससे यह संदेश मिलता है कि अन्न ही जीवन का आधार और सेवा का सर्वोच्च स्वरूप है।

प्राचीन काल से काशी में अन्न क्षेत्र की परंपरा रही है। चाहे वह अन्नपूर्णा मंदिर का प्रसाद हो, लंगर सेवा हो या आज के समय में संकल्प अन्न क्षेत्र जैसी संस्थाओं का कार्य, यह केवल भोजन वितरण नहीं बल्कि समाज में समानता, करुणा और दया का प्रसार है। यह भी माना जाता है कि काशी में अन्नदान करने से अनंत गुना पुण्य प्राप्त होता है, क्योंकि यह भूमि मोक्षदायिनी है। यहां किया गया हर पुण्यकर्म सीधा ईश्वर तक पहुंचता है।काशी का अन्नदान यह सिखाता है कि सेवा ही साधना है, दान ही धर्म है और भोजन बांटना ही ईश्वर की आराधना है। जिस हाथ से अन्न वितरित होता है, वह हाथ कर्मयोग का प्रतीक बन जाता है। इसीलिए संतों ने कहा है कि काशी में अन्न देना, ईश्वर को प्रसन्न करना है।

आज जब समाज तेज़ी से बदल रहा है, तब संकल्प संस्था जैसे संगठन इस परंपरा को आधुनिक स्वरूप दे रहे हैं। संकल्प अन्न क्षेत्र का उद्देश्य है कि कोई भूखा न रहे और हर थाली में प्रसाद पहुंचे। यह केवल एक सेवा नहीं बल्कि काशी की आत्मा की पुनर्स्थापना है, जहां भक्ति, करुणा और मानवता एक साथ चलती है। काशी में अन्नदान केवल एक कर्म नहीं, बल्कि धर्म, करुणा और भक्ति का समागम है। यहां का हर दाता मां अन्नपूर्णा का दूत है और हर भूखा व्यक्ति स्वयं भगवान का स्वरूप। यही है काशी का अन्नदान महात्म्य – जहां एक दाना, हजारों आत्माओं को तृप्त करता है।

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