भारत और पाकिस्तान के बीच क्रिकेट मुकाबले सिर्फ खेल भर नहीं रहे, बल्कि दशकों से यह राजनीति, भावनाओं और विवादों का प्रतीक भी बने हैं। एशिया कप 2025 में टॉस के दौरान हाथ न मिलाने और पाकिस्तानी खिलाड़ी के बैट से गन-फायर इशारे की घटनाओं ने खेल भावना पर बहस छेड़ दी है। यह पहली बार नहीं है जब दोनों देशों के बीच क्रिकेट विवादों में आया हो। सात दशक पहले भी, जब पाकिस्तान ने भारत दौरे पर अपनी पहली टेस्ट सीरीज़ खेली थी, तभी इस प्रतिद्वंद्विता का विवादित स्वरूप सामने आ गया था।
1952: लखनऊ टेस्ट और पहला विवाद
भारत और पाकिस्तान के बीच पहली टेस्ट सीरीज़ 1952 में खेली गई थी। पाकिस्तान ने भारत दौरे के दौरान लखनऊ विश्वविद्यालय मैदान पर दूसरा टेस्ट खेला। भारत की ओर से कप्तानी लाला अमरनाथ कर रहे थे और पाकिस्तान का नेतृत्व अब्दुल करदार के हाथों में था। इस ऐतिहासिक टेस्ट में पाकिस्तान ने फ़ज़ल महमूद की घातक गेंदबाज़ी के दम पर भारत को एक पारी और 43 रन से हराया। फ़ज़ल ने मैच में 12 विकेट चटकाए और पाकिस्तान को अपनी पहली टेस्ट जीत दिलाई।
इस मैच के बाद का माहौल विवादों में घिर गया। समकालीन अख़बारों जैसे द हिंदू और टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्टों में दर्ज है कि हार से निराश भारतीय दर्शकों की ओर से तीखी प्रतिक्रियाएँ देखने को मिलीं। कुछ जगहों पर गुस्से में दर्शकों ने मैदान और बाहर पत्थरबाज़ी तक की, जबकि पाकिस्तान के प्रदर्शन की सराहना भी हुई। पुराने दर्शक बताते हैं कि उस दौर में “गंगा-जमुनी तहज़ीब” के तहत दोनों टीमों के अच्छे शॉट्स पर तालियाँ बजाई जाती थीं, लेकिन भारत की हार के बाद माहौल तनावपूर्ण हो गया। पाकिस्तानी अख़बार Dawn ने उस जीत को राष्ट्रीय गर्व का क्षण बताया, जबकि भारतीय अख़बारों ने इसे टीम प्रबंधन के लिए “कड़वा सबक” कहा।
इस तरह 1952 का लखनऊ टेस्ट केवल पाकिस्तान की पहली जीत ही नहीं, बल्कि भारत–पाकिस्तान क्रिकेट प्रतिद्वंद्विता का पहला बड़ा विवाद भी बन गया।
एशिया कप 2025: नए विवाद
इन्हीं ऐतिहासिक तनावों की गूंज एशिया कप 2025 में भी सुनाई दी। ग्रुप स्टेज और सुपर-4 के दोनों मुकाबलों में भारत ने पाकिस्तान को हराया, लेकिन सुर्खियाँ जीत से ज्यादा विवादों ने बटोरीं। टॉस के दौरान भारतीय कप्तान सूर्यकुमार यादव और पाकिस्तानी कप्तान सलमान अली आघा ने हाथ नहीं मिलाया। मैच के बाद भी खिलाड़ियों ने हाथ मिलाने की परंपरा से परहेज़ किया। पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने इसे खेल भावना के खिलाफ बताते हुए आईसीसी से शिकायत की और आरोप लगाया कि मैच रेफरी एंडी पाइक्रॉफ्ट ने ही पाकिस्तानी कप्तान को हाथ न मिलाने की सलाह दी थी।
इसी बीच, सुपर-4 के मुकाबले में पाकिस्तानी खिलाड़ी ने बैट से गन-फायर जैसा इशारा किया, जिसे दर्शकों और क्रिकेट विशेषज्ञों ने आपत्तिजनक करार दिया। सोशल मीडिया पर इस हरकत का वीडियो वायरल हुआ और आईसीसी से कार्रवाई की मांग उठने लगी। आईसीसी के कोड ऑफ कंडक्ट में स्पष्ट है कि अश्लील, आपत्तिजनक या अपमानजनक इशारे खेल भावना के खिलाफ हैं। ऐसे मामलों में खिलाड़ी पर जुर्माना, डिमेरिट पॉइंट और गंभीर स्थिति में मैच बैन तक लगाया जा सकता है। क्रिकेट पंडितों का कहना है कि गन-फायर जैसा इशारा न सिर्फ अनुचित है, बल्कि दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद तनाव को और बढ़ाता है।
खेल से आगे का संदेश
1952 के लखनऊ टेस्ट से लेकर 2025 के एशिया कप तक, भारत और पाकिस्तान के क्रिकेट मुकाबले हमेशा से खेल से बढ़कर माने गए हैं। जहाँ पहली बार दर्शकों की तीखी प्रतिक्रियाओं ने विवाद की शुरुआत की थी, वहीं आज खिलाड़ियों के इशारे और व्यवहार सुर्खियों का कारण बन रहे हैं। समकालीन अख़बारों और इतिहासकारों का मानना है कि भारत–पाकिस्तान क्रिकेट की यह प्रतिद्वंद्विता सिर्फ बल्ले और गेंद की नहीं, बल्कि राष्ट्रीय भावनाओं और राजनीतिक परिस्थितियों की भी कहानी है। अब सबकी निगाहें आईसीसी पर हैं कि वह एशिया कप के हालिया विवादों पर कैसी कार्रवाई करता है। लेकिन यह निश्चित है कि भारत–पाकिस्तान क्रिकेट की कहानी बिना विवादों के अधूरी है — और यही इसकी सबसे बड़ी पहचान भी बन चुकी है।
भारत–पाकिस्तान क्रिकेट: मैदान से उपजे विवादों का इतिहास
भारत और पाकिस्तान के बीच क्रिकेट सिर्फ खेल नहीं, बल्कि इतिहास, राजनीति और भावनाओं से जुड़ा एक ऐसा मंच रहा है, जहाँ मैदान पर हुई छोटी-सी घटना भी बड़े विवाद का रूप ले लेती है। 1952 में पहली बार जब पाकिस्तान ने भारत दौरे पर कदम रखा और लखनऊ विश्वविद्यालय मैदान पर दूसरा टेस्ट खेला, तभी क्रिकेट प्रतिद्वंद्विता की शुरुआत विवादों से हो गई। इस मैच में फ़ज़ल महमूद की घातक गेंदबाज़ी ने पाकिस्तान को उसकी पहली टेस्ट जीत दिलाई। लेकिन भारत की हार के बाद दर्शकों की नाराज़गी उबाल पर आ गई। समकालीन अख़बारों जैसे द हिंदू और टाइम्स ऑफ इंडिया ने उस समय लिखा कि मैदान में मौजूद भीड़ ने निराशा जताते हुए उपद्रव किया और मैच के बाद भारतीय खिलाड़ियों की टीम बस पर पत्थर फेंके गए। पाकिस्तानी अख़बार Dawn ने इसे पाकिस्तान क्रिकेट के लिए गर्व का क्षण बताया, जबकि भारत में इसे “कड़वा सबक” करार दिया गया।
इसके बाद भी भारत–पाकिस्तान मुकाबलों में विवाद थमे नहीं। 1989 में कराची में भारत के दौरे पर सचिन तेंदुलकर के डेब्यू टेस्ट के दौरान दर्शकों ने पिच पर पत्थर फेंके और सुरक्षा कारणों से मैच रोकना पड़ा। 1999 में चेन्नई टेस्ट के दौरान पाकिस्तान की जीत पर भारतीय दर्शकों ने तालियाँ बजाकर खेल भावना दिखाई, लेकिन कुछ कट्टरपंथी समूहों ने इसे राजनीतिक संदर्भ से जोड़कर विवाद खड़ा कर दिया। 2003 विश्वकप में दक्षिण अफ्रीका में खेले गए भारत–पाकिस्तान मैच के दौरान भी दोनों देशों के समर्थकों के बीच झड़पें हुईं और सुरक्षाकर्मी हालात को संभालने में जुटे।
हाल ही के वर्षों में भी विवाद लगातार सुर्खियों में रहे हैं। 2008 मुंबई हमलों के बाद भारत ने पाकिस्तान के साथ क्रिकेट संबंध पूरी तरह तोड़ दिए। 2019 विश्वकप में मैनचेस्टर में खेले गए भारत–पाकिस्तान मैच के दौरान दोनों देशों के प्रशंसकों ने कश्मीर मुद्दे पर बैनर और नारेबाज़ी कर विवाद खड़ा किया। और अब, एशिया कप 2025 में टॉस और मैच के बाद हाथ न मिलाने की घटना तथा पाकिस्तानी खिलाड़ी का बैट से गन-फायर जैसा इशारा फिर से खेल भावना पर सवाल खड़े कर रहा है।
भारत और पाकिस्तान के क्रिकेट मुकाबले इतिहास से लेकर वर्तमान तक इस बात के गवाह रहे हैं कि यह खेल केवल बल्ले और गेंद का मुकाबला नहीं है। हर बार जब दोनों टीमें मैदान में उतरती हैं, तब दर्शकों की उम्मीदें, राजनीतिक तनाव और राष्ट्रीय भावनाएँ भी मैदान पर उतर आती हैं। यही कारण है कि चाहे 1952 का लखनऊ टेस्ट हो या 2025 का एशिया कप, विवाद इस प्रतिद्वंद्विता का स्थायी हिस्सा बन चुके हैं।
भारत–पाकिस्तान क्रिकेट: विवादित पाकिस्तानी खिलाड़ियों की कहानियाँ
भारत और पाकिस्तान के बीच क्रिकेट मुकाबले हमेशा से तनाव और रोमांच से भरे रहे हैं। इन मुकाबलों ने जितने शानदार पलों को जन्म दिया, उतने ही विवाद भी पैदा किए। खासकर पाकिस्तान की ओर से कई खिलाड़ी अपनी आक्रामक शैली और मैदान पर हुए झगड़ों के कारण सुर्खियों में रहे। इनमें सबसे प्रमुख नाम जावेद मियांदाद का है, जबकि शोएब अख्तर, आमिर सोहेल और शाहिद अफरीदी भी विवादित घटनाओं में शामिल रहे।
जावेद मियांदाद: “कंगारू जम्प” और लगातार तकरार
1992 विश्व कप में भारत और पाकिस्तान का मैच सिडनी में खेला गया था। इस मैच के दौरान पाकिस्तानी बल्लेबाज़ जावेद मियांदाद और भारतीय विकेटकीपर किरण मोरे के बीच तीखी नोकझोंक हो गई। मोरे की जोर-जोर से अपीलों से परेशान होकर मियांदाद ने बैट उठाकर अंपायर से बहस की और फिर मैदान में कूदकर “कंगारू जम्प” जैसी हरकत की। यह दृश्य इतना चर्चित हुआ कि क्रिकेट इतिहास के सबसे बड़े मजाकिया मगर विवादित पलों में दर्ज हो गया। मियांदाद का भारतीय खिलाड़ियों से टकराव यहीं खत्म नहीं हुआ; अपने लंबे करियर में उन्होंने कई बार आक्रामक प्रतिक्रियाओं और शब्दों के इस्तेमाल से माहौल गरमाया।
शोएब अख्तर: तेज रफ्तार और गुस्से के लिए मशहूर
“रावलपिंडी एक्सप्रेस” कहे जाने वाले शोएब अख्तर अपनी रफ्तार और आक्रामकता के लिए जाने जाते हैं, लेकिन भारत के खिलाफ मैचों में उनका गुस्सा कई बार विवादों में बदल गया। 1999 से लेकर 2004 तक के मुकाबलों में वे भारतीय बल्लेबाज़ों को आउट करने के बाद आक्रामक जश्न मनाते रहे। 2010 एशिया कप में हरभजन सिंह और शोएब अख्तर के बीच गर्मागर्मी हुई, जिसमें दोनों खिलाड़ियों ने एक-दूसरे पर तंज कसे। यह विवाद इतना बढ़ा कि मैच के बाद भी इसकी चर्चा होती रही।
आमिर सोहेल: 1996 विश्व कप का यादगार विवाद
1996 विश्व कप क्वार्टरफाइनल में बेंगलुरु में भारत और पाकिस्तान आमने-सामने थे। पाकिस्तान की पारी के दौरान आमिर सोहेल ने वेंकटेश प्रसाद को चौका जड़ने के बाद बैट से इशारा करते हुए कहा कि अगली गेंद भी वहीं जाएगी। लेकिन अगले ही डिलीवरी पर प्रसाद ने उन्हें बोल्ड कर दिया और यह पल भारत–पाकिस्तान क्रिकेट इतिहास की सबसे यादगार और विवादित घटनाओं में दर्ज हो गया।
शाहिद अफरीदी: बूम-बूम स्टाइल और मैदान पर विवाद
शाहिद अफरीदी का नाम भी भारत के खिलाफ मैचों में कई बार विवादों से जुड़ा। उनकी आक्रामक बल्लेबाज़ी के साथ-साथ उनकी टिप्पणियाँ भी विवादित रहीं। 2007 टी20 विश्व कप और बाद के कई द्विपक्षीय सीरीज़ में अफरीदी की मैदान पर हरकतों और बयानों ने सुर्खियाँ बटोरीं।
भारत–पाकिस्तान मुकाबलों की तीखी प्रतिद्वंद्विता में पाकिस्तानी खिलाड़ियों की आक्रामकता कई बार विवाद का कारण बनी है। जावेद मियांदाद का “कंगारू जम्प”, आमिर सोहेल का इशारा, शोएब अख्तर की झड़पें और शाहिद अफरीदी की टिप्पणियाँ क्रिकेट इतिहास की ऐसी घटनाएँ हैं जो इस प्रतिद्वंद्विता को और ज्यादा चर्चित और भावनात्मक बना देती हैं।
भारत के खिलाफ विवादित बयान देने वाले पाकिस्तानी क्रिकेटर
भारत–पाकिस्तान क्रिकेट प्रतिद्वंद्विता मैदान से बाहर भी कई बार सुर्खियाँ बटोर चुकी है। सिर्फ बल्ले और गेंद ही नहीं, बल्कि खिलाड़ियों के बयान भी विवाद का कारण बने हैं। पाकिस्तान के कई क्रिकेटरों ने भारत को लेकर ऐसी टिप्पणियाँ कीं जिनसे माहौल गरमा गया और खेल भावना पर सवाल खड़े हुए।
सबसे पहले नाम आता है शाहिद अफरीदी का। 2011 में मोहाली में खेले गए विश्वकप सेमीफाइनल के बाद अफरीदी ने कहा था कि भारतीय मीडिया पाकिस्तान विरोधी माहौल बनाता है। इसके अलावा उन्होंने भारत के खिलाफ कई बार कड़े राजनीतिक बयान भी दिए, जिन पर विवाद खड़ा हुआ।
जावेद मियांदाद भी इस सूची में शामिल हैं। अपने करियर के दौरान वे न सिर्फ मैदान पर बल्कि मैदान से बाहर भी भारत को लेकर तल्ख टिप्पणी करते रहे। उन्होंने कई बार सार्वजनिक मंचों पर भारत के खिलाफ विवादित बयान दिए, जिन्हें भारतीय मीडिया और क्रिकेट प्रशंसकों ने खेल भावना के खिलाफ बताया।
शोएब अख्तर, जिन्हें रावलपिंडी एक्सप्रेस कहा जाता है, अक्सर अपनी आक्रामकता और बेबाक बयानों के कारण चर्चा में रहे। कई मौकों पर उन्होंने भारतीय खिलाड़ियों और टीम इंडिया के खिलाफ ऐसे बयान दिए जिनसे दोनों देशों के बीच तनावपूर्ण क्रिकेट माहौल और गहरा हो गया।
इसी तरह, सलीम मलिक और कुछ अन्य पूर्व पाकिस्तानी क्रिकेटर भी भारत को लेकर बयानबाज़ी में उलझे। इनमें भारत में खेलने से इनकार, द्विपक्षीय सीरीज़ पर राजनीतिक टिप्पणी और मीडिया में तीखे शब्दों का इस्तेमाल शामिल रहा।
भारत और पाकिस्तान के बीच खेल को अक्सर दोनों देशों की राजनीति और समाज का आईना माना जाता है। यही कारण है कि खिलाड़ियों के बयान महज़ व्यक्तिगत राय से आगे बढ़कर विवाद का रूप ले लेते हैं। चाहे शाहिद अफरीदी हों या जावेद मियांदाद, उनके बयानों ने हमेशा इस प्रतिद्वंद्विता की आग को और भड़काया है।
एशिया कप 2025 : हाथ न मिलाने से लेकर ‘गन-फायर’ हरकत तक, विवादों में भारत-पाकिस्तान मैच
डिस्क्लेमर:इस समाचार रिपोर्ट में भारत–पाकिस्तान क्रिकेट प्रतिद्वंद्विता से जुड़ी संवेदनशील और ऐतिहासिक घटनाओं का उल्लेख किया गया है। इसमें प्रयुक्त जानकारी समाचार अभिलेखों, सार्वजनिक स्रोतों और पूर्व प्रकाशित रिपोर्टों पर आधारित है। हमारा उद्देश्य केवल पाठकों को ऐतिहासिक और खेल-संबंधी घटनाओं की जानकारी देना है। किसी भी प्रकार की अशुद्धि, अपूर्णता या भिन्न व्याख्या के लिए वेबसाइट जिम्मेदार नहीं होगी।



