क्या 23 जून को पूरी काशी एक साथ पढ़ेगी हनुमान चालीसा? जानिए क्या है बड़ा संकल्प
वाराणसी में ज्येष्ठ मास के अंतिम बड़े मंगल (23 जून) को सुबह 7:30 बजे सामूहिक हनुमान चालीसा पाठ का भव्य आयोजन किया जाएगा। हनुमान सेना के आह्वान पर काशी के मंदिरों, मठों, व्यापारिक प्रतिष्ठानों, मॉर्निंग वॉकर्स समूहों और सामाजिक संगठनों से जुड़कर श्रद्धालु एक साथ हनुमान चालीसा का पाठ करेंगे।
वाराणसी : ज्येष्ठ मास के आठवें एवं अंतिम बड़े मंगल के अवसर पर आगामी 23 जून को प्रातः 7:30 बजे सम्पूर्ण काशी में एक भव्य, ऐतिहासिक एवं आध्यात्मिक सामूहिक हनुमान चालीसा पाठ महाअभियान आयोजित किया जाएगा। इस अवसर पर काशी के हनुमान मंदिरों, मठों, आश्रमों, व्यापारिक प्रतिष्ठानों, मोहल्लों, पार्कों, मॉर्निंग वॉकर्स समूहों तथा विभिन्न सामाजिक संगठनों में श्रद्धालु एक साथ श्री हनुमान चालीसा का पाठ कर संकटमोचन प्रभु श्री हनुमान जी का स्मरण करेंगे।
इस संबंध में हनुमान सेना की एक महत्वपूर्ण बैठक संगठन के अध्यक्ष एवं संयोजक सुधीर सिंह की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई। बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि ज्येष्ठ मास के अंतिम बड़े मंगलवार को काशी में सामूहिक हनुमान चालीसा पाठ का व्यापक जनआंदोलन चलाया जाएगा, जिससे बड़े मंगल का समापन लाखों श्रद्धालुओं की सामूहिक भक्ति और प्रभु स्मरण के साथ हो सके।
बैठक को संबोधित करते हुए सुधीर सिंह ने कहा कि काशी में सामूहिक हनुमान चालीसा पाठ का यह अभियान आज केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि जन-जन को जोड़ने वाला आध्यात्मिक आंदोलन बन चुका है। उन्होंने बताया कि लगभग पाँच वर्ष पूर्व अप्रैल माह में हनुमान सेना के आह्वान पर काशी में सामूहिक हनुमान चालीसा पाठ की शुरुआत हुई थी। काशीवासियों के अद्भुत उत्साह, श्रद्धा और भक्तिभाव को देखकर अगले ही माह से ज्येष्ठ मास के बड़े मंगल पर भण्डारा, सेवा एवं जनकल्याण के कार्यक्रम भी प्रारम्भ किए गए।
उन्होंने कहा कि आज यह आयोजन विशाल जनआस्था और जनसहभागिता का स्वरूप धारण कर चुका है। हजारों श्रद्धालु बिना किसी व्यक्तिगत निमंत्रण के स्वयं आगे आकर सेवा, सहयोग और सहभागिता का भाव प्रकट करते हैं। यही काशी की आध्यात्मिक चेतना और सनातन संस्कृति की सबसे बड़ी शक्ति है।
सुधीर सिंह ने काशीवासियों से भावपूर्ण अपील करते हुए कहा कि 23 जून को प्रातः 7:30 बजे अपने निकटतम हनुमान मंदिर, मठ, आश्रम, व्यापारिक प्रतिष्ठान अथवा सार्वजनिक स्थल पर परिवार, मित्रों और समाज बंधुओं के साथ सामूहिक रूप से हनुमान चालीसा का पाठ करें। यह आयोजन किसी एक संस्था या व्यक्ति का नहीं, बल्कि सम्पूर्ण काशी की आस्था, एकता और भक्ति का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि हनुमान सेना का लक्ष्य हनुमान चालीसा पाठ का वातावरण तैयार करना है, ताकि सम्पूर्ण काशी प्रभु श्री हनुमान जी के नाम से गुंजायमान हो उठे।
बैठक में उपस्थित हनुमान सेना के संरक्षक विजय कपूर ने कहा कि सामूहिक हनुमान चालीसा पाठ का विशेष आध्यात्मिक महत्व है। भक्तों की मान्यता है कि जब हजारों-लाखों श्रद्धालु एक ही समय में प्रभु श्री हनुमान जी का स्मरण करते हैं, तब सम्पूर्ण वातावरण दिव्य ऊर्जा से भर उठता है। उन्होंने कहा कि यदि अंतिम बड़े मंगल के अवसर पर काशी में एक लाख से अधिक हनुमान चालीसा पाठ सम्पन्न होते हैं, तो यह भक्ति, श्रद्धा और सनातन एकता का अद्भुत उदाहरण होगा।
हनुमान सेना के प्रमुख महासचिव मार्कण्डेय तिवारी ने कहा कि संगठन के कार्यकर्ता व्यापार मंडलों, सामाजिक संस्थाओं, मॉर्निंग वॉकर्स समूहों और आम नागरिकों से संपर्क कर अधिकाधिक लोगों को इस अभियान से जोड़ेंगे। उन्होंने कहा कि यह केवल धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि काशी की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान को मजबूत करने का अभियान है।
बैठक में उपस्थित बाबा गणिनाथ भक्त मण्डल, काशी के संरक्षक ने भी मण्डल की ओर से सम्पूर्ण काशी में जनसंपर्क कर 23 जून को प्रातः 7:30 बजे सामूहिक हनुमान चालीसा पाठ में अधिकाधिक लोगों को जोड़ने का संकल्प दोहराया। उन्होंने कहा कि बड़ा मंगल सेवा, समर्पण और मानव कल्याण का पर्व है तथा सामूहिक भक्ति समाज में सद्भाव, एकता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है।
वक्ताओं ने कहा कि जब मंदिरों की घंटियां, शंखध्वनि और लाखों कंठों से निकला हनुमान चालीसा का स्वर एक साथ गूंजेगा, तब सम्पूर्ण काशी आध्यात्मिक प्रकाश से आलोकित हो उठेगी। यह आयोजन आने वाली पीढ़ियों के लिए भी भक्ति, सेवा और सामाजिक एकता का प्रेरणास्रोत बनेगा।
बैठक में प्रमुख रूप से सुधीर सिंह, विजय कपूर, रंजीत गुप्ता, मार्कण्डेय तिवारी, मुकेश जायसवाल, विजय पाठक, संजय जोशी, बचाऊ जायसवाल सहित अनेक गणमान्य नागरिक एवं हनुमान भक्त उपस्थित रहे।
अंत में सभी श्रद्धालुओं से अपील की गई कि वे इस संदेश को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाएं और 23 जून को प्रातः 7:30 बजे सामूहिक हनुमान चालीसा पाठ में सहभागिता कर काशी को भक्ति, श्रद्धा और सनातन एकता के अनुपम उत्सव का साक्षी बनाएं।
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