लालकिले तक गूंजे ढोल-नगाड़े, वनवासी संस्कृति ने जीता दिल
नई दिल्ली में रविवार को देशभर से आए एक लाख से अधिक वनवासी समाज के लोगों ने भव्य सांस्कृतिक शोभा यात्रा निकाली। अजमेरी गेट से लालकिले तक निकली यात्रा में पारंपरिक वेशभूषा, लोक नृत्य, संगीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। रास्तेभर व्यापारिक, सामाजिक और धार्मिक संगठनों ने पुष्प वर्षा कर स्वागत किया। सांसद प्रवीन खंडेलवाल और रामवीर सिंह बिधूड़ी ने यात्रा को रवाना किया। आयोजन को ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ की जीवंत मिसाल बताया गया।
नयी दिल्ली : राष्ट्रीय राजधानी में रविवार को देश के विभिन्न राज्यों से आये एक लाख से अधिक वनवासी समाज के लोग दिल्ली पहुंचे और अपनी पारंपरिक संस्कृति, वेशभूषा, लोक नृत्य, संगीत तथा गौरवशाली विरासत का भव्य प्रदर्शन करते हुए पाँच विशाल सांस्कृतिक शोभा यात्राओं में शामिल हुए। पहली बार वन क्षेत्रों से निकले इन लोगों से भारतीय संस्कृति, लोक परंपराओं और सामाजिक समरसता की मनमोहक झलक देखने को मिली।
इस मौके पर आज अजमेरी गेट चौक से लालकिले तक वनवासियों की एक शोभा यात्रा निकाली गयी, जिसने पुरानी दिल्ली क्षेत्र को भारतीय लोक संस्कृति, परंपराओं और उत्सव की जीवंत झलक से सराबोर कर दिया।पारंपरिक वेशभूषा में सजे वनवासी बंधुओं के समूह आकर्षण का स्वागत करने के लिए स्थानीय लोगों की ओर से दिल्ली के लोगों द्वारा आयोजित किए गए ढोल-नगाड़ों की गूंज, शहनाई की मधुर धुन, लोक कलाकारों की मनमोहक प्रस्तुतियां और बैंड-बाजों की स्वर लहरियों ने पूरे वातावरण को उत्सवमय बना दिया।
अजमेरी गेट चौक से शुरू हुई इस ऐतिहासिक शोभा यात्रा को सांसद प्रवीन खंडेलवाल तथा सांसद रामवीर सिंह बिधूड़ी ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।इस मौके पर दिल्ली के अनेक गणमान्य नागरिक मौजूद रहे। यात्रा अजमेरी गेट चौक से बाजार अजमेरी गेट, हौज काजी, चावड़ी बाजार,नई सड़क, घंटा घर तथा चांदनी चौक मुख्य बाज़ार से होते हुए ऐतिहासिक लाल किले तक पहुंची।यात्रा मार्ग पर लगभग 70 से अधिक स्थानों पर कन्फ़ेडरेशन ऑफ़ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के नेतृत्व में बड़ी संख्या में स्थानीय व्यापारी संगठनों सहित अनेक धार्मिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक संगठनों ने वनवासी बंधुओं का पुष्प वर्षा कर भावभीना स्वागत किया।
जगह-जगह लोगों ने खड़े होकर तालियों के साथ इस सांस्कृतिक महासंगम का अभिनंदन किया तथा वनवासियों के स्वागत में पानी से लेकर सॉफ्ट ड्रिंक्स, फलों से लेकर खाद्य वस्तुओं तक के स्टॉल जगह- जगह लगाये गये थे।शोभा यात्रा में वनवासी समाज के लोगों ने अपनी पारंपरिक वेशभूषा, लोक नृत्य और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का अद्भुत प्रदर्शन किया।
इस मौके पर श्री खंडेलवाल ने कहा कि यह आयोजन केवल एक शोभा यात्रा नहीं, बल्कि ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ की सांस्कृतिक भावना का विराट उत्सव बनकर उभरा, जिसमें भारत की विविधता, परंपरा, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक एकता का अनुपम दर्शन हुआ।उन्होंने कहा कि दिल्ली की सड़कों पर आज जो दृश्य दिखाई दिया, वह भारतीय संस्कृति के गौरव, वनवासी समाज की समृद्ध परंपराओं और राष्ट्रीय एकात्मता का ऐसा जीवंत उदाहरण था, जो आने वाले वर्षों तक लोगों की स्मृतियों में अंकित रहेगा। दृश्यात्मक, सांस्कृतिक एवं सामाजिक दृष्टि से यह आयोजन अत्यंत महत्वपूर्ण, प्रेरणादायी एवं ऐतिहासिक माना जा रहा है। (वार्ता)
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