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अमेरिका-ईरान के बीच ‘95% डील’ पूरी, दुनिया की नजर अब आखिरी फैसले पर

अमेरिका और ईरान के बीच प्रारंभिक समझौते की खबरों ने वैश्विक राजनीति में हलचल बढ़ा दी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों देश 30 दिनों के भीतर होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह खोलने और 60 दिनों तक युद्धविराम बढ़ाने पर सहमत हुए हैं। परमाणु वार्ता फिलहाल टाल दी गई है। वहीं अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने समझौते को “मजबूत प्रस्ताव” बताया। दूसरी ओर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की खुलकर तारीफ करते हुए भारत को भरोसेमंद साझेदार बताया।

  • रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका और ईरान 30 दिनों के भीतर होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह खोलने पर हुए सहमत

मॉस्को : अमेरिका और ईरान ने एक प्रारंभिक समझौते के तहत 30 दिनों के भीतर होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह खोलने पर सहमति जताई है। ‘वाशिंगटन’ पोस्ट ने एक अज्ञात राजनयिक के हवाले से यह जानकारी दी।अखबार ने एक अज्ञात ईरानी अधिकारी के हवाले से बताया कि अमेरिका-ईरान के प्रारंभिक शांति समझौते में परमाणु वार्ता को बाद की तारीख तक स्थगित करने का भी प्रावधान है।

अखबार ने एक अज्ञात राजनयिक के हवाले से बताया कि ईरान और अमेरिका के बीच प्रारंभिक ढांचागत समझौते को अभी तक ईरानी पक्ष द्वारा अनुमोदित नहीं किया गया है।अखबार के अनुसार, अंतिम समझौते तक पहुंचने के लिए दोनों पक्ष 60 दिनों के लिए युद्धविराम बढ़ाने पर सहमत हुए हैं।फॉक्स न्यूज ने सूत्रों के हवाले से बताया कि अमेरिका-ईरान ढांचागत समझौता “95 प्रतिशत पूरा हो चुका है”, हालांकि वार्ताकार अभी भी होर्मुज जलडमरूमध्य और तेहरान के परमाणु भंडार से संबंधित शब्दों पर बहस कर रहे हैं।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले कहा था कि ईरान के साथ समझौते पर काफी हद तक सहमति बन चुकी है और अंतिम पहलुओं और विवरणों पर चर्चा चल रही है, जिनकी घोषणा जल्द ही की जाएगी।नाम न बताने की शर्त पर अमेरिकी अधिकारियों ने चैनल को पुष्टि की कि ईरान ने सैद्धांतिक रूप से समझौते के ढांचे पर सहमति दे दी है।एक अधिकारी ने ब्रॉडकास्टर को बताया, “हम 95 प्रतिशत तक पहुँच चुके हैं।

परमाणु भंडार और होर्मुज जलडमरूमध्य पर हमारा समझौता हो चुका है, लेकिन हम भाषा पर बातचीत कर रहे हैं।”28 फरवरी को अमेरिका और इज़रायल ने ईरान में ठिकानों पर हमले शुरू किए, जिनमें 3,000 से अधिक लोग मारे गए। 8 अप्रैल को वाशिंगटन और तेहरान ने दो सप्ताह के युद्धविराम की घोषणा की। इस्लामाबाद में हुई बाद की बातचीत बेनतीजा रही। हालांकि शत्रुता की पुनः शुरुआत की कोई घोषणा नहीं की गई, लेकिन अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी शुरू कर दी।

ईरान के साथ समझौता अब भी संभव, ‘काफी मज़बूत’ प्रस्ताव मेज़ पर : रुबियो

अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा है कि ईरान के साथ समझौते की संभावना अब भी बनी हुई है और इस दिशा में एक “काफी मजबूत” प्रस्ताव वार्ता मेज पर रखा गया है।श्री रुबियो ने भारत यात्रा के दौरान संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि प्रस्ताव में ईरान की ओर से होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने तथा परमाणु मुद्दों पर वास्तविक, महत्वपूर्ण और समयबद्ध वार्ता में शामिल होने की बात शामिल है।

उन्होंने कहा, “उम्मीद है कि हम इसे सफल बना लेंगे। इसे खाड़ी देशों और वैश्विक स्तर पर व्यापक समर्थन प्राप्त है। जिन भी देशों से हमने इस पर चर्चा की, उनका मानना है कि यह न केवल बेहद उचित बल्कि दुनिया के हित में भी है।”श्री रुबियो ने कहा कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप किसी भी कीमत पर जल्दबाजी में समझौता नहीं करेंगे।

उन्होंने कहा, “राष्ट्रपति कोई गलत समझौता नहीं करेंगे। हम देखेंगे कि आगे क्या होता है। कूटनीति को सफल होने का पूरा अवसर दिया जाएगा, उसके बाद ही अन्य विकल्पों पर विचार किया जाएगा।”समझौते में देरी के संबंध में पूछे जाने पर श्री रुबियो ने कहा कि अब सब कुछ ईरान की प्रतिक्रिया पर निर्भर है। उन्होंने कहा, “ईरानी व्यवस्था को जवाब देने में थोड़ा अधिक समय लगता है।उन्होंने दोहराया, “राष्ट्रपति खराब समझौता नहीं करेंगे। या तो अच्छा समझौता होगा, या फिर हमें इस मुद्दे से किसी अन्य तरीके से निपटना पड़ेगा। हालांकि हमारी प्राथमिकता अच्छा समझौता ही है।

“लेबनान के मुद्दे पर श्री रुबियो ने कहा कि अमेरिका उस विषय पर अलग से काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि समस्या इजरायल या लेबनान सरकार नहीं, बल्कि हिजबुल्लाह है, जो लेबनान की जनता को नुकसान पहुंचा रहा है।श्री रुबियो ने कहा कि इजरायल को अपनी सुरक्षा का अधिकार हमेशा रहेगा। उन्होंने कहा, “यदि हिजबुल्ला मिसाइल दागता है या ऐसा करने की तैयारी करता है, तो इजरायल को जवाब देने और इसे रोकने का पूरा अधिकार है।”

मैं पीएम मोदी का बहुत बड़ा प्रशंसक; भारत मुझ पर 100 प्रतिशत भरोसा कर सकता है: राष्ट्रपति ट्रम्प

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने रविवार रात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को महान व्यक्ति और अपना मित्र बताते हुए कहा कि भारत उन पर 100 प्रतिशत भरोसा कर सकता है।श्री ट्रम्प ने अमेरिकी स्वतंत्रता की 250वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में यहां आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान यह बात फोन कॉल पर कही। यह फोन भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने श्री ट्रम्प को लगाया था।

श्री ट्रम्प ने फोन पर कहा, “हम भारत के इतने करीब पहले कभी नहीं रहे और भारत मुझ पर तथा हमारे देश पर 100 फीसदी ऐतबार कर सकता है। अगर उन्हें कभी भी मदद की ज़रूरत होगी, तो वे जानते हैं कि कहां फोन करना है। वे सीधे यहीं फोन कर सकते हैं।”यहाँ भारत मंडपम में आयोजित इस भव्य कार्यक्रम में विदेश मंत्री एस. जयशंकर, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो और श्री गोर शामिल हुए।श्री गोर ने यह फोन का स्पीकर माइक पर ही लगा दिया जिससे कि हॉल में मौजूद सभी लोग श्री ट्रम्प की आवाज सुन सकें।

राष्ट्रपति ट्रम्प ने कहा, “मैं बस सभी को नमस्कार कहना चाहता हूं। मैं प्रधानमंत्री से प्यार करता हूं, (नरेंद्र) मोदी महान हैं, वह मेरे मित्र हैं और मैं सभी को एक बहुत अच्छी शाम की शुभकामनाएं देना चाहता हूं।”श्री ट्रम्प ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था की तारीफ करते हुए यह भी दावा किया कि उनके देश की अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार इस समय रिकॉर्ड स्तर पर हैं।

इस कार्यक्रम में श्री ट्रम्प ने श्री रुबियो को “अमेरिकी इतिहास का सबसे महान विदेश मंत्री” बताया और कहा, “प्रधानमंत्री मोदी को मेरा नमस्कार कहें और उन्हें बताएं कि मैं उनका बहुत बड़ा प्रशंसक हूँ।”इससे पहले कार्यक्रम में अपने संक्षिप्त संबोधन में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भारत को अमेरिका का एक अत्यंत महत्वपूर्ण भागीदार बताया।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अपने संबोधन में कहा कि अमेरिकी स्वतंत्रता की घोषणा ने उन विचारों को जन्म दिया जिन्होंने आधुनिक दुनिया को आकार दिया है, जैसे कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता, कानून का शासन, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और जवाबदेह शासन। उन्होंने कहा कि भारत के बहुलवादी समाज और परामर्श की संस्कृति के समृद्ध इतिहास को देखते हुए इन विचारों की गूंज भारत में स्वाभाविक है।(स्पुतनिक/वार्ता)

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