Business

जानिये स्प्रिंकलर सिंचाई पद्धति और इसके फायदे

स्प्रिंकलर सिंचाई पद्धति बरसात की बौछार का अहसास देने वाली सिंचाई पद्धति है। इस पद्धति में पानी को दाब (प्रेशर) के साथ पाइप के जाल (नेटवर्क) द्वारा वितरित कर स्प्रिंकलर के नोजिल तक पहुंचाया जाता है। जहां से यह एक समान वर्षा की बौछारो के रूप मे जमीन में फैलता है।

स्प्रिंकलर सिंचाई क्या है ?
यह सिंचाई करने का एक उन्नत साधन और तकनीक है। इस तकनीक के माध्यम से सिंचाई ऐसे की जाती है, मानो बरसात हो रही हो। देश में इसको फव्वारा सिंचाई भी कहते हैं। इसके अंतर्गत ट्यूबवेल/टंकी या तालाब से पानी को पाइपों के द्वारा खेत तक ले जाते हैं और वहां पर उन पाइपों के ऊपर नोजिल फिट कर दी जाती है। इन नोजिल से पानी फसल के ऊपर इस प्रकार गिरता है, मानो बरसात हो रही हो। पूरी फसल को एक समान पानी प्राप्त होता है। पानी के दबाव के आधार पर स्प्रिंकलर को तीन भागों में बांटा गया है:

1) रेन गन स्प्रिंकलर
2) माध्यम फव्वारा/फव्वारा स्प्रिंकलर
3) माइक्रो स्प्रिंकलर या सूक्ष्म फव्वारा

रेन गन स्प्रिंकलर में पानी काफी तेज गति से निकलता है. इसकी स्पीड बदूंक के बराबर होती है। इसका प्रयोग पलेवा करने में गन्ने की फसल में किया जाता है। वहीं माध्यम फव्वारा का इस्तेमाल मुलायम फूल और पत्तियों वाली फसलों में किया जाता है। माइक्रो स्प्रिंकलर का प्रयोग फूलों एवं छोटे पत्ते वाली सब्जियों में किया जाता है।

इस तकनीक का सबसे बड़ा लाभ यह है कि किसान अपनी फसल की आवश्यकतानुसार फव्वारों का चयन कर सकते हैं। फव्वारा सिंचाई में नोजिल का भी महत्वपूर्ण योगदान होता है। नोजिल यह तय करता है कि एक घंटे में एक खेत में कितने पानी की दर की आवश्यकता है एवं कितने मीटर वर्ग में इससे सिंचाई होगी।

BABA GANINATH BHAKT MANDAL  BABA GANINATH BHAKT MANDAL

Related Articles

Back to top button