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आत्मनिर्भर भारत के लिए शिक्षा वेबिनार में पीएम मोदी बोले- आज भारत के टैलेंट की पूरी दुनिया में डिमांड

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को आत्मनिर्भर भारत के लिए शिक्षा, शोध और कौशल विकास को बढ़ावा देने पर आधारित वेबिनार के उद्घाटन सत्र को संबोधित किया। इस वेबिनार का मकसद बदलते समय में शोध और नवाचार को बढ़ावा देना, गहरे समुद्री मिशन, भारत को विश्व की कौशल राजधानी बनाना, शिक्षा और बहुभाषावाद में उत्कृष्टता के जरिए श्रम शक्ति तैयार करना है। वेबिनार में अलग-अलग थीम पर 6 सत्रों का आयोजन किया जाएगा।

इस बार बजट में शोध और नवाचार को बढ़ावा देने का मकसद

इस बार बजट में शोध और नवाचार को बढ़ावा देने के मकसद से नेशनल रिसर्च फाउंडेशन की स्थापना की बात कही गई थी। साथ ही बताना चाहेंगे कि इस हेतु बजट में अगले 5 साल के लिए 50 हजार करोड़ रुपए की राशि भी आवंटित की गई। एप्रेंटिश योजना के लिए 3054 करोड़ रुपए और एजुकेशन हब बनाने के लिए ग्लू ग्रांट, डीपॉरशन मिशन, हाइड्रोजन एनर्जी मिशन, लद्दाख में नया केंद्रीय विश्वविद्यालय व स्कूल शिक्षा में अमूल परिवर्तन जैसे प्रावधान किए जाएंगे जो निश्चित रूप से देश के शिक्षा, शोध, अनुसंधान एवं कौशल विकास को और अधिक तीव्र गति से बढ़ाएंगे। डिजिटल एजुकेशन के जरिए शिक्षा को बढ़ावा देना और देश में एजुकेशन हब विकसित करने जैसे विषय वेबिनार के एजेंडे में शामिल किए गए। इस वेबिनार में देश के 350 से अधिक प्रमुख वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों एवं उद्योग जगत फिकी, सीआईआई, एसोचेम के प्रतिनिधियों ने भी हिस्सा लिया।

पीएम मोदी ने वेबिनार के दौरान संबोधन में कहा कि आज का यह मंथन ऐसे समय में हो रहा है जब देश अपने पर्सनल, इंट्लेक्चुअल, इंडस्ट्रियल टेम्प्रामेंट और टैलेंट को दिशा देने वाले पूरे इकोसिस्टम को ट्रांसफॉर्म करने की तरफ तेजी से बढ़ रहा है। इसे और गति देने के लिए आप सभी से बजट से पहले भी सुझाव लिए गए थे। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के संबंध में भी देश के लाखों लोगों से विचार करने का सौभाग्य मिला। अब इसके इम्पिलिमेंटेशन के लिए हम सभी को साथ मिलकर चलना है।

आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के लिए देश के युवाओं में आत्मविश्वास भी जरूरी

पीएम मोदी ने कहा, “आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के लिए देश के युवाओं में आत्मविश्वास उतना ही जरूरी है। आत्मविश्वास तभी आता है, जब युवा को अपनी एजुकेशन, अपनी नॉलेज, पर पूरा विश्वास हो। आत्मविश्वास तभी आता है, जब उसको अहसास होता है कि उसकी पढ़ाई, उसे अपना काम करने का अवसर दे रही है और जरूरी स्किल भी। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति, इसी सोच के साथ बनाई गई है।”

राष्ट्रीय शिक्षा नीति के हर प्रावधान को जल्द से जल्द जमीन पर उतारने के लिए तेजी से करना होगा काम

पीएम मोदी ने कहा, प्री-नर्सरी से पीएचडी तक राष्ट्रीय शिक्षा नीति के हर प्रावधान को जल्द से जल्द जमीन पर उतारने के लिए अब हमें तेजी से काम करना है। कोरोना की वजह से अगर रफ्तार कुछ धीमी भी पड़ी थी तो अब उसके प्रभाव से निकलकर हमें जरा गति बढ़ानी भी जरूरी है और आगे बढ़ना भी जरूरी है। इस वर्ष का बजट भी इस दिशा में बहुत मददगार सिद्ध होगा।

देश के यूनिवर्सिटी, कॉलेज और आरएंडडी इंस्टिट्यूशंस में बेहतर सिनर्जी आज हमारे देश की सबसे बड़ी जरूरत

उन्होंने कहा कि इस वर्ष के बजट में हेल्थ के बाद जो दूसरा सबसे बड़ा फोकस है, वो एजुकेशन, स्किल, रिसर्च और इनोवेशन पर ही है। देश के यूनिवर्सिटी, कॉलेज और आर एंड डी इंस्टिट्यूशंस में बेहतर सिनर्जी आज हमारे देश की सबसे बड़ी जरूरत बन गई है। इसी को ध्यान में रखते हुए ग्लू ग्रांट का प्रावधान किया गया है जिसके तहत अभी 9 शहरों में इसके लिए जरूरी मैकेनिज्म तैयार किए जा सके। अप्रेंटिसशिप पर स्किल डवलपमेंट और अपग्रेडेशन पर इस बजट में जो बल दिया गया है वो भी अभूतपूर्व है।

आज साइंटिफिक पब्लिकेशन के मामले में भारत टॉप थ्री देशों में

प्रधानमंत्री ने कहा, “बीते वर्षों में एजुकेशन को एम्पलोयेब्लिटी और एंत्रप्रिन्यॉर केपेब्लिटि से जोड़ने का जो प्रयास किया गया है, ये बजट उनको और विस्तार देता है। इन्हीं प्रयासों का परिणाम है कि आज साइंटिफिक पब्लिकेशन के मामले में भारत टॉप थ्री देशों में आ चुका है। पीएचडी करने वालों की संख्या और स्टार्टअप के इकोसिस्टम के मामले में भी हम दुनिया में टॉप थ्री में पहुंच चुके हैं। ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स में भारत दुनिया की टॉप 50 इनोवेटिव कंट्रीज़ में शामिल हो चुका है और निरंतर सुधार कर रहा है। उच्च शिक्षा, रिसर्च और इनोवेशन को निरंतर प्रोत्साहन से हमारे स्टूडेंट्स और यंग साइंटिस्ट के लिए नए अवसर बहुत ज्यादा बढ़ रहे हैं। अच्छी बात यह भी है कि आर एंड डी में बेटियों की भागीदारी में एक अच्छी संतोषकारक वृद्धि देखने को मिल रही है।”

देश के स्कूलों में अटल टिंकरिंग लैब से लेकर उच्च संस्थानों में अटल इंक्युबेशन सेंटर तक पर फोकस

उन्होंने कहा कि पहली बार देश के स्कूलों में अटल टिंकरिंग लैब से लेकर उच्च संस्थानों में अटल इंक्युबेशन सेंटर तक पर फोकस किया जा रहा है। देश में स्टार्ट अप्स के लिए हैकथॉन्स की नई परंपरा देश में बन चुकी है, जो देश के युवाओं और इंडस्ट्री, दोनों के लिए बहुत बड़ी ताकत बन रही है। सिर्फ नेशनल इंशिएटिव फॉर डेवलपिंग एंड हारनेसिंग इनोवेशन के माध्यम से ही 3500 से ज्यादा स्टार्टअप नर्चर किए जा चुके हैं।

इसी तरह ‘द नेशनल सूपर कंप्यूटिंग मिशन’ के तहत परम शिवाय, परम शक्ति और परम ब्रह्मा नाम से तीन सूपर कम्प्यूटर आईआईटी बीएचयू, आईआईटी खड़गपुर और आईआईएसईआर पुणे में स्थापित किए जा चुके हैं। इस वर्ष देश के एक दर्जन से ज्यादा संस्थानों में ऐसे सूपर कम्प्यूटर स्थापित करने की योजना है। आईआईटी खड़गपुर, आईआईटी दिल्ली और बीएचयू में तीन सॉफिस्टिकेटेड, एनालिटिकल और टेक्निकल हेल्प इंस्टिट्यूट भी सेवा दे रहे हैं। इन सारे कार्यों के बारे में बात करना आज इसलिए जरूरी है क्योंकि यह सरकार के वीजन और सरकार की अप्रोच को दिखाता है। 21वीं सदी के भारत में 19वीं सदी की सोच को पीछे छोड़कर ही हमें आगे बढ़ना होगा।

देश को पहली बार मेटियोरोलॉजी से जुड़े अंतर्राष्ट्रीय मानक पर खरा उतरने वाले इंडियन सॉल्युशंस मिल चुके हैं और ये सिस्टम लगातार मजबूत किया जा रहा है। इससे आर एंड डी और हमारे प्रॉडक्ट्स की ग्लोबल कम्पिटेंसी में बहुत सुधार आएगा। इसके अलावा हाल जियो स्पेशियल डेटा को लेकर भी बहुत बड़ा रिफ़ॉर्म किया गया है। अब स्पेस डेटा और उस पर आधारित स्पेस टेक्नोलॉजी को देश के युवाओं के लिए, एंत्रप्रिन्यॉर के लिए, स्टार्टअप के लिए खोल दिया गया है। मेरा आप सभी साथियों से आग्रह है कि इन रिफ़ॉर्म का ज्यादा से ज्यादा उपयोग करें और ज्यादा से ज्यादा लाभ उठाएं।

देश में पहली बार नेशनल रिसर्च फ़ाउंडेशन का निर्माण किया जा रहा है

प्रधानमंत्री ने कहा, इस वर्ष के बजट में इंस्टिट्यूशन मेकिंग और एक्सेस पर और जोर दिया गया है। देश में पहली बार नेशनल रिसर्च फ़ाउंडेशन का निर्माण किया जा रहा है। इसके लिए 50 हजार करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। इससे रिसर्च से जुड़े संस्थानों के गवर्नेंस स्ट्रक्चर से लेकर आर एंड डी, अकेडेमिया और इंडस्ट्री के लिंकेज को बल मिलेगा। बायो टेक्नोलॉजी से जुड़ी रिसर्च में बजट में 100 प्रतिशत से ज्यादा की वृद्धि सरकार की प्राथमिकताओं को दर्शाती है। भारत के फार्मा और वैक्सीन से जुड़े रिसर्चर्स ने देश को सुरक्षा और सम्मान दोनों दिलाया है।

किसानों की आय बढ़ाने के लिए उनका जीवन बेहतर बनाने के लिए बायो टेक्नोलॉजी की रिसर्च जारी

अपने इस सामर्थ्य को और सशक्त करने के लिए सरकार पहले ही 7 नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ फार्माश्यूटिकल एजुकेशन रिसर्च को राष्ट्रीय महत्व के संस्थान घोषित कर चुका है। इस सेक्टर में आर एंड डी को लेकर हमारे प्राइवेट सेक्टर की भूमिका बहुत प्रशंसनीय है। मुझे विश्वास है कि इस भूमिका का आने वाले समय में ज्यादा से ज्यादा विस्तार होगा। अब बायो टेक्नोलॉजी के समार्थ्य का दायरा देश की खाद्य सुरक्षा, पोषण और कृषि के हित में कैसे व्यापक हो इसके लिए प्रयास किए जा रहे हैं। किसानों की आय बढ़ाने के लिए उनका जीवन बेहतर बनाने के लिए बायो टेक्नोलॉजी की रिसर्च में जो साथी लगे हैं देश को उनसे बहुत उम्मीदें हैं। मेरा इंडस्ट्री के तमाम साथियों से आग्रह है कि इसमें अपनी भूमिका बढ़ाएं।

देश में बनाए जा रहे 10 बायोटेक यूनिवर्सिटी

देश में 10 बायोटेक यूनिवर्सिटी, रिसर्च जॉइंट इंडस्ट्री, ट्रांसलेशन कलस्टर उर्जित भी बनाए जा रहे हैं ताकि इसमें होने वाले इंवेंशन और इनोवेशन का इंडस्ट्री तेजी से उपयोग कर सके। इसी तरह देश के 100 से ज्यादा एस्पेरेशनल डिस्ट्रिक्ट में बायोटेक किसान प्रोग्राम, हिमालयन बायो रिसोर्सेज प्रोग्राम या फिर कंसोर्टियम प्रोग्राम ऑन मरीन बायोलॉजिकल नेटवर्क में रिसर्च और इंडस्ट्री का भागीदारी कैसे बेहतर हो सकती है इसके लिए हमें मिलकर काम करना है।

फ्युचर फ्यूल, ग्रीन एनर्जी, हमारी एनर्जी में आत्मनिर्भरता के लिए बहुत ज़रूरी

फ्युचर फ्यूल, ग्रीन एनर्जी, हमारी एनर्जी में आत्मनिर्भरता के लिए बहुत ज़रूरी है। इसलिए बजट में घोषित हाइड्रोजन मिशन एक बहुत बड़ा संकल्प है। भारत ने हाइड्रोजन व्हीकल का टेस्ट कर लिया है। अब हाइड्रोजन को ट्रांसपोर्ट के फ्यूल के रूप में उपयोगिता और इसके लिए खुद को इंडस्ट्री रेडी बनाने के लिए अब हमें मिलकर आगे बढ़ना होगा।

समुद्री सम्पदा से जुड़ी रिसर्च में भी सामर्थ्य बढ़ाना जरूरी

इसके अलावा समुद्री सम्पदा से जुड़ी रिसर्च में भी अपने सामर्थ्य को हमें बढ़ाना है। सरकार ‘डीप सी मिशन’ लॉन्च भी करने वाली है। यह मिशन गोल ओरिएंटेड होगा और मल्टी सेक्ट्रल अप्रोच पर आधारित होगा ताकि ब्लू इकोनॉमी के पोटेंशियल को हम पूरी तरह से अनलॉक कर सके। नई नेशनल एजुकेशन पॉलिसी में स्थानीय भाषा के ज्यादा से ज्यादा उपयोग के लिए प्रोत्साहन दिया गया है। अब ये सभी शिक्षाविदों का, हर भाषा के जानकारों का दायित्व है कि देश और दुनिया का बेस्ट कंटेंट भारतीय भाषाओं में कैसे तैयार हो। टेक्नोलॉजी के इस युग में ये पूरी तरह से संभव है।

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