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देशभर के साइबर ठगों को सप्लाई होते थे बैंक खाते, दिल्ली पुलिस ने ऐसे पकड़ा पूरा नेटवर्क

पूर्वी दिल्ली पुलिस ने साइबर अपराध के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए म्यूल अकाउंट उपलब्ध कराने वाले संगठित गिरोह के 10 सदस्यों को गिरफ्तार किया है। जांच में खुलासा हुआ कि आरोपी बेरोजगार और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को लालच देकर बैंक खाते खुलवाते थे और उनकी बैंकिंग जानकारी साइबर अपराधियों को सौंप देते थे। पुलिस ने 11 पीओएस मशीनें, 27 चेक बुक, 17 एटीएम कार्ड और 12 मोबाइल फोन बरामद किए हैं। मामले की जांच जारी है।

नयी दिल्ली : पूर्वी दिल्ली पुलिस ने संगठित साइबर अपराध के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई में ‘म्यूल अकाउंट’ (फर्जी बैंक खातों) उपलब्ध कराने वाले एक संगठित गिरोह का भंडाफोड़ कर 10 लोगों को गिरफ्तार किया है। इन लोगों पर पूरे देश में सक्रिय साइबर अपराधियों को बैंक खाते उपलब्ध कराने का आरोप है।

गिरफ्तार आरोपियों के नाम विजय कुमार (31), प्रदीप कुमार (42), यतेंद्र कुमार (23), मुकेश (24), विनेश (37), गुरबाज सिंह (27), अमन (27), सूरज यादव (24), गौरव नाहर (22) और लक्ष्मण (33) है।इस गिरोह पर ऑनलाइन धोखाधड़ी से प्राप्त धनराशि को प्राप्त करने और उसे विभिन्न खातों के माध्यम से आगे भेजने के लिए बैंक खातों का इस्तेमाल करने का आरोप है। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने 11 पीओएस (पॉइंट ऑफ सेल) मशीनें, 27 चेक बुक, 17 एटीएम कार्ड और 12 मोबाइल फोन बरामद किए।

पुलिस उपायुक्त (पूर्व) राजीव कुमार ने कहा कि पूर्वी जिले की पुलिस संगठित साइबर अपराध नेटवर्क के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने नागरिकों से अपील किया कि वे अपने बैंक खाते, एटीएम कार्ड या बैंकिंग पासवर्ड या पिन किसी अन्य के साथ साझा न करें, न बेचें और न ही किसी और को इनका इस्तेमाल करने दें। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसी गतिविधियों से साइबर धोखाधड़ी हो सकती है और कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।

पुलिस के अनुसार, यह मामला साइबर धोखाधड़ी की एक शिकायत की जांच के दौरान सामने आया। इसमें केरल के एक पीड़ित से कथित तौर पर ठगे गए दो लाख रुपये का पता एक प्राइवेट बैंक में खुले ‘म्यूल बैंक अकाउंट’ से चला। इसके बाद धनराशि के लेन-देन के रास्ते और तकनीकी जांच से पता चला कि एक बड़ा नेटवर्क काम कर रहा है, जो साइबर अपराधियों को गैर-कानूनी तरीके से कमायी गयी धनराशि लेने और ट्रांसफर करने के लिए बैंक अकाउंट उपलब्ध कराता है।

पूर्वी जिला पुलिस की एक समर्पित साइबर टीम ने एसीपी पवन कुमार के मार्गदर्शन में बड़े पैमाने पर वित्तीय और तकनीकी विश्लेषण, मोबाइल फ़ोन की जांच और फ़ील्ड वेरिफिकेशन किया, जिसके बाद इस संगठित रैकेट का पर्दाफ़ाश हुआ।पुलिस ने बताया कि आरोपी कथित रूप से नौकरी के झूठे ऑफर और पैंसों का लालच देकर बेरोजगार और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को निशाना बनाते थे।

उनसे बैंक खाते खुलवाने के बाद, यह गिरोह कथित तौर पर खाते की जानकारी, एटीएम कार्ड, चेक बुक, रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर और इंटरनेट बैंकिंग सुविधाओं का कंट्रोल अपने हाथ में ले लेते थे और बाद में इन्हें अलग-अलग राज्यों में साइबर अपराधियों को सौंप देते थे।आरोप है कि इस गैंग ने धोखाधड़ी से प्राप्त धन को स्थानांतरित करने और निकालने के लिए पीओएस मशीनों, एटीएम कार्ड, चेक बुक और मोबाइल फोन का इस्तेमाल किया, साथ ही वह वास्तविक लाभार्थियों की पहचान छिपाने की भी कोशिश करता था। (वार्ता)

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