“5 साल में मिट्टी से महागाथा, गंगा एक्सप्रेसवे ने कैसे बदल दी यूपी की तकदीर?”
Yogi Adityanath के विजन और मॉनिटरिंग में गंगा एक्सप्रेसवे महज पांच वर्षों में हकीकत बना। 594 किमी लंबा यह एक्सप्रेसवे मेरठ से प्रयागराज तक 12 जिलों को जोड़ते हुए किसानों, उद्योग और युवाओं के लिए नए अवसर लेकर आया है। आधुनिक तकनीक, पारदर्शी भूमि अधिग्रहण और तेज क्रियान्वयन ने इसे यूपी के इंफ्रास्ट्रक्चर विकास की सबसे बड़ी सफलता बना दिया है, जो ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था की दिशा में मजबूत कदम है।
लखनऊ ; मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा देखा गया एक सपना बुधवार को 594 किलोमीटर लंबे गंगा एक्सप्रेसवे के रूप में देश को समर्पित हो गया। यह कहानी सिर्फ एक सड़क बनने की नहीं, बल्कि उस बदलाव की है जहां स्पष्ट नीति, मजबूत इच्छाशक्ति, तकनीक और प्रशासनिक दक्षता ने कच्ची मिट्टी पर विकास की महागाथा लिख दी। गंगा एक्सप्रेसवे की निर्माण यात्रा इस बात का प्रमाण है कि बुलंद इरादों और प्रभावी क्रियान्वयन से कुछ भी संभव है। गंगा एक्सप्रेसवे, निर्णय से निर्माण तक की वह कहानी है, जो उत्तर प्रदेश को ‘वन ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी’ की दिशा में नई गति देगी।
2017–2019: सुनियोजित विकास की रूपरेखा
वर्ष 2017 में उत्तर प्रदेश में डबल इंजन सरकार के मुखिया के रूप में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कार्यभार संभाला और ग्रीनफील्ड, एक्सेस-कंट्रोल्ड गंगा एक्सप्रेसवे विकसित करने का फैसला किया गया। 2018–19 में डीपीआर, भूमि चिन्हांकन और टेक्नो-इकोनॉमिक स्टडी पूरी की गई। यही वह चरण था, जहां प्रदेश के समावेशी विकास तथा भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर इस एक्सप्रेसवे की डिजाइन तैयार की गई और इसे अमली जामा पहनाने के लिए डेडिकेटेड टीम तैयार की गई।
2020–2021: नीति से क्रियान्वयन तक
वर्ष 2020 गंगा एक्सप्रेसवे के लिए निर्णायक मोड़ साबित हुआ, जब परियोजना को आवश्यक पर्यावरणीय मंजूरियां प्राप्त हुईं और इसके वित्तीय ढांचे को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल के तहत अंतिम रूप दिया गया। इससे न केवल निवेश का मार्ग प्रशस्त हुआ, बल्कि परियोजना के समयबद्ध और पेशेवर क्रियान्वयन की मजबूत नींव भी रखी गई। इसके बाद वर्ष 2021 में टेंडर प्रक्रिया को पारदर्शी और प्रतिस्पर्धात्मक तरीके से पूरा करते हुए पूरे प्रोजेक्ट को 4 प्रमुख ग्रुप/पैकेज में विभाजित किया गया। इन पैकेजों का कार्यान्वयन देश की अग्रणी इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों, आईआरबी, अडानी, एचजी इंफ्रा और एलएंडटी जैसी एजेंसियों को सौंपा गया। यह मल्टी-पैकेज रणनीति परियोजना के लिए गेम चेंजर साबित हुई, क्योंकि इससे अलग-अलग हिस्सों में एक साथ निर्माण कार्य शुरू हो सका।
2021–2025: नींव से निर्माण तक
18 दिसंबर 2021 को प्रधानमंत्री मोदी ने शाहजहांपुर में गंगा एक्सप्रेसवे का शिलान्यास किया, जिसके साथ ही इस महत्वाकांक्षी परियोजना ने जमीन पर वास्तविक गति पकड़ी। शिलान्यास के तुरंत बाद 594 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेसवे के अलग-अलग पैकेजों में निर्माण कार्य शुरू किया गया। नतीजतन, जहां पहले ऐसी मेगा परियोजनाएं वर्षों तक खिंच जाती थीं, वहीं इस रणनीतिक योजना के कारण गंगा एक्सप्रेसवे के निर्माण ने अभूतपूर्व गति पकड़ी और यह प्रोजेक्ट समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ने लगा।
2026: सपना बना हकीकत
ट्रायल रन, सेफ्टी ऑडिट और अंतिम तकनीकी जांच पूरी होने के बाद 29 अप्रैल 2026 को गंगा एक्सप्रेसवे का भव्य लोकार्पण हुआ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिस परियोजना का 18 दिसंबर 2021 को शिलान्यास किया था, उसी का उद्घाटन भी उनके कर-कमलों से संपन्न हुआ, जो समयबद्ध क्रियान्वयन और प्रतिबद्धता का प्रतीक है।
चुनौतियां आईं, लेकिन रुकी नहीं रफ्तार
भूमि अधिग्रहण, पर्यावरणीय संतुलन, कोविड-19 जैसी वैश्विक महामारी और जटिल तकनीकी कार्यों जैसी बड़ी चुनौतियों के बावजूद गंगा एक्सप्रेसवे का निर्माण कभी थमा नहीं। लगभग एक लाख किसानों से भूमि अधिग्रहण को पारदर्शी मुआवजा और डीबीटी के माध्यम से तेज और विवाद-मुक्त बनाया गया, वहीं पर्यावरणीय मानकों का पालन करते हुए अलाइनमेंट को संतुलित ढंग से विकसित किया गया। कोविड काल में श्रमिकों और सप्लाई चेन की बाधाओं के बीच भी स्थानीय संसाधनों के उपयोग और चरणबद्ध निर्माण रणनीति से कार्य निरंतर चलता रहा।
सीएम योगी की सक्रिय निगरानी और प्रतिबद्धता रही निर्णायक
इस पूरे प्रोजेक्ट की गति बनाए रखने में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सक्रिय निगरानी और प्रतिबद्धता निर्णायक रही। उन्होंने नियमित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठकों के माध्यम से हर चरण की प्रगति पर नजर रखी, जबकि उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवेज इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (यूपीडा) की सक्रिय भूमिका ने जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन को गति दी। ड्रोन सर्वे, डिजिटल ट्रैकिंग और रियल-टाइम मॉनिटरिंग जैसी आधुनिक तकनीकों के उपयोग से कार्य की गुणवत्ता और समयबद्धता सुनिश्चित की गई। परिणामस्वरूप, यह मेगा प्रोजेक्ट न केवल चुनौतियों को पार करता हुआ आगे बढ़ा, बल्कि तय समयसीमा में पूरा होकर प्रभावी प्रशासन और मजबूत नेतृत्व का उदाहरण भी बना।
शिलान्यास से लेकर उद्घाटन तक का संकल्प, तेज गति है योगी सरकार की पहचान
लखनऊ : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य ने यह दिखाया है कि योजनाओं को केवल शुरू करना ही नहीं, बल्कि उन्हें सफलतापूर्वक पूरा करना ही असली विकास है। सीएम योगी ने यूपी को ‘कंप्लीट पैकेज मॉडल’ दिया। इसमें परियोजनाओं की परिकल्पना से लेकर उनके पूर्ण होने तक काम कभी नहीं रुकता, चाहे जेवर एयरपोर्ट, गंगा, पूर्वांचल, बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे हों या इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी अन्य योजनाएं। ताजा उदाहरण देखा जाए तो गंगा एक्सप्रेसवे हमारे सामने है। 595 किलोमीटर के एक नवनिर्मित गंगा एक्सप्रेसवे का उत्तर प्रदेश में 18 दिसंबर 2021 को शिलान्यास किया गया और 29 अप्रैल 2026 को आज जनता को समर्पित कर दिया गया।
सीएम योगी ने उत्तर प्रदेश को 9 वर्षों में बीमारू राज्य की पहचान से बाहर निकाला। उन्होंने प्रदेश की अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने के लिए सड़क, मेट्रो, एयरपोर्ट समेत अन्य तमाम क्षेत्रों में सौगात दी। सीएम योगी के कार्यकाल में सिर्फ योजनाएं बनी ही नहीं बल्कि वह जमीन पर भी उतरीं। उन्होंने योजनाओं का शिलान्यास किया फिर जमीनी स्तर पर इनकी तैयारी, विभागों की जिम्मेदारी, निर्माणाधीन योजनाओं की लगातार निगरानी खुद की और आखिर में उनका लोकार्पण कर प्रदेश की जनता को लाभ पहुंचाया।
सीएम योगी के निर्देशन में ही जेवर एयरपोर्ट के पहले फेज का रिकॉर्ड टाइम में उद्घाटन 28 मार्च 2026 को हुआ, जिसका शिलान्यास 25 नवंबर 2021 को किया गया था। यह उत्तर प्रदेश का पांचवां इंटरनेशनल एयरपोर्ट दिल्ली-एनसीआर के बढ़ते हवाई यातायात के दबाव कम करने का काम कर रहा है। साथ ही सीएम योगी के विजन के चलते ही उत्तर प्रदेश देश का पहला राज्य बना, जहां 5 अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे बन चुके हैं।
पूर्वांचल और बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे समेत लिंक एक्सप्रेस पूरे हुए
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन की ही देन है कि 14 जुलाई 2018 को पूर्वांचल एक्सप्रेसवे का शिलान्यास हुआ और 16 नवंबर 2021 को इसका उद्घाटन भी कर दिया गया। इसी क्रम में बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे की आधारशिला फरवरी 2020 में रखी गई और जुलाई 2022 में इसे जनता को समर्पित किया गया। उत्तर प्रदेश को बीमारू राज्य से बाहर निकालने के लिए बुंदेलखंड जैसे तमाम पिछड़े क्षेत्रों सड़क नेटवर्क को बढ़ावा दिया गया। इससे क्षेत्रों की आर्थिक स्थिति में भी बदलाव हो रहा है।
लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे का भी मार्च 2019 में शिलान्यास हुआ। यह एक्सप्रेसवे भी लगभग बनकर तैयार है, जिसका लोकार्पण योगी सरकार अगले कुछ महीने में कर सकती है। इससे लखनऊ-कानपुर के बीच की यात्रा का समय लगभग दो घंटे से घटकर 45 मिनट हो जाएगा।
वहीं पूर्वांचल की राह आसान करने वाले गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे को भी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशन में पूरा किया गया। इस परियोजना पर काम फरवरी 2020 से शुरू हुआ था। प्रदेश सरकार के दृढ़ संकल्प के चलते इसका जून 2025 में योगी आदित्यनाथ ने उद्घाटन किया। वहीं 115 किलोमीटर लंबे झांसी लिंक एक्सप्रेसवे को लेकर भी कार्य योजना बनाई जा रही है। अनुमान है कि इस पर 1300 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। यह 63 गांव से होकर गुजरेगा, जिससे विकास की धारा बहेगी। इन्हीं विजन के चलते आज देश के एक्सप्रेसवे नेटवर्क में उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी लगभग 60 प्रतिशत तक पहुंच गई है।
एयरपोर्ट कनेक्टिविटी में शानदार उपलब्धि
वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में केवल दो एयरपोर्ट संचालित हो रहे थे, जिसमें लखनऊ और वाराणसी का नाम शामिल है। हालांकि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन ने देश में उत्तर प्रदेश की तस्वीर बदल दी। राज्य 21 एयरपोर्ट का नेटवर्क तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। सीएम योगी ने यूपी को 5 इंटरनेशनल एयपोर्ट वाले राज्य के रूप में पहचान दिलाई है। इसका सबसे जीवंत उदाहरण अयोध्या एयरपोर्ट भी है। अयोध्या में फरवरी 2022 से महर्षि वाल्मीकि अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा बनना शुरू हुआ था। यह रिकॉर्ड समय में बनकर तैयार हुआ और 30 दिसंबर 2023 में उद्घाटन किया गया।
दूसरी तरफ उत्तर प्रदेश के लिए 10 मार्च 2024 की तारीख काफी अहम रही। इस दिन एक साथ आजमगढ़, अलीगढ़, चित्रकूट, मुरादाबाद और श्रावस्ती के हवाई अड्डों का उद्घाटन किया गया। सीएम योगी के विजन का नतीजा है कि जहां 2016-17 में महज 59.97 लाख लोगों ने हवाई यात्रा की थी। वहीं 2024-25 में यह संख्या 14 करोड़ से ज्यादा हो गई।
हर शहर को मेट्रो देने का लक्ष्य
उत्तर प्रदेश में रैपिड रेल और मेट्रो परियोजनाओं को लेकर भी काफी काम हुआ है। इस तरफ भी योगी सरकार ने पूरा ध्यान दिया है। यूपी के शहरों के अंदर यातायात सुधारने के लिए तेजी से मेट्रो कनेक्टिविटी भी बढ़ाई जा रही है। इसी क्रम में 7 दिसंबर 2020 को आगरा मेट्रो की नींव रखी गई। महज चार साल के अंदर मार्च 2024 में इसका उद्घाटन कर संचालन शुरू किया गया। वहीं 22 फरवरी 2026 को मेरठ मेट्रो का संचालन शुरू हुआ। वहीं योगी सरकार ने गोरखपुर, वाराणसी, मेरठ और प्रयागराज में भी मेट्रो संचालन की मंशा जाहिर की है।
रक्षा क्षेत्र में उत्तर प्रदेश का बढ़ रहा योगदान
केंद्र सरकार ने योगी सरकार पर भी भरोसा जताया और नतीजा रहा कि आज यूपी में ब्रह्मोस मिसाइल प्रोडक्शन यूनिट भी बन चुकी है। लखनऊ में ब्रह्मोस मिसाइल प्रोडक्शन यूनिट का उद्घाटन मई-जून 2025 में हुआ, जिससे देश में यूपी की अलग छवि बनी है।
वहीं वर्ष 2019 में यूपी डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (यूपीडीआईसी) की नींव रखी गई और वर्ष 2023 से इसका संचालन शुरू हुआ। इसके तहत कानपुर में गोला-बारूद और मिसाइल संयंत्र अडानी डिफेंस एंड एयरोस्पेस में फरवरी 2024 से काम शुरू हो गया है। रक्षा उत्पादों के निर्माण में उत्तर प्रदेश बड़ी भूमिका निभा रहा है।
इन विकास योजनाओं को देखते हुए कहा जा सकता है कि योगी सरकार के ‘कंप्लीट पैकेज मॉडल’ की सफलता के पीछे बदलाव की लाने की इच्छा और प्रशासनिक सुधार महत्वपूर्ण कारण हैं। अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की गई है और काम में लापरवाही के लिए सख्त कार्रवाई का प्रावधान है। इसके साथ ही तकनीक का उपयोग बढ़ाकर परियोजनाओं की निगरानी को और प्रभावी बनाया गया, जिससे सफलता हासिल हुई।
“मोदी ने कहा-यह सड़क नहीं, सपनों का रास्ता है, आखिर गंगा एक्सप्रेसवे में क्या खास?”
चहुंमुखी विकास का आधार बने एक्सप्रेसवे: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ



