मानसून का मौसम आ गया है बरसात का मौसम किसे पसन्द नहीं होता आसमान में बादलों का झुण्ड आपको प्रकृति के करीब होने का अहसास दिलाता है। इस मौसम में प्रकृति अपनी अद्भुत सुन्दरता बिखेरती हैं। सुहानी हवा और महकता मौसम सभी को खुशगवार लगता है।
मानसून सीजन की सबसे बड़ी भार आपके पांव को झेलनी पड़ती है जब कीचेड से सने रास्तों, पानी से लबालब, गलियों, आर्द्रता भरे ठण्डे़ वातावरण और सीलन में चलने से जूते चिपचिपे हो जाते है और पांव से बदबूदार पसीना निकलना शुरू होता है। जिससे पांव में दाद, खाज, खुजली तथा लाल चक्तें पड़ जाते है।
मानसून के सीजन में पांवों के देखभाल की अत्याधिक आवश्यकता होती है। आप कुछ साधारण सावधानियों और आर्युवैदिक उपचारों से पांव , उंगलियों के संक्रमण से होने वाले रोगों से बच सकते है। मानसून के मौसम में अत्याधिक आर्द्रता, पसीने की समस्या आम देखने में मिलती है। इस मौसम में पैरों के इर्द-गिर्द के क्षेत्र में संक्रमण पैदा होता है। जिसमें दुर्गन्ध पैदा होती है।मानसून में पांवों की देखभाल के लिए कुछ निम्नलिखित घरेलू उपचार भी अपनाइए जा सकते है।
अपने पैरों को गर्म पानी में भिगोएँ जिसमें आपको कुछ शैम्पू और कोई वनस्पति तेल मिलाना चाहिए। आप मोटा नमक भी डाल सकते हैं। 15 मिनट तक पैरों को भीगने दें। फिर ब्रश से नाखूनों को साफ करें। यह बहुत कठिन नहीं होना चाहिए। झांवां का प्रयोग एड़ी और तलवों के किनारे पर करें। आप पूरे पैरों को किसी खुरदुरे तौलिये या लूफै़ण से भी रगड़ सकते हैं। जब यह हो जाए तो पैरों को साफ पानी से धो लें। एक तौलिये से सुखाएं।
अगर आपके नाखूनों को काटने की जरूरत है तो बेहतर होगा कि आप नेल क्लिपर का इस्तेमाल करें। नाखूनों को चौकोर काट दिया जाना चाहिए। उन्हें चिकना करने के लिए एमरी बोर्ड का प्रयोग करें। बढ़ते हुए पैर के नाखूनों को विशेष रूप से गोल नहीं किया जाना चाहिए। क्योंकि वे मांस में और भी अधिक बढ़ने की प्रवृत्ति रखते हैं। पैर के नाखूनों के क्यूटिकल्स को न काटें। उन्हें क्रीमयुक्त किया जाना चाहिए और एक कपास की कली के साथ धीरे से पीछे धकेलना चाहिए।
पैरों और नाखूनों पर क्रीम लगाएं और इसे क्यूटिकल्स में काम करते हुए त्वचा में मालिश करें। नाखूनों को साफ करने के लिए नुकीले उपकरणों का प्रयोग न करें। एड़ियों पर विशेष ध्यान दें जरूरत पड़ने पर ज्यादा क्रीम लगाएं। पैर की उंगलियों से टखनों तक मालिश के लिए ऊपर की ओर स्ट्रोक का प्रयोग करें। गीले तौलिये से पैरों को पोंछ लें।
फुट सोकरू — एक चौथाई बाल्टी गर्म पानी में आधा कप नमक और आधा कप नींबू का रस मिलाएं। अगर आपके पैरों में बहुत पसीना आता हैए तो टी ट्री ऑयल की कुछ बूंदों का इस्तेमाल करें। क्योंकि इसमें कीटाणुनाशक गुण होते हैं। पैरों को 10 से 15 मिनट के लिए भिगो दें। फुट लोशन को धोकर लगाएं।
फुट लोशनरू :- 3 बड़े चम्मच गुलाब जल, 2 बड़े चम्मच नींबू का रस और एक चम्मच शुद्ध ग्लिसरीन मिलाएं। अपने पैरों पर लगाएं और आधे घंटे के लिए छोड़ दें। 2 बड़े चम्मच शहद, एक बड़ा चम्मच हर्बल शैम्पू, एक बड़ा चम्मच बादाम का तेल। इसमें पैरों को 20 मिनट के लिए भिगो दें।
ड्राईनैस फूट केयर :- एक बाल्टी के चौथाई हिस्से तक ठण्डा पानी भरिए और इस पानी में दो चम्मच शहद एक चम्मच हर्बल शैम्पू, एक चम्मच बादाम तेल मिलाकर इस मिश्रण में 20 मिनट तक पांव भीगोए, बाद में पांव को ताजे स्वच्छ पानी से धोकर सुखा लीजिए।
कुलिंग मसाज आयल : 100 मि.ली. लीटर जैतून तेल, 2 बूंद नीलगिरी तेल, 2 चम्मच रोजमेरी तेल, 3 चम्मच खस या गुलाब का तेल मिलाकर इस मिश्रण को एयरटाईट गिलास जार में डाल लीजिए। इस मिश्रण को प्रतिदिन पांव की मसाज में प्रयोग कीजिए। इससे पांवों को ठण्डक मिलेगी और यह त्वचा को सुरक्षा प्रदापन करके इसे स्वास्थ्यवर्धक रखेगा।



