
देश में कोरोना ने एक बार फिर से कोहराम मचाना शुरू कर दिया है। स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा गुरुवार को जारी आंकड़े के अनुसार देश में 56 फीसदी तेजी के साथ 90 हजार 928 नए मरीज सामने आए हैं और 325 लोगों की मौत हो गई। इससे पहले बुधवार को 58 हजार मामले सामने आए थे। इन सब के बीच चिंता करने वाली बात यह है कि देश में कुल सक्रिय मामले बढ़कर अब 2,85,401 हो गए हैं। वहीं देश में अब तक कुल मृतकों की संख्या की बात करें तो यह 4,82.876 हो गई है। वैक्सीनेशन का आंकड़ा 148 करोड़ (1,48,67,80,227) को पार कर गया है।
ओमिक्रॉन ने भी पकड़ी रफ्तार
स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार देश में ओमिक्रॉन संक्रमितों की कुल संख्या बढ़कर 2,630 हो गई है। 797 मामलों के साथ महाराष्ट्र पहले स्थान पर बना हुआ है। वहीं 465 मरीजों के साथ दिल्ली दूसरे स्थान पर बना हुआ है। ओमिक्रॉन के 2,630 मरीजों में से 995 मरीज रिकवर हो गए हैं।
बिहार में बीते 24 घंटे में कोरोना के 1,659 मामले
गुरुवार को जारी आंकड़े के अनुसार बिहार में बीते 24 घंटे में कोरोना के 1,659 नए मामले सामने आए जो पिछले छह महीने में इस संक्रमण के सबसे अधिक मामले हैं। वहीं, एक मरीज की मौत हुई है। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
झारखंड में कोरोना के 3,553 नए मामले आए
झारखंड में बीते 24 घंटों के दौरान कोरोना के 3,553 नए मामले आए जिनमें से 1,316 संक्रमित राजधानी रांची के हैं। हालांकि, इस दौरान किसी मरीज की मौत दर्ज नहीं की गई।
दिल्ली में राष्ट्रीय प्राणी उद्यान अस्थायी रूप से बंद
समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार बढ़ते कोरोना के मामलों को देखते हुए दिल्ली में राष्ट्रीय प्राणी उद्यान को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है। बुधवार को चिड़ियाघर के एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। अधिकारी ने बताया कि दिल्ली नेशनल जूलॉजिकल पार्क कोरोना वायरस संक्रमण के मामले बढ़ने के कारण अस्थायी रूप से बंद हो गया है।
OMICRON जितना फैलेगा, उतना नए खतरनाक वैरिएंट पनप सकते हैं :WHO
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने ओमिक्रॉन को लेकर नए खतरे के प्रति आगाह किया है। संगठन की यूरोप इकाई ने मंगलवार को चेतावनी दी कि दुनिया भर में ओमिक्रॉन के बढ़ते मामले नई और अधिक खतरनाक जोखिम को बढ़ा सकते हैं। डब्ल्यूएचओ ने कहा कि जितना ओमिक्रॉन फैलेगा उतने ही ज्यादा इसके भी रूप बदलेंगे। अब यह घातक हो गया है, यह मौत का सबब बन सकता है। संगठन की वरिष्ठ आपात अधिकारी कैथरीन स्मॉलवुड ने कहा है कि ओमिक्रॉन की बढ़ती संक्रमण दर विपरीत असर डाल सकती है।
स्मॉलवुड ने कहा कि यह जितना ज्यादा फैलेगा, उतने ही अपने रूप बनाएगा। यह भी आशंका है कि इसी बीच नए वैरिएंट पनप जाएं। अब यह घातक रूप ले चुका है। इससे मौतें हो सकती हैं, हो सकता है डेल्टा से कुछ कम या ज्यादा मौतें हों।
यूरोप में अब तक 10 करोड़ केस
महामारी के बाद से सिर्फ यूरोप में ही 10 करोड़ से ज्यादा कोरोना संक्रमित हो चुके हैं। 2021 के अंतिम सप्ताह में ही 50 लाख से ज्यादा केस मिले हैं। यह लगभग वही दौर है जो हम पूर्व में देख चुके हैं। यूरोप के हालात को लेकर स्मालवुड ने कहा कि हम बहुत खतरनाक दौर से गुजर रहे हैं। पश्चिम यूरोप में हम बहुत तेजी से संक्रमण फैलते देख रहे हैं।
अस्पताल में भर्ती होने वालों की संख्या कम, पर जोखिम यह है
स्मालवुड ने कहा कि डेल्टा के मुकाबले ओमिक्रॉन संक्रमण से पीड़ित लोगों के अस्पताल में भर्ती होने की जोखिम कम हुई है, लेकिन कुल मिलाकर यह नया वैरिएंट ज्यादा खतरानाक हो सकता है, क्योंकि इसकी संक्रमण दर बहुत अधिक है। जब इसके रोगी तेजी से बढ़ते हैं तो वे गंभीर बीमारी से ग्रस्त कई लोगों को संक्रमित कर सकते हैं और वे अस्पतालों में पहुंच सकते हैं। वहीं वे दम भी तोड़ सकते हैं।
ब्रिटेन के अस्पतालों में स्टॉफ की कमी
ओमिक्रॉन के कहर के कारण मंगलवार को ब्रिटेन के अस्पतालों में स्टाफ का संकट पैदा होता नजर आया। वहां दैनिक कोरोना मरीजों की संख्या पहली बार 2 लाख के पार पहुंच गई। अस्पतालों में बहुत ज्यादा मरीज पहुंचने पर स्वास्थ्य व्यवस्थाएं चरमरा सकती हैं।
अब यहां मिला कोरोना का नया वैरिएंट, वैक्सीन को भी दे सकता है चकमा
फ्रांस में कोरोना के नए वेरिएंट का पता चला है, जिसमे 46 म्युटेशन देखे गए हैं। किसी भी वायरस की गंभीरता उसमें होने वाले म्यूटेशन के आधार पर तय की जाती है। इससे एक बात तो साफ है कि यह नया वैरिएंट काफी खतरनाक साबित हो सकता है। हालांकि इस पर शोध होना बाकी है। शुरुआती आंकड़ों से पता चला है कि इस नए वैरिएंट की फिलहाल ज्यादा संक्रमण दर नहीं है। वैज्ञानिकों को चिंता इस बात की है कि नया वैरिएंट फ्रांस की सीमा के बाहर ब्रिटेन में प्रवेश कर सकता है। हालांकि, अभी तक इसकी पुष्टि नहीं हुई है।
अब तक मिले वैरिएंट से काफी अलग है B.1.640.2.
कोरोना के अभी तक जितने भी वैरिएंट सामने आए हैं। उन सबसे यह वैरिएंट काफी अलग है क्योंकि वैज्ञानिकों को अभी तक B.1.640.2.में ऐसा कुछ भी नहीं मिला है, जो अब तक सामने आए वैरिएंट में हो। इस वैरिएंट में असामान्य संयोजन देखे गए हैं, वैज्ञानिकों का कहना है कि नया वैरिएंट कई आनुवांशिक परिवर्तनों को दिखाता है। इसकी खोज मेडिटरेनी इंफेक्शन यूनिवर्सिटी हॉस्टपिटल इंस्टीट्यूट ने की है, लेकिन विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर से अब तक इस नए वैरिएंट पर कोई भी जांच शुरू नहीं की गई है।
एक महीने पहले सामने आया था केस
कोरोना के इस नए वैरिएंट का पहला मामला नवंबर में सामने आया था, लेकिन दुनिया भर के वैज्ञानिकों का ध्यान इस पर अब गया है। दावा किया जा रहा है कि जो पहला व्यक्ति इस नए वैरिएंट से संक्रमित था, वह पूरी तरह से टीकाकरण करवा चुका था। नवंबर में वह तीन दिन की कैमरून की यात्रा कर फ्रांस लौटा था। यहां उसको सांस लेने में तकलीफ महसूस हुई, जिसके बाद उसका कोरोना टेस्ट पॉजिटिव आया। वैज्ञानिकों ने जब इस वैरिएंट पर शोध किया तो नतीजों ने सभी को चौंका दिया।
OMICRON से सम्बंधित चिंताजनक डेटा
ओमिक्रॉन संस्करण के उभार ने एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है। हाल ही में प्रकाशित एक अध्ययन से पता चला है कि ओमिक्रॉन ऐसे लोगों को संक्रमित करने की क्षमता रखता है जो पूर्व में वायरस के प्रभाव से उबर चुके हैं। अर्थात यह नया संस्करण प्रतिरक्षा तंत्र के कुछ हिस्सों को चकमा देने में सक्षम है। कुछ विशेषज्ञों के अनुसार यह संस्करण टीका-प्रेरित प्रतिरक्षा से भी बच सकता है।
दक्षिण अफ्रीका बड़े पैमाने पर कोविड-19 की तीन लहरों – मूल वायरस, बीटा संस्करण और डेल्टा संस्करण – का सामना कर चुका है। अध्ययनों से पता चलता है कि पूर्व-संक्रमण ने बीटा और डेल्टा के विरुद्ध अपूर्ण लेकिन महत्वपूर्ण सुरक्षा प्रदान की थी और उम्मीद थी कि दक्षिण अफ्रीका ने झुंड-प्रतिरक्षा विकसित कर ली होगी। लेकिन वैज्ञानिकों को डर है कि ओमिक्रॉन में ऐसे कई उत्परिवर्तन हैं जो प्रतिरक्षा को भेदने में सक्षम हैं।
हाल ही में किए गए एक अध्ययन में 28 लाख पॉज़िटिव मामलों में से 35,670 पुन: संक्रमण के मामले थे। हालांकि, इस अध्ययन में न तो यह बताया गया है कि ओमिक्रॉन किस हद तक लोगों को बीमार करता है और न ही इसमें टीकाकृत लोगों की स्थिति पर कोई चर्चा की गई है। संभावना है कि पूर्व संक्रमण या टीकाकरण गंभीर बीमारी से कुछ हद तक बचा सकेगा। दक्षिण अफ्रीका की महामारीविद जूलियट पुलियम और उनके सहयोगियों ने पाया कि प्रयोगशाला में बीटा संस्करण पूर्व में संक्रमित लोगों की प्रतिरक्षा से बच निकलने में सक्षम है। वे इस व्यवहार को वास्तविक परिस्थिति में समझना चाहते थे।
शोधकर्ताओं ने व्यापक डेटा का उपयोग करते हुए पुन:संक्रमण की संख्या का विश्लेषण किया। पुन:संक्रमण को प्रारंभिक संक्रमण के 90 दिनों से अधिक समय बाद पॉज़िटिव परीक्षण के रूप में परिभाषित किया गया। उन्होंने पाया कि पूर्व-संक्रमणों ने बीटा और डेल्टा लहरों के दौरान लोगों के संक्रमित होने के जोखिम को कम किया है। इस वर्ष अक्टूबर में जब संक्रमण दर काफी कम थी तब पुलियम ने कुछ विचित्र डेटा देखा। उन्होंने पाया कि पहली बार संक्रमण का जोखिम तो कम हो रहा है (संभवतः टीकाकरण में वृद्धि के कारण) लेकिन पुन: संक्रमण का जोखिम तेज़ी से बढ़ रहा है। ओमिक्रॉन की खोज ने कुछ हद तक इस गुत्थी को सुलझा दिया।
हालांकि इस बारे में काफी अनिश्चितताएं हैं लेकिन कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि पूर्व-संक्रमण डेल्टा की तुलना में ओमिक्रॉन के विरुद्ध सिर्फ आधी सुरक्षा देता है। फिलहाल तो सभी की निगाहें दक्षिण अफ्रीका के अस्पतालों पर टिकी हैं जो एक बार फिर कोविड-19 रोगियों से भरने लगे हैं। इन्हीं स्थानों पर शोधकर्ताओं को कुछ सुराग मिलने की उम्मीद है जिससे यह पता चल सकेगा कि पूर्व के संक्रमण या टीकाकरण किस हद तक पुन:संक्रमण की संभावना व गंभीरता को कम करते हैं।



