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बाबा गणिनाथ जी महाराज ने 935 मूलडीह से समाज को एक माले में पिरोया

बाबा गणिनाथ पूजनोत्सव पर विशेष

  • राजधर्म व महर्षि धर्म निभाने वाले अद्भूत थे बाबा गणिनाथ

बलिया: राजधर्म व महर्षि धर्म निभाने वाले बाबा गणिनाथ एकलौते योगीश्वर है। जो चंदेल के महाराज के रुप में राजधर्म भी निभाया और योगीश्वर के रुप में महर्षि धर्म निभाते हुए मानवता धर्म की भी रक्षा की। इंसानियत का संदेश देते हुए बाबा ने लोगों के बीच आपस में बढ़ती वैमनस्यता दूर करने का दिया संदेश। उन्होंने समाज के गोत्र के हिसाब से कुल 935 मूलडीह की संरचना की और इसके तहत पूरे मद्धेशिया वैश्य समाज को एक माले की तरह पिरो दिया। बाबा के जीवन पर किए गए अब तक के अनेक शोध से उनके शौर्य, वीरता, विद्वता, नेतृत्व व कार्यक्षमता का अनेक प्रमाण मिला है।

भगवान शंकर व माता पार्वती के आशिर्वाद से माता शिवा देवी व मनसा राम के घर जन्मे बाबा गणिनाथ जी की बिक्रम संवत 1007 भाद्रपद कृष्ण अष्टमी दिन शनिवार को जन्म हुआ था। माना जाता है कि भगवान शिव के परम भक्त श्री मंशाराम ग्राम महनार वैशाली में गंगा किनारे अपनी एक कुटिया में सपत्नी रहते थे। मंशाराम जी सात्विक और धार्मिक विचारों को मानने वाले थे। गृहस्थ जीवन के साथ भगवान भोले शंकर के सबसे बड़े उपासक थे। संतानहीन होने के बावजूद उनका भगवान पर पूरा विश्वास था और वे अपने जीवन से खुश थे।

इसी विश्वास व मंशाराम की भक्ति से प्रसन्न होकर भोले बाबा ने एक रात दर्शन दिया और अगले ही दिन वन में एक पीपल के पेड़ के नीचे एक अलौकिक बच्चा मिला। जो बचपन से ही अपने अनोखे व अद्भूत शक्तियों के लिए चर्चित हो गए और बाद में अपने दिव्य व मनोहारी रुप, औलोकिक आभा संग मजबूत नेतृत्व क्षमता एवं अद्भूत असीम शक्तियों के कारण बाबा गणिनाथ के रुप में पूरे राष्ट्र के अगुआ हुए। जिन्होंने वेदों का अध्ययन करने, सच्चाई और धर्म का पालन करने, काम, क्रोध, लोभ, अभिमान और आलस्य का त्याग कने और नारी का सम्मान और रक्षा करने का संदेश दिया।

बाबा गणिनाथ जी महाराज के भाग्य में राजयोग व महर्षि योग दोनों ही काफी प्रबल था। यही कारण रहा कि वे महान प्रतापी राजा भी रहे और बाद में संत के रुप में महर्षि की तरह पूरे देश का भ्रमण किया और लोगों को सुख, शांति व प्रेम का संदेश देते हुए तमाम तरह से लोगों को सहयोग किया। जिनका आशिर्वाद किसी चमत्कार से कम नहीं। बाबा महान योगेश्वर भी रहे और जड़ी बुटियों की पूरी जानकारी उन्हें थी। जिसके बूते वे देशभर में लाखों लोगों को चिकित्सकीय लाभ भी दिए। जिनकी साधना व पूजन मात्र से ही तमाम कष्ट दूर हो जाते है।

बाबा गणिनाथ जी महाराज के चार मुख्य संदेश-

1. वेदों का अध्ययन करे
2. सच्चाई और धर्म का पालन करे
3. काम, क्रोध, लोभ, अभिमान और आलस्य का त्याग करे
4. नारी का सम्मान और रक्षा करे

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