फुजैरा पर हमले से मचा हड़कंप: 3 भारतीय घायल, भारत ने दी कड़ी चेतावनी
संयुक्त अरब अमीरात के फुजैरा तेल क्षेत्र पर ईरान के ड्रोन हमले में तीन भारतीय नागरिक घायल हो गए, जिसके बाद भारत ने कड़ी निंदा करते हुए शांति और कूटनीति की अपील की है। हमले से तेल डिपो में आग लग गई और क्षेत्र में तनाव बढ़ गया। अमेरिका ने जवाबी कार्रवाई में ईरानी नौकाओं पर हमला करने का दावा किया, जबकि ईरान ने इन आरोपों को खारिज किया। खाड़ी सहयोग परिषद और सऊदी अरब ने यूएई के समर्थन में एकजुटता जताई है।
नयी दिल्ली : भारत ने संयुक्त अरब अमीरात के फुजैरा तेल क्षेत्र में ईरान के हमले की कड़ी निन्दा करते हुए कहा है कि पश्चिम एशिया में सभी मुद्दों का समाधान संवाद और कूटनीति से होना चाहिए। सोमवार को किए गए इस हमले में तीन भारतीय नागरिक भी घायल हुए हैं।विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने इस पर प्रतिक्रिया करते हुए कहा है कि भारत सभी मुद्दों के शांतिपूर्ण समाधान के लिए सभी तरह के प्रयासों का समर्थन करता है।
प्रवक्ता ने मंगलवार को अपने बयान में कहा, “ फुजैरा पर हुआ हमला, जिसमें तीन भारतीय नागरिक घायल हुए, पूरी तरह से अस्वीकार्य है। हम इन शत्रुतापूर्ण कार्रवाइयों और नागरिक बुनियादी ढांचे तथा निर्दोष नागरिकों को निशाना बनाने की तुरंत समाप्ति की मांग करते हैं। भारत स्थिति से निपटने के लिए संवाद और कूटनीति का समर्थन करता रहा है, ताकि पश्चिम एशिया में शांति और स्थिरता बहाल हो सके। हम अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप होर्मुज़ जलडमरूमध्य के माध्यम से मुक्त और निर्बाध नौवहन और व्यापार की भी अपील करते हैं।
भारत सभी मुद्दों के शांतिपूर्ण समाधान के लिए हर संभव प्रयासों का समर्थन करने के लिए तैयार है।“उल्लेखनीय है कि संयुक्त अरब अमीरात के फुजैरा ऑयल इंडस्ट्रीज ज़ोन में सोमवार को ईरान के ड्रोन हमले में तीन भारतीय नागरिक घायल हो गए। इस हमले के कारण तेल डिपो में आग लग गई थी।
खाड़ी सहयोग परिषद ईरानी मिसाइल हमलों के खिलाफ यूएई का करेगा समर्थन
खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) के महासचिव जासेम अलबुदैवी ने कहा कि संगठन संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) द्वारा अपनी सुरक्षा की रक्षा के लिए उठाए गए सभी कदमों का समर्थन करेगा।यूएई के रक्षा मंत्रालय ने सोमवार को कहा कि देश की वायु रक्षा ने 12 बैलिस्टिक मिसाइलों और चार ड्रोन को रोका, जिन्हें कथित रूप से ईरान द्वारा प्रक्षेपित किया गया था और कहा कि वह जवाबी कार्रवाई का अधिकार सुरक्षित रखता है।इसके अलावा, अमीरात सरकार की प्रेस सेवा ने ड्रोन हमले के बाद फुजैरा तेल क्षेत्रों में से एक में आग लगने की सूचना दी।
ईरान के सरकारी प्रसारक आईआरआईबी ने सैन्य सूत्र के हवाले से कहा कि यूएई के पूर्वी हिस्से में एक औद्योगिक तेल क्षेत्र पर हुए आगजनी के हमले के पीछे अमेरिकी सेना का हाथ था।जीसीसी ने कल एक बयान में कहा, “महामहिम ने यूएई के साथ जीसीसी की पूर्ण एवं दृढ़ एकजुटता पर बल दिया और उसकी सुरक्षा की रक्षा, उसकी संप्रभुता की सुरक्षा और उसके महत्वपूर्ण संस्थानों की सुरक्षा को बनाए रखने के लिए उठाए गए सभी उपायों के समर्थन में एक एकजुट मोर्चे के रूप में खड़े होने की बात की।”इसी बीच, सऊदी अरब के विदेश मंत्रालय ने पश्चिम एशिया में सैन्य तनाव के नए दौर पर चिंता व्यक्त की और आगे तनाव को समाप्त करने का आह्वान किया।
सऊदी अरब ने पाकिस्तान की मध्यस्थता एवं राजनयिक प्रयासों का भी समर्थन किया, जिनका उद्देश्य एक ऐसा राजनीतिक समाधान प्राप्त करना है जो क्षेत्र को और ज्यादा अस्थिर होने से रोकेगा।सऊदी अरब समाचार एजेंसी एसपीए ने यह जानकारी दी। सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने ईरानी हमलों की निंदा की और देश की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यूएई द्वारा संभावित कार्रवाई को समर्थन दिया।रिपोर्ट के अनुसार, कल यूएई की धरती पर हुए हमलों के बाद क्राउन प्रिंस सलमान ने यूएई के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से टेलीफोन पर बातचीत की।
अमेरिका ने यूएई के तेल संयंत्र पर हमले के जवाब में किया ईरानी नौकाओं पर हमला
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य में सात ईरानी नौकाओं पर हमला किया है, क्योंकि वाशिंगटन लगभग बंद जलमार्ग के माध्यम से खाड़ी में फंसे जहाजों को बाहर निकालने का प्रयास कर रहा है। यह जानकारी बीबीसी ने मंगलवार को दी।संयुक्त अरब अमीरात और दक्षिण कोरिया दोनों ने सोमवार को महत्वपूर्ण जलमार्ग में जहाजों पर हमले की सूचना दी।
संयुक्त अरब अमीरात ने यह भी कहा कि ईरानी हमले के बाद फुजैराह के तेल बंदरगाह पर आग लग गई।ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि जलडमरूमध्य में हुई घटनाओं से यह स्पष्ट हो गया है कि राजनीतिक संकट का कोई सैन्य समाधान नहीं है। उन्होंने आगे कहा, “प्रोजेक्ट फ्रीडम प्रोजेक्ट डेडलॉक है।”फरवरी में अमेरिका और इज़रायल द्वारा ईरान पर हवाई हमले शुरू करने के बाद से होर्मुज जलडमरूमध्य बहुत हद तक अवरुद्ध रहा है। तेहरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए इस महत्वपूर्ण जलमार्ग को अवरुद्ध कर दिया जिससे होकर दुनिया के 20 प्रतिशत तेल एवं द्रवीकृत प्राकृतिक गैस का परिवहन होता है।
अप्रैल की शुरुआत में, अमेरिका और ईरान ने युद्धविराम की घोषणा की, जिसके तहत ईरान ने संयुक्त अरब अमीरात सहित खाड़ी देशों पर ड्रोन और मिसाइल हमले बंद कर दिए, लेकिन तब से कुछ ही जहाज जलडमरूमध्य से गुजर पाए हैं। अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों पर अपनी नाकाबंदी भी लगा दी है।राष्ट्रपति ट्रम्प ने कहा, “हमने सात छोटी नौकाओं को मार गिराया है या जैसा कि वे उन्हें ‘तेज़’ नौकाएं कहते हैं। अब उनके पास बस यही बची हैं।
” अमेरिकी सेना ने कहा कि उसने नौकाओं पर हमला करने के लिए हेलीकॉप्टरों का इस्तेमाल किया गया।बाद में ईरानी सरकारी मीडिया ने क्षी ट्रम्प के इस दावे का खंडन किया कि अमेरिका ने तेज नौकाओं पर हमला किया। सैन्य सूत्रों का हवाला देते हुए, तसनीम समाचार एजेंसी ने बताया कि इसके बजाय दो छोटे मालवाहक जहाजों को निशाना बनाया गया जिनमें पांच नागरिकों की मौत हो गई।इससे पहले अमेरिका ने कहा था कि नौसेना के विध्वंसक पोत और अमेरिकी ध्वज वाले व्यापारिक जहाज सोमवार को जलडमरूमध्य से गुजरे थे।
ईरान ने इन दावों को पूरी तरह से झूठा करार दिया और कहा कि उसकी सेना ने एक अमेरिकी युद्धपोत पर चेतावनी के तौर पर गोलियां चलाईं। अमेरिकी सेना ने इस बात से इनकार किया।अंतर्राष्ट्रीय नेताओं ने यूएई अवसंरचना पर हुए हमलों की निंदा की है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉ ने कहा कि ये हमले अन्यायपूर्ण और अस्वीकार्य हैं। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री सर कीर स्टारमर ने कहा कि ब्रिटेन खाड़ी में अपने साझेदारों की रक्षा के लिए अपना समर्थन जारी रखेगा।
पड़ोसी देश कतर ने टैंकर पर हुए हमले की निंदा करते हुए जलडमरूमध्य को बिना शर्त फिर से खोलने की मांग की।रविवार को राष्ट्रपति ट्रम्प ने कहा था कि अमेरिका “प्रोजेक्ट फ्रीडम” के तहत फंसे हुए जहाजों को समुद्री मार्ग से बाहर निकालने में मदद करना शुरू करेगा। फरवरी में अमेरिका-ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से अनुमानित 20,000 नाविक 2,000 जहाजों पर फंसे हुए हैं।(वार्ता)
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