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जामा मस्जिद में बोझिल दिल से अदा की गई ईदुल फित्र की नमाज

कोरोना ने ईद पर गले मिलने की बात तो दूर हाथ भी न मिलाने दिया

दुद्धी, सोनभद्र- “ग़मज़दा होकर भी मुस्कुरायेंगे, ईद कुछ इस तरह मनाएंगे” कुछ ऐसा ही हाल-ए-दिल रहा इस साल की ईद का। कॅरोना महामारी के चलते ईद के दोगाने की जगह ज़िंदगी में पिछले साल की तरह इस बार भी चाश्त सुन्नत की नमाज अदा करने वाले मुस्लिम बंधुओं को एक ओर जहां ईद की नमाज से महरूम हो जाने की कमी खल रही थी वहीं नमाज बाद कोई सामने पड़ जाता तो ह-हा कर गले मिलने की बात तो दूर हाथ भी न मिला पाने का मलाल दिल में ही रह गया।

वैश्विक महामारी कॅरोना ने 2 मीटर दूर से ही ईद मुबारक का जुमला पेश करने पर मजबूर कर दिया। नए परिधानों में यदा कदा लोग ही नजर आए। हर आदमी के दिल में महामारी का खौफ तो चेहरे पर उदासी का सबब कॅरोना ने डाल रखा था। हर साल चाँद रात की देर रात व ईद की अलसुबह से ही बाजार गुलजार रहते थे। इस साल ऐसा कुछ नज़ारा देखने को नही मिला। निर्धारित वक्त के मुताबिक सुबह 6.30 बजे जामा मस्जिद में पेश ईमाम हाफिज महमूद साहब की कयादत में नमाज कायम होने के बाद लोग अपने-अपने घरों में ईद की नमाज के रूप में 4 रकात चाश्त सुन्नत की नमाज अदा किए। नमाज बाद भी लॉक डाउन के मद्देनजर बहुत कम ही लोग घरों से निकले। कुछ जो निकले तो सीधे कब्रिस्तान जाकर अपने मरहुमीन के कब्रों पर फातेहा पढ़ पुनः घरों में ही कैद हो गए। ईद की नमाज सकुशल सम्पन्न कराने के लिए पुलिस उपाधीक्षक दुद्धी राम आशीष यादव, प्रभारी निरीक्षक पंकज कुमार सिंह अपने अधीनस्थ पुलिसकर्मियों व पीएसी के साथ जामा मस्जिद पर मुस्तैद रहे।

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