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नमामि गंगे मिशन- गंगा को साफ रखना भी है गंगा की पूजा

‘गंगा’- ये सिर्फ एक नदी नहीं बल्कि गंगा जमुनी दोआब में रहने वाले करोड़ों लोगों के लिए एक जीवनदायिनी शक्ति है, जननी है। गंगा का न सिर्फ सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व है बल्कि भारत की 40% आबादी गंगा नदी पर निर्भर है। जलग्रहण क्षेत्र की दृष्टि से गंगा बेसिन भारत का सबसे बड़ा नदी बेसिन है, जिसमें देश का 26% भू-भाग समाहित है। गौमुख में गंगोत्री ग्लेशियर से निकलकर गंगा नदी 2525 किलोमीटर की दूरी तय करके बंगाल की खाड़ी में मिलती है।

गंगा के प्रवाह के दौरान देश के 11 राज्यों में बहने वाली अनेक सहायक नदियां जैसे अलकनंदा, रामगंगा, काली, यमुना, गोमती, घाघरा, गंडक, कोसी और सोन और अनेक उप-सहायक नदियां अलग-अलग स्थानों पर इससे मिलती जाती हैं। गंगा देश के पांच राज्यों से होकर गुजरती है। केंद्र सरकार ने गंगा नदी के प्रदूषण को समाप्त करने और नदी को पुनर्जीवित करने के लिए ‘नमामि गंगे’ नामक मिशन की शुरुआत की।

नमामि गंगे मिशन के तहत किया जा रहा है गंगा को ट्रीट

नमामि गंगे के डायरेक्टर जनरल राजीव रंजन मिश्रा ने प्रसार भारती को बताया कि गंगा को लेकर जो चैलेंज है वो दो तरह से है- प्रदूषण और जल प्रवाह या जल स्तर में कमी। उन्होंने बताया कि जल के प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण हमारे शहरों से निकल रहा सीवेज है। वो बिना ट्रीटमेंट के ही नालों के माध्यम से सीधा नदी में जा रहा है। दूसरा कारण, जहां ज्यादा औद्योगिक इकाइयां हैं वहां की गंदगी भी सीधा नदी में जा रही है। इसकी मात्रा कम होती है लेकिन यह काफी हद तक नदी के दूषित होने का कारण है।

‘गंगा टाउन’ से आ रहे प्रदूषण को किया बहुत हद तक कंट्रोल

डीजी राजीव मिश्रा के अनुसार, आज उत्तराखंड और झारखंड के सभी गंगा टाउन से आ रहे प्रदूषण पर बहुत हद तक कंट्रोल कर लिया गया है। वह कहते हैं, “नमामि गंगे में हमनें केवल नए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट नहीं बनाएं बल्कि पुराने वालों को भी ट्रीट किया है। हमनें उत्तराखंड के सभी ‘गंगा टाउन’ का आंकलन किया है। इसमें 97 टाउन आते हैं। इन सभी टाउन पर स्टडी करने के बाद ही हमनें प्रोजेक्ट साइन किए हैं।” वह आगे बताते हैं कि उत्तर प्रदेश में भी बड़ी सफलताएं मिली हैं, वहां 60 प्रतिशत से ऊपर गंगा से जुड़े प्रोजेक्ट पूरे हो चुके हैं। मुख्य शहर जैसे कानपुर, प्रयागराज, वाराणसी वहां पर भी लगभग सभी प्रोजेक्ट पूरे हो चुके हैं। वहीं , बिहार और बंगाल में नए सिरे से काम करना शुरू किया है।

प्राकृतिक माध्यमों से हो रही है गंगा साफ

नमामि गंगे के डीजी ने प्रसार भारती को बताया कि गंगा एक्शन प्लान के तहत जो पानी शोधित किया जा रहा है उसका मानदंड लगभग 10 बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड (बीओडी) रखा है। इसके साथ गंगा को प्राकृतिक माध्यमों से भी साफ किया जा रहा है। वह कहते हैं, “कुछ हमारे नेचर बेस्ड सॉल्यूशन होते हैं, हम उनका भी प्रयोग करते हैं। जैसे कहीं-कहीं पर हमने ‘कंस्ट्रुक्टिव वेटलैंड’ भी बनाया है उसके द्वारा भी जल का संशोधन किया जा रहा है। ईस्ट कलकत्ता वेटलैंड में लगभग 400 एमएलडी पानी का संशोधन नेचुरल तरीके से हो रहा है।” नमामि गंगे के तहत 15 साल का टारगेट रखा जाता है। पिछले 15 सालों में जो टेक्नोलॉजी नदी को साफ रखने में सबसे बेहतर परफॉर्म करती है उसी के साथ कंटिन्यू किया जाता है।

गंगा को साफ रखना भी है गंगा की पूजा

वह आगे कहते हैं कि आज जरूरी है कि नमामि गंगे से देश का युवा और आम लोग भी जुड़ें। अपनी आस्था के साथ-साथ अपनी जिम्मेदारी को भी समझें और अपने व्यवहार में परिवर्तन लाएं। अगर हम अपनी नदियों को ही दूषित कर देंगे तो हम स्वच्छ पानी कहां से पिएंगे? हम सभी को हमारी सभ्यता, संस्कृति और विरासत की प्रतीक राष्ट्रीय नदी गंगा को सुरक्षित करने के लिए एक साथ आगे आना होगा और अपनी जिम्मेदारी को समझते हुए इसे साफ रखने की मुहिम में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेना होगा।

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