“जब पूरी दुनिया भारत को झुकाना चाहती थी…” सोमनाथ से प्रधानमंत्री मोदी ने सुनाई 1998 की वो कहानी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमनाथ अमृत महोत्सव में कहा कि सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण भारत की स्वतंत्र चेतना और प्राचीन गौरव की पुनर्स्थापना का प्रतीक है। उन्होंने 1998 के पोखरण परमाणु परीक्षणों को भारत की वैज्ञानिक क्षमता और अटूट राजनीतिक इच्छाशक्ति का प्रमाण बताया। पीएम मोदी ने कहा कि सोमनाथ केवल आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि भारत की सनातन आत्मा का पवित्र प्रतीक है, जो आने वाले हजार वर्षों तक राष्ट्र को प्रेरणा देता रहेगा।
सोमनाथ : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार को यहां पुनर्निर्मित सोमनाथ मंदिर के लोकार्पण की 75 वीं वर्षगांठ पर आयोजित सोमनाथ अमृत महोत्सव के मौके पर कहा कि यह अटूट आस्था, दिव्यता और भारत की सनातन आत्मा का पवित्र प्रतीक है जो आने वाले एक हजार वर्षों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
श्री मोदी ने कहा कि 75 वर्ष पहले इसी दिन सोमनाथ मंदिर की पुनर्स्थापना कोई साधारण अवसर नहीं था बल्कि इसने सोमनाथ की प्राण प्रतिष्ठा ने भारत की स्वतंत्र चेतना की उद्घोषणा की थी।प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय इतिहास की एक और महत्वपूर्ण घटना 11 मई 1998 के पोखरण परमाणु परीक्षणों का उल्लेख करते हुए कहा कि यह भारतीय वैज्ञानिकों की क्षमता का प्रदर्शन और अटूट राजनीतिक संकल्प का प्रमाण था। उन्होंने विकास तथा विरासत दोनों को साथ लेकर चलने की आवश्यकता पर बल दिया और विभाजनकारी सोच के प्रति सतर्क रहने का आह्वान किया।
श्री मोदी ने इस आयोजन को केवल एक औपचारिक समारोह नहीं, बल्कि भारत की सनातन चेतना और सभ्यतागत धैर्य की घोषणा बताया। वर्ष 1951 में सोमनाथ मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के ऐतिहासिक महत्व पर बल देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि यह कोई सामान्य अवसर नहीं था।” यदि 1947 में भारत स्वतंत्र हुआ, तो 1951 में सोमनाथ की प्राण प्रतिष्ठा ने भारत की स्वतंत्र चेतना की घोषणा की। ” स्वतंत्रता के केवल चार वर्ष बाद मंदिर के पुनर्निर्माण के महत्व पर प्रधानमंत्री ने कहा, “जब राष्ट्र विदेशी बंधनों से मुक्त हुआ, उसी समय सोमनाथ के पुनर्निर्माण ने दुनिया को यह संदेश दिया कि भारत केवल स्वतंत्र नहीं हुआ है, बल्कि वह अपने प्राचीन वैभव को पुनः प्राप्त कर रहा है।
” इस अवसर के बहुआयामी महत्व को स्पष्ट करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि वह केवल 75 वर्षों का इतिहास नहीं देख रहे हैं। “मैं यहां विनाश में सृजन के उस संकल्प को देख रहा हूं, जिसे सोमनाथ ने पूर्ण किया है।” उन्होंने इस पवित्र भूमि में असत्य पर सत्य की सनातन विजय का अनुभव होने की बात कही।प्रधानमंत्री ने भविष्य का जिक्र करते हुए कहा कि सोमनाथ अमृत महोत्सव केवल अतीत का स्मरण नहीं है। उन्होंने कहा, “यह केवल अतीत का उत्सव नहीं, बल्कि आने वाले एक हजार वर्षों के लिए भारत की प्रेरणा भी है ।
“उन्होंने इस दिन को राष्ट्रीय इतिहास की एक अन्य महत्वपूर्ण घटना से भी जोड़ा और कहा कि 1998 में आज के ही दिन किये गये पोखरण परमाणु परीक्षणों की वर्षगाँठ भी है। उन्होंने कहा कि भारत ने 11 मई को तीन परमाणु परीक्षण करके भारतीय वैज्ञानिकों की क्षमता का प्रदर्शन किया था। इसके दो दिन बाद 13 मई को हुए अतिरिक्त परीक्षणों को उन्होंने भारत के अटूट राजनीतिक संकल्प का प्रमाण बताया। उन्होंने कहा ,” उस समय पूरे विश्व का दबाव भारत पर था, लेकिन अटल जी के नेतृत्व में तत्कालीन सरकार ने दिखा दिया कि हमारे लिए राष्ट्र सर्वोपरि है, दुनिया की कोई शक्ति भारत को झुका नहीं सकती और न ही दबाव में ला सकती है।
” इस अभियान के नाम के महत्व को स्पष्ट करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि पोखरण परमाणु परीक्षण को ‘ऑपरेशन शक्ति’ नाम गहरे सांस्कृतिक कारणों से दिया गया था।उन्होंने कहा कि शिव और शक्ति की संयुक्त उपासना का दर्शन अब भारत की वैज्ञानिक प्रगति को भी प्रेरित कर रहा है। उन्होंने कहा, “आज हम इस संकल्प को साकार होते देख रहे हैं कि हमारी शिव और शक्ति की उपासना देश की वैज्ञानिक प्रगति की प्रेरणा भी बने।”
सोमनाथ का पुनर्निर्माण भारत की स्वतंत्र चेतना का उद्घोष : मोदी
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार को कहा कि 75 वर्ष पहले शुरू हुआ सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं था, बल्कि यह भारत की स्वतंत्र चेतना और प्राचीन गौरव की पुनर्स्थापना का उद्घोष था।श्री मोदी ने सोमनाथ मंदिर में विग्रह प्रतिष्ठा के 75 वर्ष पूर्ण होने पर आयोजित ‘अमृत महोत्सव’ को संबोधित करते हुए कहा कि “समय खुद जिनकी इच्छा से प्रकट होता है, जो स्वयं कालातीत हैं और काल स्वरूप हैं, आज उन देवाधिदेव महादेव की विग्रह प्रतिष्ठा के हम 75 वर्ष मना रहे हैं।”उन्होंने कहा कि सोमनाथ केवल आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि भारत की आत्मा और सनातन चेतना का प्रतीक है।
प्रधानमंत्री ने कहा, “ये सृष्टि जिनसे सृजित होती है, जिनमें लय हो जाती है, आज हम उनके धाम के पुनर्निर्माण का उत्सव मना रहे हैं। जो हलाहल पीकर नीलकंठ हो गए, उन्हीं की शरण में आज सोमनाथ अमृत महोत्सव हो रहा है।”श्री मोदी ने स्वयं को “दादा सोमनाथ का अनन्य भक्त” बताते हुए कहा कि वह अनेक बार यहां आ चुके हैं, लेकिन इस बार यहां पहुंचते हुए उन्हें “समय की यात्रा” का विशेष अनुभव हुआ।उन्होंने कहा कि 75 वर्ष पहले सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण स्वतंत्र भारत के आत्मविश्वास का प्रतीक था।
श्री मोदी ने कहा कि स्वतंत्रता के बाद सरदार वल्लभभाई पटेल ने 500 से अधिक रियासतों का एकीकरण कर आधुनिक भारत की नींव रखी और सोमनाथ के पुनर्निर्माण के माध्यम से दुनिया को संदेश दिया कि भारत केवल स्वतंत्र ही नहीं हुआ है, बल्कि अपने प्राचीन गौरव को पुनः प्राप्त करने के मार्ग पर भी अग्रसर है।उन्होंने कहा कि कुछ महीने पहले सोमनाथ स्वाभिमान पर्व मनाया गया था और अब प्राण प्रतिष्ठा के 75 वर्ष पूरे होने का अवसर मिला है। उन्होंने इसे “हजार वर्षों की अमृत यात्रा” का अनुभव बताया।
श्री मोदी ने कहा कि सोमनाथ अमृत महोत्सव केवल अतीत का उत्सव नहीं, बल्कि अगले एक हजार वर्षों के लिए भारत की प्रेरणा का भी महोत्सव है।इस अवसर पर श्री मोदी ने देशवासियों और भगवान सोमनाथ के करोड़ों भक्तों को शुभकामनाएं दीं।प्रधानमंत्री ने कहा कि 11 मई का दिन एक और कारण से भी विशेष है, क्योंकि इसी दिन वर्ष 1998 में पोखरण में परमाणु परीक्षण किए गए थे। उन्होंने कहा कि भारत ने 11 मई को तीन परमाणु परीक्षण कर अपनी क्षमता और सामर्थ्य का परिचय दुनिया को दिया था।
उन्होंने कहा कि परीक्षणों के बाद विश्व की अनेक शक्तियों ने भारत पर दबाव बनाने का प्रयास किया और आर्थिक प्रतिबंध लगाए, लेकिन इसके बावजूद 13 मई को दो और परमाणु परीक्षण किए गए, जिससे दुनिया को भारत की राजनीतिक इच्छाशक्ति का परिचय मिला।श्री मोदी ने कहा कि तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया था कि राष्ट्र सर्वोपरि है और दुनिया की कोई ताकत भारत को झुका नहीं सकती।
उन्होंने कहा कि पोखरण परमाणु परीक्षण को “ऑपरेशन शक्ति” नाम दिया गया था, क्योंकि भारत की परंपरा शिव और शक्ति की आराधना से जुड़ी रही है। प्रधानमंत्री ने आशा व्यक्त की कि शिव और शक्ति की यह आराधना देश की वैज्ञानिक प्रगति के लिए भी प्रेरणा बनेगी।(वार्ता)
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