
जलती चिताओं के बीच बाबा संग भक्तों ने खेली चिता भस्म की होली
अनोखी होली का मंजर देखने सात समंदर पार से पहुंचे सैलानी ,मणिकर्णिका घाट पर शवदाह के बीच जमकर उड़े अबीर गुलाल
- डाँ.लोकनाथ पाण्डेय
वाराणसी। भूतभावन बाबा भोलेनाथ की नगरी में आज विश्व प्रसिद्ध चिता भस्म की होली काशी के महाश्मशान मणिकर्णिकाघाट पर खेली गई। इस दौरान जलती चिताओं के बीच जब जमकर अबीर गुलाल उड़े तो भूत, प्रेत ,पिशाच संग भगवान भोले का अद्भुत श्रृंगार मनोहारी छटा बिखेर गया। मणिकर्णिका महाश्मशान मंदिर के व्यवस्थापक गुलशन कपूर के नेतृत्व में भक्तों बे सुबह मणिकर्णिका घाट स्थित बाबा का भव्य श्रृंगार संग विधिवत अनुष्ठान किया। घण्टा घड़ियाल के बीच भोग आरती हुई तो बाबा संग आदिशक्ति मां काली की पूजा भी हुई। विशेष अनुष्ठान के बाद बाबा के दृश्य अदृश्य शक्तियों संग भूत, पिसाच ,बैताल बने भक्त जन उत्साह से लबरेज चिता भस्म की होली खेलने जलती चिताओं के बीच पहुंच गए।
इस दौरान भूत प्रेत संग आम भक्त घण्टो नाचते कूदते एक दूसरे को रंग अबीर लगा गले मिलते दिखे। इस दौरान बाबा के अनन्य गण कभी हँसते तो कभी अट्टहास करते अबीर ,गुलाल संग चिता की राख भी उड़ाने लगे। मां गंगा के तट पर यह दृश्य देखने पूर्वान्चल के कई जिलों से यहां लोग पहुंचे। पौराणिक मान्यता है कि काशी में रंगभरी एकादशी के एक दिन बाद बाबा भोलेनाथ इसी मणिकर्णिका के महाश्मशान घाट पर अपने उन दृश्य अदृश्य शक्तियों संग होली खेलने अवश्य आते हैं जिन्हें आम लोगों के बीच आम दिनों में जाने की अनुमति नहीं होती। इस अलौकिक दृश्य को देखने मानो देवलोक भी अस्ज काशी में उतर आया। बाबा भोले की इस अद्भुत होली को देखने आज पूर्वाचंल के विभिन्न जिलों संग सात समंदर पार से कई विदेशी सैलानी भी आये थे।
अबीर गुलाल संग चिता भस्म की होली देख सब अचंभित भी रहे। आज श्मशान घाट शव लेकर पहुंचे शोकमग्न लोग भी बाबा की इस होली को देख मानो सब भूल गए। बाबा की अनोखी होली संग भक्ति में लीन भक्त गण जलती चिताओं बीच नृत्य करते भी दिखे।धरती पर यह नजारा सिर्फ काशी में ही दिखता रहा है। पूर्व में लुप्त हो चुकी इस अद्भुत परम्परा को दो दशक से गुलशन कपूर व उनके सहयोगी जीवंत कर अंतरराष्ट्रीय पहचान दिला रहे। आज भी चिता भस्म की इस अनोखी होली का दृश्य फिल्माने देसी ,विदेशी मीडिया के फ्लैश लगातार चमक रहे थे तो काशी वासी अपने ही धुन में मस्त हो होली खेलने में मशगूल रहे।
आदिकाल से ही महादेव की नगरी में होली समेत किसी भी मांगलिक कार्य की शुरूआत ‘बाबा’ से शुरू होती है। रंगभरी एकादशी से ही बाबा के साथ अबीर-गुलाल खेलकर होली का श्रीगणेश भले हो जाता है परन्तु आज होने वाली चिता भस्म की अद्भुत होली का मानो सबको इंतजार रहता है। इस दौरान पातालपुरी के महंत बालक दास, महाराज गुलशन कपूर ,चैनु प्रसाद जंगलेश्वर यादव, राजू पाठक ,विवेक चौरसिया ,पार्षद कुँअर कांत ,रवि विश्वकर्मा, ओम प्रकाश जायसवाल, नित्यानंद त्रिपाठी ,विजय शंकर पांडेय, रजनी जयसवाल ,रीना श्रीवास्तव, सोनी जायसवाल, सारिका सिन्हा, राजीव सिंह सहित हजारों शिव भक्त मौजूद रहे।




