
कोरोना वायरस से बचाव के लिए तैयार भारत बायोटेक की कोवैक्सीन के तीसरे चरण के क्लीनिकल ट्रायल के नतीजों की घोषणा की है। कंपनी के अनुसार कोरोना से बचाव में कोवैक्सीन 81 प्रतिशत तक प्रभावी है। आईसीएमआर के साथ भारत बायोटेक ने मिलकर तीसरे चरण का ट्रायल किया था जिसमें कुल 25,800 लोगों को शामिल किया गया था।
आठ महीने में तैयार हुई कोवैक्सीन
कोवैक्सीन के तीसरे चरण के ट्रायल के नतीजों पर प्रतिक्रिया देते हुए आईसीएमआर के महानिदेशक बलराम भार्गव ने बताया कि कोवैक्सीन पूरी तरह भारत में निर्मित कोरोना संक्रमण से बचाव की सफल वैक्सीन है। आठ महीने के परिश्रम से तैयार वैक्सीन आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार करती है और वैश्विक महामारी के खिलाफ लड़ने के लिए मजबूत हथियार की तौर पर सभी के सामने है।
आत्मनिर्भर भारत में कोवैक्सीन एक बड़ी उपलब्धि
इस बारे में सफदरजंग अस्पताल के डॉ. अनूप कुमार ने कहा कि जब कोवैक्सीन को लॉन्च किया गया था तब लोगों में कई तरह की आशंका थी कि इसके फेज थ्री ट्रायल नहीं है, ये प्रभावी होगी या नहीं। लेकिन फर्स्ट और सेकंड ट्रायल में ही पता लग गया था कि ये प्रभावी भी है और व्यक्ति के अंदर इम्यूनिटी भी बढ़ा रही है। चूंकि, थर्ड फेज का ट्रायल महत्वपूर्ण ट्रायल होता है इसलिए मंत्रालय की ओर से स्पष्ट कहा गया था कि इसे इमरजेंसी ट्रायल की अनुमति दी गई है। लेकिन जब थर्ड ट्रायल पूरा हुआ, इसमें देखा गया कि ये वैक्सीन 81 प्रतिशत तक कोरोना के खिलाफ प्रभावी है और सुरक्षित भी है। साथ ही फाइजर और अन्य मॉडर्ना है, यह उनके बराबर ही है। इसलिए कह सकते हैं कि आत्मनिर्भर भारत में कोवैक्सीन एक बड़ी उपलब्धि है, जिस पर विश्व के कई देशों की भी नजर बनी हुई है।
गंभीर बीमारी वाले लोगों को भी वैक्सीन लगवाना जरूरी
इस दौरान डॉ. अनूप ने कहा कि बताया कि पहले से ही किसी बीमारी से ग्रस्त मरीजों के लिए भी यह वैक्सीन लगवाना जरूरी है। जो पेशेंट किडनी फेल्योर के हैं और या तो डायलिसिस पर हैं या वो किसी ट्रांसप्लांट का वेट कर रहे हैं, उन पेशेंट्स के लिए ये वैक्सीन बहुत जरूरी है, क्योंकि उनकी पहले से ही इम्यूनिटी कम है और क्योंकि हम जानते हैं कि जिनको क्रॉनिक डिजीज होता है, जिनकी इम्यूनिटी सामान्य मरीज से कम होती है।
तापमान से वैक्सीन पर नहीं होगा कोई प्रभाव
वहीं एक सवाल में कि क्या अलग-अलग तापमान वाली जगह के कारण वैक्सीन के असर पर कोई प्रभाव पड़ेगा, इस पर उन्होंने कहा कि भारत में बनी वैक्सीन को रखने के लिए 2 से 3 डिग्री तापमान चाहिए होता है। भारत में इसकी व्यवस्था करना आसान है। चाहे राजस्थान हो या कश्मीर वैक्सीन के असर में कोई अंतर नहीं होगा। जो प्रभाव वैक्सीन से दिल्ली के लोगों पर होगा वही असर सभी जगह के लोगों पर भी होगा।



