
वाराणसी। आमतौर पर पुलिस की कार्यशैली के प्रति लोगों की धारणा अच्छी नहीं रहती। लोग उसे मददगार के रूप में कम ही पाते हैं। वहीं एक वाकये ने पुलिस को न केवल प्रशंसा का पात्र बनाया बल्कि जमकर सराहना का अवसर दिलाया। मामला वाराणसी के कबीरचौरा हॉस्पिटल का है। मऊ के कमौली गांव की रहने वाली एक एचआईवी संक्रमित महिला प्रसव पीड़ा में तड़प रही थी। पर उसका हाथ बंटाने कोई नहीं आया। वह दर्द से लगातार छटपटाती रही। आने-जाने वाले लोग अपनी जिम्मेदारी को भूल उसे देख चलते बने। किसी ने उसे सहारा देने तक की जहमत नहीं उठायी। आसपास के लोग भी सिर्फ तमाशा देखते रहे। इस दौरान कबीरचौरा चौकी प्रभारी प्रीतम तिवारी की नजर पड़ी तो दरोगा ने तत्काल उसे उठवाकर मंडलीय अस्पताल के महिला वार्ड में भर्ती कराया। भर्ती होने के डेढ़ घंटे बाद ही महिला ने स्वस्थ पुत्री को जन्म दिया है।
मऊ से दर-दर भटकते महिला पहुँची थी वाराणसी
आज के दौर में भी एचआईवी का नाम सुनते ही लोग रोगियों से दूरी बना लेते है। इसका प्रमाण खुद यह महिला रही जो बलिया से गाजीपुर तक कई अस्पतालों में दर दर भटकती रही अंततः उसका कल्याण काशी में हुआ।
एचआइवी संक्रमण अब मातृत्व के लिए अभिशाप नहीं रह गया। बशर्ते महिलाओं को पता हो कि वे इससे संक्रमित हैं। चिकित्सा पद्धति ने मां के एचआइवी संक्रमण से उनके गर्भ में पल रहे बच्चे का बचाव मुमकिन कर दिया है। मऊ के कमौली गांव की रहने वाली एचआईवी संक्रमित गर्भवती महिला को प्रसव के लिए दर-दर भटकना पड़ा। पीड़ित महिला को जब मऊ व गाजीपुर के अस्पतालों में भर्ती नहीं किया गया तो मज़बूरन महिला को वाराणसी आना पड़ा।
नार्मल डिलेवरी में हुआ स्वस्थ्य बच्ची का जन्म
कोरोना के इस मुश्किल दौर में एचआईवी संक्रमित गर्भवती महिला की मंडलीय महिला चिकित्सालय में प्रसव कराया गया। इस दौरान महिला ने नार्मल डिलेवरी के द्वारा एक स्वस्थ बच्ची को जन्म दे दिया। नन्हीं परी को देख मां की आंखों में खुशी के आंसू आ गए। जन्म के बाद बच्ची को तुरंत एंटी एचआईवी दवा नेवीरापीन का डोज भी पिला दिया गया है। फ़िलहाल जच्चा बच्चा स्वस्थ होकर दरोगा व अस्पताल कर्मियों को दुआएं दे रहे है।



