पुलिस आवासीय परियोजनाओं में गुणवत्ता और समयबद्धता से समझौता नहीं: मुख्यमंत्री
लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश पुलिस आवास निगम की समीक्षा करते हुए पुलिसकर्मियों के लिए बेहतर आवासीय और कार्य सुविधाओं पर जोर दिया। उन्होंने निर्देश दिए कि थाना, बैरक, पुलिस लाइन और अग्निशमन केंद्रों के निर्माण कार्य गुणवत्ता और तय समयसीमा में पूरे किए जाएं। बैठक में बताया गया कि वर्ष 2023 से अब तक 1586 निर्माण कार्य पूरे किए जा चुके हैं। मुख्यमंत्री ने थर्ड पार्टी ऑडिट, तकनीकी मॉनिटरिंग और रिक्त पदों को मेरिट के आधार पर भरने के निर्देश भी दिए।
लखनऊ : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को उत्तर प्रदेश पुलिस आवास निगम की समीक्षा करते हुए कहा कि पुलिसकर्मियों की कार्यक्षमता और मनोबल को मजबूत करने के लिए बेहतर आवासीय एवं कार्य सुविधाएं आवश्यक हैं। उन्होंने निर्देश दिए कि पुलिस लाइन, थाना, बैरक, अग्निशमन केंद्र और अन्य निर्माण कार्य गुणवत्ता तथा समयबद्धता के साथ पूरे किए जाएं। मुख्यमंत्री ने कहा कि आधुनिक पुलिसिंग के लिए मजबूत आधारभूत ढांचा जरूरी है और निर्माण कार्यों में तकनीकी मानकों से कोई समझौता न हो।
बैठक में बताया गया कि पुलिस आवास निगम वर्तमान में प्रदेश के 75 जनपदों में कार्य कर रहा है और इसकी छह निर्माण इकाइयों के माध्यम से कुल 233 निर्माण कार्य संचालित हैं। इनमें से 221 कार्य निर्धारित समयसीमा के भीतर हैं।
बैठक में यह भी अवगत कराया गया कि वर्ष 2023 से 20 मई 2026 तक कुल 1586 निर्माण कार्य पूर्ण किए गए हैं, जिनकी लागत लगभग 1104 करोड़ रुपये रही। इनमें बहुमंजिला बैरक, ट्रांजिट हॉस्टल, थाना भवन, अग्निशमन केंद्र, पुलिस चौकी, जीआरपी बैरक, एटीएस फील्ड यूनिट तथा महाकुंभ-2025 से जुड़ी परियोजनाएं शामिल हैं। थानों में महिला प्रसाधन जैसी सुविधाओं का भी विकास कराया गया है।
बैठक में बताया गया कि निगम लगातार लाभ की स्थिति में है। वर्ष 2025-26 में अब तक 11.14 करोड़ रुपये का लाभ अर्जित किया गया है। साथ ही निर्माण कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए थर्ड पार्टी जांच, सामग्री परीक्षण और मोबाइल ऐप आधारित रियल टाइम मॉनिटरिंग की व्यवस्था लागू है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि निर्माण कार्यों की समयबद्धता और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए नियमित मॉनीटरिंग की जाए। आवश्यकतानुसार तकनीकी विशेषज्ञों की मदद ली जाए तथा अतिरिक्त मैनपॉवर भी लगाया जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि सभी परियोजनाओं का समय-समय पर प्रतिष्ठित संस्थानों से थर्ड पार्टी ऑडिट भी कराया जाए।
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि सभी परियोजनाओं की नियमित समीक्षा की जाए और पुलिस बल की जरूरतों के अनुरूप आधुनिक, सुरक्षित एवं उपयोगी अधोसंरचना विकसित की जाए। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि रिक्त पदों को मेरिट के आधार पर भरा जाए।
बिहार की नाबालिग पीड़िता को मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से 2 लाख रुपये की सहायता
उत्तर प्रदेश की योगी सरकार महिला अपराध को लेकर काफी सजग और संवेदनशील है। सरकार एक तरफ महिला अपराध से जुड़े अपराधियों पर सख्त कार्रवाई कर रही है,वहीं पीड़िता को आर्थिक मदद के साथ ही सामजिक संबल भी प्रदान कर रही है। ह्यूमन ट्रैकिंग के प्रति अति संवेदनशीलता के चलते वाराणसी के सारनाथ थाने की पुलिस द्वारा कथित रूप से बेची गई नाबालिग बालिका को बरामद करते हुए आरोपियों को गिरफ्तार किया था। वाराणसी प्रशासन द्वारा मानव तस्करी और दुष्कर्म पीड़िता बालिका को तत्काल आर्थिक मदद के लिए मंगलवार को मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से दो लाख रुपये की सहायता का प्रस्ताव शासन को भेजा था, जो तत्काल स्वीकृत हो गया। यह पहल पीड़िता को आर्थिक सहारा देने के साथ उसके पुनर्वास और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
जिलाधिकारी वाराणसी ने बताया कि बालिका को तत्काल बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत कर 20 मई को ही चिकित्सकीय परीक्षण कराते हुए राजकीय बाल गृह (बालिका) में रखा गया है। उन्होंने बताया कि बालिका को वहां मनोचिकित्सकों के माध्यम से काउंसलिंग उपलब्ध कराई जा रही है, ताकि उसे मानसिक और भावनात्मक संबल मिल सके। साथ ही, बालिका को पारिवारिक वातावरण में रखने का प्रयास किया जा रहा है तथा आवश्यक कानूनी सहायता भी उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे उसके पुनर्वास और न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावी रूप से आगे बढ़ाया जा सके।
पुलिस के मुताबिक मूल रूप से बिहार की रहने वाली पीड़िता की मां ने पैसों के लालच में एक व्यक्ति से उसकी झूठी शादी करा दी थी। इस घटना में पुलिस पीड़िता की मां सहित तीन आरोपियों को पहले ही गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। थाना सारनाथ पुलिस द्वारा मानव तस्करी उसके साथ दुष्कर्म, पॉक्सो एक्ट के प्रावधानों के तहत मुकदमा दर्ज कर विधिक कार्रवाई की गई है।
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