नारी वंदन सम्मेलन में काशी के जीआई क्राफ्ट से मातृशक्ति ने प्रधानमंत्री मोदी का किया अभिनंदन
वाराणसी में आयोजित नारी वंदन सम्मेलन में मातृशक्ति ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्वागत काशी के जीआई टैग हस्तशिल्प उत्पादों से किया। पहली बार एक ही मंच से छह जीआई पंजीकृत कलाकृतियां भेंट कर नया कीर्तिमान बना। इसमें काष्ठ कला, जरदोजी, पेपर मैशे और सॉफ्ट स्टोन शिल्प शामिल रहे। इस आयोजन से काशी की पारंपरिक कला को राष्ट्रीय पहचान मिली और स्थानीय शिल्पकारों व बुनकरों का उत्साह बढ़ा। उत्तर प्रदेश जीआई उत्पादों में देश में अग्रणी बना हुआ है।
वाराणसी : नारी वंदन सम्मेलन के मंच पर काशी की समृद्ध हस्तशिल्प परंपरा और महिला शक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। सम्मेलन में मातृशक्ति ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्वागत काशी के जीआई टैग प्राप्त हस्तशिल्प उत्पादों से किया। यह अवसर इसलिए भी विशेष रहा क्योंकि पहली बार किसी एक मंच से प्रधानमंत्री को एक साथ छह जीआई पंजीकृत उत्पाद उपहार स्वरूप भेंट किए गए।
कार्यक्रम में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी और जिला पंचायत अध्यक्ष पूनम मौर्य समेत कई जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। मंच पर महिला पार्षदों, ग्राम प्रधानों और प्रबुद्ध महिलाओं ने अपने सांसद एवं प्रधानमंत्री को काशी की विरासत से जुड़ी यह विशेष सौगात भेंट की।
देशभर में जीआई टैग उत्पादों के मामले में उत्तर प्रदेश अग्रणी राज्य है। प्रदेश में 79 जीआई पंजीकृत हस्तशिल्प उत्पाद हैं, जिनमें काशी का महत्वपूर्ण योगदान है। ऐसे में यह आयोजन स्थानीय शिल्पकारों के लिए सम्मान और पहचान का बड़ा अवसर बन गया।

पद्मश्री से सम्मानित और “जीआई मैन ऑफ इंडिया” के नाम से प्रसिद्ध डॉ. रजनीकांत ने बताया कि पहली बार काष्ठ कला के माध्यम से भारत के नए संसद भवन के लोकसभा कक्ष का सूक्ष्म मॉडल तैयार किया गया। इसे बनारस के तीसरी पीढ़ी के युवा शिल्पी राजकुमार ने अपने सहयोगियों संजय प्रजापति और सनोज पेंटर के साथ एक सप्ताह की मेहनत से तैयार किया। 24 इंच आकार की इस कलाकृति को विशेष रूप से प्रधानमंत्री को भेंट किया गया।
इसके अलावा रामनगर के स्टेट अवॉर्डी शिल्पी बच्चा लाल मौर्य द्वारा निर्मित सॉफ्ट स्टोन जाली क्राफ्ट का “मोर के भीतर मोर” शिल्प भी भेंट किया गया। काष्ठ कला से बनी पंचमुखी गणेश प्रतिमा, बनारसी जरदोजी से तैयार नए संसद भवन की फ्रेमयुक्त कलाकृति, नमो घाट का प्रतीक चिन्ह तथा पेपर मैशे क्राफ्ट से तैयार मां दुर्गा का भव्य मुखौटा भी प्रधानमंत्री को भेट किया गया।
एक ही मंच पर एक साथ छह जीआई टैग हस्तशिल्प उत्पादों की प्रस्तुति ने नया कीर्तिमान स्थापित किया। इससे न केवल काशी की कला परंपरा को राष्ट्रीय मंच मिला, बल्कि स्थानीय शिल्पकारों और बुनकरों का उत्साह भी बढ़ा। अनिल कसेरा, अरुण कुमार, संतारा पटेल, पूनम देवी, दिनेश कुमार, अवधेश सिंह, शादाब सहित अनेक शिल्पियों और बुनकरों ने इस सम्मान पर खुशी जताई और कहा कि प्रधानमंत्री तक काशी की कला पहुंचना पूरे शहर के लिए गर्व की बात है।
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