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ईरान पर हमलों से 270 अरब डॉलर का नुकसान, अमेरिका-ईरान वार्ता में तनाव बरकरार

अमेरिका-इजरायल हमलों से ईरान को लगभग 270 अरब डॉलर के भारी नुकसान का दावा किया गया है। प्रवक्ता फातेमा मोहाजेरानी के अनुसार, इमारतों, औद्योगिक केंद्रों और राजस्व पर व्यापक प्रभाव पड़ा है। वहीं अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि वार्ता में प्रगति हुई है, लेकिन अब निर्णय ईरान को लेना है। होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर तनाव बना हुआ है। राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान की सैन्य क्षमता को कमजोर बताते हुए अपने दावों को दोहराया, जिससे क्षेत्रीय हालात और जटिल हो गए हैं।

तेहरान : ईरान सरकार की प्रवक्ता फातेमा मोहाजेरानी ने कहा है कि शुरुआती अनुमानों के अनुसार अमेरिकी-इजरायली हमलों से ईरान को लगभग 270 अरब डॉलर का नुकसान हुआ है।सुश्री मोहाजेरानी ने कहा, “प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार आज तक 270 अरब डॉलर का नुकसान होने का संकेत मिला है।” उनके अनुसार, नुकसान के अधिक सटीक आंकड़े सरकार के आर्थिक ब्लॉक द्वारा निर्धारित किए जाएंगे, जो कई चरणों में इसका मूल्यांकन कर रहे हैं।

प्रवक्ता ने बताया कि पहले चरण में इमारतों के नुकसान का आकलन किया जा रहा है, जबकि दूसरे चरण में बजट राजस्व के नुकसान और औद्योगिक केंद्रों के बंद होने से संबंधित नुकसान का आकलन किया जाएगा।सुश्री मोहाजेरानी ने यह भी उल्लेख किया कि ईरान को दिए जाने वाले अमेरिकी सैन्य हर्जाने का मुद्दा ईरानी वार्ता टीम द्वारा उठाए जा रहे विषयों में से एक है।

अमेरिका-ईरान वार्ता में काफी प्रगति हुई है, लेकिन अब गेंद ईरान के पाले मेंः जेडी वेंस

अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने दावा किया है कि शांति वार्ता के दौरान अमेरिका और ईरान ने काफी प्रगति की है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि यदि ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने से इनकार करता है, तो शांति वार्ता का स्वरूप बदल जाएगा।श्री वेंस ने फॉक्स न्यूज से कहा, “मैं सिर्फ यह नहीं कहूंगा कि चीजें गलत हुईं। मुझे यह भी लगता है कि चीजें सही रही हैं। हमने काफी प्रगति की है।” ईरान के साथ आगे की बातचीत की संभावनाओं के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि अब गेंद ईरान के पाले में है।

अमेरिकी उपराष्ट्रपति ने चेतावनी दी कि यदि ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह नहीं खोला, तो अमेरिका के साथ उनकी बातचीत का आधार बदल जाएगा।इस्लामाबाद वार्ता में अमेरिकी टीम का नेतृत्व करने वाले श्री वेंस ने स्पष्ट किया कि अमेरिका ईरान से समृद्ध यूरेनियम को पूरी तरह वापस चाहता है ताकि अमेरिका का उस पर पूरा नियंत्रण रहे।श्री वेंस ने कहा, “हमें निश्चित रूप से परमाणु सामग्री को ईरान से बाहर निकालने की आवश्यकता है। हम चाहते हैं कि वह सामग्री पूरी तरह से देश से बाहर हो ताकि अमेरिका का उस पर नियंत्रण हो। यह हमारी पहली प्राथमिकता है।

“उल्लेखनीय है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के साथ दो सप्ताह के संघर्ष विराम समझौते की घोषणा के बाद 11 अप्रैल को इस्लामाबाद में वार्ता शुरू हुई थी। हालांकि, 12 अप्रैल की सुबह वेंस ने घोषणा की थी कि दोनों देश किसी समझौते पर नहीं पहुँच सके हैं और अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल बिना किसी सौदे के वापस लौट रहा है।इससे पहले 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल ने तेहरान सहित ईरान के विभिन्न ठिकानों पर हमले किए थे, जिसके जवाब में ईरान ने भी इजराइली क्षेत्र और पश्चिमी एशिया में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले किए थे।

होर्मुज से 34 जहाज गुजरेः ट्रंप

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि सोमवार को होर्मुज जलडमरूमध्य से 34 जहाज गुजरे हैं, जो नाकेबंदी शुरू होने के बाद से अब तक की सबसे बड़ी संख्या है।श्री ट्रंप एक बार फिर दावा किया कि ईरान सैन्य और अन्य रूप से ‘पूरी तरह से तबाह’ हो चुका है। इसके साथ ही उन्होंने मीडिया, विशेष रूप से न्यूयॉर्क टाइम्स पर ‘फर्जी खबरें’ फैलाने का आरोप लगाते हुए कहा कि वे यह दिखा रहे हैं कि ईरान जीत रहा है या बेहतर स्थिति में है।

अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ सोशल पर कहा, ” इस तथ्य के बावजूद कि ईरान सैन्य और अन्य रूप से पूरी तरह से तबाह हो चुका है, असफल होते न्यूयॉर्क टाइम्स को पढ़ने वालों को लगेगा कि ईरान वास्तव में जीत रहा है या कम से कम काफी अच्छा कर रहा है, लेकिन यह सच नहीं है।”श्री ट्रंप ने कहा कि न्यूयॉर्क टाइम्स जानता है कि यह फर्जी खबर है। उन्होंने सवाल किया, “यह भ्रष्ट मीडिया संस्थान मेरे, मेरे समर्थकों और हमारे देश के खिलाफ अपने झूठ और भयानक कृत्यों के लिए कब माफी मांगेगा?”अमेरिकी राष्ट्रपति ने सोमवार को दावा किया था कि ईरान की नौसेना ‘समुद्र के तल में पड़ी है, पूरी तरह से नष्ट हो चुकी है’। इसके साथ ही उन्होंने 158 जहाजों का आंकड़ा भी दिया था।

श्री ट्रंप ने कहा, “हमने उनके उन छोटे जहाजों को नहीं मारा है जिन्हें वे ‘फास्ट अटैक शिप’ कहते हैं, क्योंकि हमने उन्हें बड़ा खतरा नहीं माना।” उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इनमें से कोई भी जहाज अमेरिकी नाकेबंदी के करीब आया, तो उन्हें तुरंत खत्म कर दिया जाएगा। इसके लिए उसी ‘किल सिस्टम’ का उपयोग किया जाएगा जो अमेरिका समुद्र में नावों पर सवार ड्रग डीलरों के खिलाफ करता है।(वार्ता)

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