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2026 में कमजोर मानसून का संकेत, देशभर में कम वर्षा का अनुमान

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार वर्ष 2026 में दक्षिण-पश्चिम मानसून सामान्य से कमजोर रह सकता है। देशभर में कुल वर्षा दीर्घकालिक औसत का लगभग 92 प्रतिशत रहने का अनुमान है। इसका प्रभाव कृषि, जल संसाधनों और फसल उत्पादन पर पड़ सकता है। विशेषज्ञों ने किसानों को सतर्क रहने और वैकल्पिक योजनाएं अपनाने की सलाह दी है।

  • आईएमडी ने जारी किया पूर्वानुमान, एलपीए का 92% रह सकती है बारिश

नयी दिल्ली : देशभर में वर्ष 2026 के दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान वर्षा सामान्य से कम रहने की संभावना जताई गई है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) द्वारा जारी दीर्घावधि पूर्वानुमान के अनुसार, इस वर्ष मानसूनी वर्षा दीर्घकालिक औसत (एलपीए) का लगभग 92 प्रतिशत (±5 प्रतिशत) रहने का अनुमान है।

पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय ने सोमवार को जानकारी देते हुए बताया कि यह अनुमान 1971 से 2020 के बीच दर्ज आंकड़ों के आधार पर तैयार किया गया है। इस अवधि के अनुसार देश में औसत मानसूनी वर्षा 87 सेंटीमीटर मानी जाती है।

मौसम विभाग के अनुसार, 96 से 104 प्रतिशत के बीच वर्षा को सामान्य श्रेणी में रखा जाता है, जबकि 90 से 96 प्रतिशत के बीच की वर्षा को सामान्य से कम माना जाता है। ऐसे में 92 प्रतिशत का अनुमान इस वर्ष मानसून के कमजोर रहने के संकेत दे रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून की यह स्थिति कृषि क्षेत्र के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो सकती है, क्योंकि देश की बड़ी आबादी खेती पर निर्भर है। वर्षा में कमी का असर फसल उत्पादन, जलाशयों के स्तर और पेयजल आपूर्ति पर पड़ सकता है।

आईएमडी ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह दीर्घावधि पूर्वानुमान है और इसमें क्षेत्रीय स्तर पर बदलाव संभव है। विभाग जून माह के दौरान मानसून के आगमन और प्रगति को लेकर अधिक सटीक और विस्तृत जानकारी जारी करेगा।

विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि वे मौसम की अनिश्चितता को देखते हुए वैकल्पिक फसल योजना और जल संरक्षण उपायों पर ध्यान दें, ताकि संभावित नुकसान को कम किया जा सके।(वार्ता)

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