संगठन की शक्ति: प्रेरणा कैंटीन से कीर्ति ने खड़ा किया खुद का व्यवसाय
हमीरपुर की कीर्ति सिंह ने स्वयं सहायता समूह से जुड़कर “प्रेरणा कैंटीन” की शुरुआत की, जो आज 1.25 करोड़ रुपये टर्नओवर वाला सफल उद्यम बन चुका है। यह पहल न केवल महिलाओं को रोजगार दे रही है, बल्कि बच्चों को पौष्टिक भोजन भी उपलब्ध करा रही है, जिससे ग्रामीण महिला सशक्तिकरण को नई दिशा मिल रही है।
हमीरपुर। उत्तर प्रदेश में महिला सशक्तिकरण की दिशा में चल रही सरकारी योजनाएं अब जमीनी स्तर पर बदलाव की नई कहानियां लिख रही हैं। हमीरपुर जनपद की रहने वाली कीर्ति सिंह आज इसी परिवर्तन की एक सशक्त प्रतीक बनकर उभरी हैं। कभी एक साधारण अध्यापिका और सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में अपनी पहचान रखने वाली कीर्ति ने जब स्वयं सहायता समूह से जुड़ने का निर्णय लिया, तब शायद उन्हें भी अंदाजा नहीं था कि यह कदम उनके जीवन की दिशा ही बदल देगा।
वर्ष 2018 में स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद कीर्ति ने संघर्ष, साहस और संकल्प के साथ आत्मनिर्भरता की राह पर कदम बढ़ाया। शुरुआत छोटी थी, लेकिन सोच बड़ी। आर्थिक सीमाओं के बावजूद उन्होंने अपने सपनों को सीमित नहीं होने दिया। धीरे-धीरे उन्होंने अपने भीतर छिपी उद्यमिता की क्षमता को पहचाना और उसे साकार करने का साहस जुटाया।
यह साहस ही था, जिसने अगस्त 2025 में उन्हें एक नई पहल की ओर अग्रसर किया। कीर्ति ने 10 महिलाओं के साथ मिलकर हमीरपुर के दरियापुर स्थित जय प्रकाश नारायण सर्वोदय विद्यालय में “प्रेरणा कैंटीन” की नींव रखी। लगभग 11 लाख रुपये के निवेश से शुरू हुई यह छोटी-सी पहल आज एक बड़े और सफल उद्यम के रूप में स्थापित हो चुकी है, जिसका वार्षिक टर्नओवर करीब 1.25 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।
यह कैंटीन सिर्फ एक व्यवसाय नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव का केंद्र बन चुकी है। यहां हर दिन 332 बच्चों को स्वच्छ, पौष्टिक और किफायती भोजन उपलब्ध कराया जाता है। बच्चों के लिए नाश्ता, दूध और भोजन की व्यवस्था इस तरह से की जाती है कि उनकी सेहत और पोषण दोनों का पूरा ध्यान रखा जा सके। वहीं विद्यालय के शिक्षकों के लिए भी गुणवत्तापूर्ण भोजन की सुविधा उपलब्ध है।
आज इस कैंटीन से 8 महिलाएं नियमित रूप से जुड़ी हुई हैं, जिन्हें हर महीने लगभग ₹8,000 का स्थायी आय स्रोत मिल रहा है। यह आय न केवल उनके परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत कर रही है, बल्कि उनके आत्मविश्वास को भी नई ऊंचाइयों तक ले जा रही है।
कीर्ति सिंह का यह सफर केवल व्यक्तिगत सफलता की कहानी नहीं है, बल्कि यह उत्तर प्रदेश सरकार की योजनाओं—विशेष रूप से स्वयं सहायता समूह और मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना—की प्रभावशीलता का जीवंत उदाहरण भी है। कीर्ति ने पहले बैंक सखी के रूप में काम करते हुए वित्तीय समझ विकसित की और फिर उसी अनुभव को आधार बनाकर उद्यमिता की दिशा में कदम बढ़ाया।
कीर्ति भावुक होकर कहती हैं, “अगर मुझे स्वयं सहायता समूह और सरकार की योजनाओं का सहयोग नहीं मिला होता, तो शायद मैं आज इस मुकाम तक नहीं पहुंच पाती। यह केवल मेरा नहीं, हम सभी महिलाओं का सफर है।”
आज कीर्ति न सिर्फ आत्मनिर्भर हैं, बल्कि अपने साथ जुड़ी अन्य महिलाओं के जीवन में भी उजाला भर रही हैं। उनका सपना है कि वह इस पहल को और विस्तार दें, अधिक महिलाओं को रोजगार से जोड़ें और समाज में पोषण व स्वच्छता के प्रति जागरूकता फैलाएं। इसके लिए उन्होंने मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना के तहत ऋण के लिए आवेदन भी किया है।
कीर्ति की कहानी यह संदेश देती है कि जब सरकार की योजनाएं सही हाथों तक पहुंचती हैं और उनमें मेहनत, लगन और दृढ़ संकल्प जुड़ जाता है, तो असंभव भी संभव हो जाता है। यह कहानी केवल एक महिला की सफलता नहीं, बल्कि उस बदलते भारत की तस्वीर है, जहां गांव की बेटियां अब अपने दम पर नई पहचान गढ़ रही हैं और दूसरों के लिए प्रेरणा बन रही हैं।
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