Varanasi

काशी में सजा राजस्थान का रंग: सिंधारा कार्यक्रम में संस्कृति का अद्भुत संगम

वाराणसी के महमूरगंज स्थित शुभम् लॉन में आयोजित सिंधारा कार्यक्रम में राजस्थानी लोकसंस्कृति जीवंत हो उठी। 200 महिलाओं और बच्चों की प्रस्तुतियों ने गणगौर पर्व की भक्ति और परंपरा को सजीव किया। दीप प्रज्ज्वलन से आरंभ कार्यक्रम में सांस्कृतिक झलकियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया। 21 मार्च को भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी।

  • 200 महिलाओं-बच्चों की प्रस्तुति ने महमूरगंज में बिखेरी गणगौर की छटा, 21 मार्च को निकलेगी भव्य शोभायात्रा

वाराणसी। गंगा तट की आध्यात्मिक नगरी काशी में उस समय सांस्कृतिक रंगों की अनुपम छटा बिखर गई, जब राजस्थान की लोकपरंपराएं और काशी की आध्यात्मिकता एक ही मंच पर साकार होती नजर आईं। महमूरगंज स्थित शुभम् लॉन में श्री गवरजा माता उत्सव समिति, वाराणसी के तत्वावधान में आयोजित सिंधारा कार्यक्रम ने न केवल राजस्थानी लोकजीवन को जीवंत किया, बल्कि काशी की फिजाओं में मरुधरा की सुगंध भी घोल दी।

कार्यक्रम में लगभग 200 महिलाओं और बच्चों की भागीदारी ने इसे विशेष बना दिया। पारंपरिक राजस्थानी परिधानों-घाघरा, चुन्नी और साफों-की रंग-बिरंगी छटा के बीच प्रस्तुत लोकनृत्य और गीतों ने उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया। हर प्रस्तुति में लोकसंस्कृति की गहराई, भक्ति की भावना और परंपराओं का जीवंत स्वरूप स्पष्ट रूप से झलकता रहा।

सायंकाल 5 बजे कार्यक्रम का शुभारंभ एडीजी पुलिस वाराणसी पियूष मोडिया एवं विशिष्ट अतिथि श्रीमती स्वाति मित्तल द्वारा दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। दीप की पावन ज्योति के साथ ही पूरे वातावरण में श्रद्धा, सौंदर्य और सांस्कृतिक समर्पण की उजास फैल गई।

https://cmgtimes.com/a-unique-honor-in-the-memory-of-ratan-kumar-gupta-who-became-a-hero-of-the-society-even-without-holding-a-post/

समिति के अध्यक्ष कमल अग्रवाल एवं मंत्री राम बूबना ने स्वागत भाषण में गणगौर पर्व के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि स्त्री-श्रद्धा, प्रेम और प्रकृति के प्रति समर्पण का प्रतीक है, जो पीढ़ियों से भारतीय संस्कृति का अभिन्न हिस्सा रहा है। उनके वक्तव्य ने कार्यक्रम को भावनात्मक गहराई प्रदान की।

सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की श्रृंखला में “मोरया रे… गणपति बप्पा मोरया” से आरंभ होकर “ओम नमः शिवाय”, “गोविन्द बोलो हरे गोपाल बोलो” और “नारी हूं मैं…” जैसे गीतों ने भक्ति, नारी सशक्तिकरण और सांस्कृतिक चेतना का अद्भुत समन्वय प्रस्तुत किया। वहीं “बुम्बरों बुम्बरो”, “ईसर जी की बारात” और “गणगौर तब से अब तक” जैसी प्रस्तुतियों ने राजस्थानी परंपराओं की ऐतिहासिक यात्रा को मंच पर सजीव कर दिया। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो काशी की धरती कुछ क्षणों के लिए राजस्थान में परिवर्तित हो गई हो।

समिति के प्रचार मंत्री गौरव राठी ने जानकारी दी कि आगामी 21 मार्च को काशी गौशाला, गोलघर से लक्ष्मीकुण्ड स्थित श्री श्याम मंदिर तक भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी, जिसमें अधिक से अधिक लोगों से शामिल होने की अपील की गई है।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित आयुष मंत्री डॉ. दयाशंकर मिश्र ‘दयालु’ अपरिहार्य कारणों से उपस्थित नहीं हो सके, किन्तु उनका भेजा गया संदेश पूरे आयोजन का भावनात्मक केंद्र बन गया। उन्होंने अपने संदेश में आयोजन को भारतीय संस्कृति, आस्था और सामाजिक एकता का प्रतीक बताते हुए मां गवरजा से सभी के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की कामना की।

कार्यक्रम का संचालन दीपक माहेश्वरी, पवन कुमार अग्रवाल, प्रीति बाजोरिया, ऋतु धूत, शानू जाजोदिया और पूजा चाण्डक द्वारा किया गया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन अजय खेमका ने किया और अतिथियों का स्वागत लाला चांडक ने किया।

इस अवसर पर कमल अग्रवाल, राम बूबना, आर. के. चौधरी, लोकेन्द्र करवा, उमाशंकर अग्रवाल, नवरतन राठी, पवन मोदी, दीपक बजाज, शंकरलाल सोमानी, गौरीशंकर नेवर, संजीव शाह, मांगीलाल सारडा, जेठमल चाण्डक, गौरव राठी, अनूप सर्राफ, ओमकार महेश्वरी, वेदमूर्ति शास्त्री, कौशल खण्डेलवाल, अशोक वर्मा, किशोर मुंदडा, कमलेश अग्रवाल, श्याम सुन्दर गाडोदिया, योगेश भुरारिया, गिरीराज कोठारी, अजय काबरा, मदन मोहन अग्रवाल सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

समग्र रूप से यह आयोजन केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि काशी और राजस्थान की साझा विरासत का सजीव उदाहरण बनकर सामने आया, जिसने उपस्थित लोगों के मन में सांस्कृतिक एकता और परंपराओं के प्रति गहरा सम्मान जागृत किया।

“बिना पद के भी बन गए समाज के हीरो- रतन कुमार गुप्ता की याद में हुआ अनोखा सम्मान”

BABA GANINATH BHAKT MANDAL  BABA GANINATH BHAKT MANDAL

Related Articles

Back to top button