लोकतंत्र की आत्मा हैं पीठासीन अधिकारी, लखनऊ से देश को मिला बड़ा संदेश
लखनऊ में आयोजित 86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने पीठासीन अधिकारियों को लोकतंत्र की आत्मा का संरक्षक बताया। उन्होंने निष्पक्षता, मर्यादा और सार्थक संवाद पर बल दिया। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सदन की कार्यवाही के लिए पर्याप्त समय सुनिश्चित करने की आवश्यकता जताई। तीन दिवसीय सम्मेलन में संसदीय अनुशासन, संवाद और लोकतांत्रिक संस्थाओं की मजबूती पर व्यापक मंथन हो रहा है।
- कहा: अनुभवों के आदान-प्रदान और श्रेष्ठ संसदीय परंपराओं के संरक्षण का सशक्त मंच है यह सम्मेलन
लखनऊ । उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा कि पीठासीन अधिकारी लोकतंत्र की आत्मा के संरक्षक होते हैं और उनकी निष्पक्षता, विवेक एवं मर्यादा ही सदनों को जनआकांक्षाओं की प्रभावी अभिव्यक्ति का मंच बनाती है। उन्होंने कहा कि अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारियों का सम्मेलन भारतीय संसदीय परंपराओं की सुदृढ़ता, मर्यादा और निरंतरता का जीवंत प्रतीक है। राज्यपाल विधानसभा में 19 से 21 जनवरी, 2026 तक आयोजित अखिल भारतीय 86वें पीठासीन अधिकारियों के सम्मेलन के उद्घाटन अवसर पर संबोधित कर रही थीं। उन्होंने देश के विभिन्न राज्यों से आए पीठासीन अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए कहा कि लखनऊ की तहज़ीब, संवाद और समन्वय की परंपरा इस सम्मेलन को विशेष गरिमा प्रदान करती है।
राज्यपाल ने कहा कि यह सम्मेलन अनुभवों के आदान-प्रदान, श्रेष्ठ संसदीय परंपराओं के संरक्षण और नवाचारों के सृजन का सशक्त माध्यम बनेगा। उन्होंने उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और लोकतांत्रिक विरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि यह प्रदेश वैदिक संस्कृति, दर्शन और लोकतांत्रिक चेतना का केंद्र रहा है। उन्होंने कहा कि सदन की सार्थकता केवल बहसों की संख्या से नहीं, बल्कि लोककल्याण के प्रति दृष्टिकोण, तथ्यपूर्ण और समाधानपरक चर्चा से तय होती है। यदि संवाद समाधान में परिवर्तित हो, तभी संसदीय लोकतंत्र सशक्त और विश्वसनीय बनता है।
राज्यपाल ने सदन की कार्यवाही में व्यवधान को लोकतंत्र के लिए गंभीर चुनौती बताते हुए कहा कि इससे जनहित के विषयों पर चर्चा बाधित होती है और जनता का विश्वास प्रभावित होता है। उन्होंने विचारों की भिन्नता को लोकतंत्र की शक्ति बताते हुए असहमति को लोकतांत्रिक सौंदर्य के रूप में स्वीकार करने का आह्वान किया।
राज्यपाल ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला द्वारा विधानसभाओं की कार्य-सीमा निश्चित करने के सुझाव का उल्लेख करते हुए कहा कि इस दिशा में गंभीरता से अमल किया जाना आवश्यक है, ताकि विधायी कार्य अधिक प्रभावी, सुव्यवस्थित और जनहितकारी बन सके। उन्होंने उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष श्री सतीश महाना के मार्गदर्शन में प्रकाशित पुस्तक “उत्तर प्रदेश विधान सभा की संसदीय पद्धति और प्रक्रिया” की सराहना करते हुए कहा कि यह प्रकाशन संसदीय अनुशासन और लोकतांत्रिक मर्यादाओं का महत्वपूर्ण मार्गदर्शक सिद्ध होगा।
राज्यपाल ने विश्वास व्यक्त किया कि यह सम्मेलन राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ करने के साथ-साथ भारत के संसदीय लोकतंत्र को नई दिशा देगा और लोकतंत्र को अधिक सशक्त, समावेशी एवं जनोन्मुखी बनाने में मील का पत्थर साबित होगा।
सदन जितना अधिक चलेगा, उतनी ही अधिक सार्थक, गंभीर व परिणामोन्मुख चर्चा संभव होगी : लोकसभा अध्यक्ष
पीठासीन अधिकारी सम्मेलन में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि पीठासीन अधिकारी चाहे जिस राजनीतिक दल से आते हों, उनका आचरण दलगत राजनीति से हटकर पूर्णतः न्यायपूर्ण एवं निष्पक्ष होना चाहिए और ऐसा दिखना भी चाहिए। उन्होंने कहा कि विधायिका के माध्यम से जनता की आकांक्षाएं और आवाज शासन तक पहुंचती हैं तथा उनका समाधान होता है। ऐसे में राज्यों में सदन की कार्यवाही का घटता समय सभी के लिए चिंताजनक है। श्री बिरला ने सदन की कार्यवाही के लिए निश्चित एवं पर्याप्त समय सुनिश्चित करने पर बल देते हुए कहा कि सदन जितना अधिक समय चलेगा, उतनी ही अधिक सार्थक, गंभीर और परिणामोन्मुख चर्चा संभव होगी।
लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि आधुनिक सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी और सोशल मीडिया के युग में जनप्रतिनिधियों के प्रत्येक आचरण पर जनता की दृष्टि रहती है, इसलिए संसदीय शिष्टाचार और अनुशासन का पालन और भी अधिक आवश्यक हो गया है। आज तकनीक के युग में जब चारों तरफ से सूचना का प्रवाह होता है, तब सदन की प्रामाणिकता बनाए रखना, हम सभी की जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन जैसे मंच लोकतांत्रिक संस्थाओं के बीच सहयोग को बढ़ाते हैं, आपसी समन्वय को मजबूत करते हैं और शासन व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाते हैं। इन सम्मेलनों से देशभर में नीतियों और कल्याणकारी उपायों में सामंजस्य स्थापित करने में भी सहायता मिलती है। पीठासीन अधिकारियों के रूप में यह हमारा कर्तव्य है कि सदन में सभी सदस्यों, विशेषकर नए और युवा सदस्यों को पर्याप्त अवसर प्रदान किए जाएं, ताकि ये सदन जनता की समस्याओं को उठाने का सबसे प्रभावी मंच बने रहें।
लोकतंत्र का महाकुंभ लखनऊ में, 86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन का भव्य शुभारंभ



