
ठंड में उम्मीद की गर्माहट: समाजसेवियों ने जरूरतमंद बच्चों के घर पहुँचाया सहारा
भलुअनी, देवरिया में नगर पंचायत वार्ड नं. 8 स्थित प्राथमिक विद्यालय के गोद लिए गए छह जरूरतमंद छात्रों को समाजसेवियों ने उनके घर जाकर ऊनी कपड़े, जैकेट, स्वेटर, जूते, मोज़े, टोपी और ड्रेस वितरित की। प्रधानाचार्य कृष्ण कुमार सिंह के नेतृत्व में हुई इस पहल से बच्चों के चेहरों पर मुस्कान लौटी। समाजसेवियों ने समय पर सहयोग को बच्चों के आत्मविश्वास और शिक्षा के लिए आवश्यक बताया।
- भलुअनी के प्राथमिक विद्यालय के गोद लिए गए छात्रों को ऊनी कपड़े व शैक्षिक ड्रेस वितरित
भलुअनी, देवरिया। ठंड की सिहरन के बीच जब जरूरतमंद हाथों तक सहायता पहुँचती है, तो वह सिर्फ कपड़ों की गर्माहट नहीं देती, बल्कि भरोसे और भविष्य की उम्मीद भी जगाती है। नगर पंचायत के वार्ड संख्या 8 गोविन्द बल्लभ पंत नगर (चकरा भार्गव) स्थित प्राथमिक विद्यालय के गोद लिए गए छह जरूरतमंद छात्रों के लिए रविवार का दिन कुछ ऐसा ही सुकून लेकर आया।
समाजसेवियों ने विद्यालय में अध्ययनरत जरूरतमंद बच्चों-अनुष्का राजभर, आशा प्रजापति (बादीपुर), आकांक्षा प्रजापति, अनुष्का प्रजापति, निधि और आदित्य (डुमरी)-के घर-घर जाकर उन्हें ऊनी कपड़े, जैकेट, स्वेटर, जूते, मोज़े, टोपी और ड्रेस वितरित की। बच्चों के चेहरों पर खिली मुस्कान इस बात का प्रमाण थी कि यह सहयोग उनके लिए कितनी बड़ी राहत लेकर आया है।

इस मानवीय पहल का नेतृत्व विद्यालय के प्रधानाचार्य कृष्ण कुमार सिंह ने किया। उनके साथ समाजसेवी द्वारिका मद्धेशिया, विनोद मद्धेशिया, अखिलेश सिंह, बृजमोहन मद्धेशिया, सुरेश पांडेय और रविंद्र पाठक ने बच्चों को सामग्री वितरित की। समाजसेवियों ने कहा कि प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ने वाले गरीब और जरूरतमंद बच्चों को समय पर सहयोग मिलना अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि यह न सिर्फ उनकी दैनिक जरूरतों को पूरा करता है, बल्कि उन्हें आत्मविश्वास और आगे बढ़ने की प्रेरणा भी देता है।
इस अवसर पर शिक्षक दुर्गेश कान्दू और अभिषेक पांडेय ने विद्यार्थियों से पढ़ाई में मन लगाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा ही वह माध्यम है, जो बच्चों को अभावों से निकालकर उज्ज्वल भविष्य की ओर ले जाती है। जब समाज, शिक्षक और अभिभावक मिलकर बच्चों का हाथ थामते हैं, तब कोई भी कठिनाई उनके रास्ते की रुकावट नहीं बन सकती।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित लोगों ने इस तरह के प्रयासों को निरंतर जारी रखने का संकल्प लिया। यह पहल न केवल जरूरतमंद बच्चों के जीवन में गर्माहट भरने वाली साबित हुई, बल्कि समाज को यह संदेश भी दे गई कि छोटे-छोटे सहयोग से भी बड़ी उम्मीदें और मजबूत भविष्य गढ़ा जा सकता है।
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