सामाजिक संस्था संकल्प ने पद्म विभूषण पं. छन्नू लाल मिश्र को श्रद्धांजलि अर्पित की
वाराणसी की सामाजिक संस्था संकल्प ने पद्म विभूषण पं. छन्नू लाल मिश्र को श्रद्धांजलि अर्पित की। संस्था के सदस्यों ने कहा कि उन्होंने बनारस घराने की शास्त्रीय संगीत परंपरा को विश्व स्तर पर प्रतिष्ठित किया। श्रद्धांजलि सभा में संस्था के पदाधिकारियों ने उनके योगदान को याद करते हुए दो मिनट का मौन रखा।
भारतीय शास्त्रीय संगीत के पुरोधा को श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए संस्था के सदस्यों ने कहा – पं. मिश्र ने बनारस घराने की गौरवशाली परंपरा को विश्व पटल पर स्थापित किया
वाराणसी। प्रख्यात शास्त्रीय गायक, बनारस घराने के गौरव और पद्म विभूषण से सम्मानित पं. छन्नू लाल मिश्र के निधन पर सामाजिक संस्था संकल्प के सदस्यों ने गहरी शोक संवेदना व्यक्त की। पार्वतीपुरी कॉलोनी, गुरुबाग स्थित संस्था के पंजीकृत कार्यालय में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में संस्था के पदाधिकारियों और सदस्यों ने दो मिनट का मौन रखकर उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए संस्था के संरक्षक अनिल कुमार जैन ने कहा कि पं. मिश्र न केवल एक श्रेष्ठ गायक थे, बल्कि भारतीय शास्त्रीय संगीत के जीवंत प्रतीक थे। उन्होंने बनारस घराने की अमूल्य परंपरा को न केवल देश में, बल्कि विश्व स्तर पर प्रतिष्ठित किया। उनकी ठुमरी, दादरा, भजन और होरी गायकी में *काशी की आत्मा की झलक मिलती थी। उनका गायन केवल संगीत नहीं, बल्कि एक साधना थी — जिसमें भक्ति, लोकजीवन और अध्यात्म का अद्भुत संगम था।
उन्होंने कहा कि पं. मिश्र का व्यक्तित्व केवल एक कलाकार का नहीं, बल्कि एक सच्चे साधक का था। उन्होंने संगीत को पूजा और जीवन दोनों माना। अपने रागों के माध्यम से उन्होंने *प्रेम, भक्ति और मानवीय मूल्यों का संदेश समाज तक पहुँचाया।* उनका जाना संगीत जगत के लिए ऐसी अपूरणीय क्षति है, जिसे कभी भरा नहीं जा सकता। संस्था के वरिष्ठ सदस्य आलोक कुमार जैन ने कहा कि पं. छन्नू लाल मिश्र का संकल्प संस्था से आत्मीय संबंध था। जब भी संस्था ने किसी सामाजिक या सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया, पं. मिश्र ने स्नेहपूर्वक सहयोग दिया। वे सदैव संस्था के सहयोग के लिए तत्पर रहते थे और संकल्प परिवार को एक अभिभावक की भांति मार्गदर्शन करते थे। उनका आशीर्वाद संस्था के लिए सदैव प्रेरणास्रोत रहेगा।श्रद्धांजलि सभा के दौरान उपस्थित सभी सदस्यों ने कहा कि पं. मिश्र की संगीत साधना ने न केवल बनारस को अंतरराष्ट्रीय ख्याति दिलाई, बल्कि भारतीय संगीत परंपरा को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया। उन्होंने जिस समर्पण और अनुशासन के साथ कला को साधा, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा।
इस अवसर पर विशेष रूप से गीता जैन, दीपक जैन, मोहित अग्रवाल, राजेश अग्रवाल, शबनम अग्रवाल, हरे कृष्ण अग्रवाल, राजकुमार तिबड़ेवाल, आलोक जैन, श्वेत अग्रवाल, सुभाषिनी जैन, संगीता जैन, नीलिमा जैन, मनीष जैन (कुवैत), मनोज जैन, हेमंत अग्रवाल, निधि अग्रवाल, विनया अग्रवाल और कृति अग्रवाल सहित अनेक गणमान्य सदस्य उपस्थित रहे। सभी ने पं. मिश्र की तस्वीर पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित किए और कहा कि उनकी संगीत साधना और मानवीयता का प्रकाश हमेशा जीवित रहेगा।
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