चुराचांदपुर (मणिपुर): प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को मणिपुर के चुराचांदपुर में करीब सात हजार करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं की आधारशिला रखी। भारी बारिश और विपरीत मौसम के बावजूद बड़ी संख्या में एकत्र हुए जनसमूह को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि मणिपुर की धरती हौसलों और उम्मीदों की भूमि है और अब इसे शांति, समृद्धि और प्रगति का प्रतीक बनाना भारत सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि यह वह दौर है जब दिल्ली से की गई घोषणाओं को यहां पहुंचते-पहुंचते दशकों नहीं लगेंगे, बल्कि मणिपुर भी उसी रफ्तार से विकास करेगा जिस रफ्तार से पूरा देश आगे बढ़ रहा है।
प्रधानमंत्री सड़क मार्ग से कार्यक्रम स्थल पहुंचे। रास्ते भर तिरंगा लहराते लोगों के उत्साह ने उन्हें भावुक कर दिया। उन्होंने कहा कि परमात्मा का आभार है कि आज हेलिकॉप्टर नहीं उड़ा और वह सड़क मार्ग से आए। लोगों का जो प्यार और अपनापन मिला, वह उनके जीवन का अविस्मरणीय क्षण है।
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा कि 2014 के बाद से मणिपुर की सड़क और रेल कनेक्टिविटी पर ऐतिहासिक निवेश हुआ है। अब तक राष्ट्रीय राजमार्गों पर हजारों करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं और नई परियोजनाओं पर काम तेजी से चल रहा है। जीरीबाम–इंफाल रेलवे लाइन जल्द पूरी होकर राजधानी इंफाल को राष्ट्रीय रेल नेटवर्क से जोड़ देगी। नई हवाई सेवाओं और 400 करोड़ की लागत से तैयार इंफाल एयरपोर्ट ने भी राज्य की कनेक्टिविटी को नई ऊंचाई दी है।
उन्होंने कहा कि सरकार की योजनाओं का लाभ अब सीधे मणिपुर के घर-घर तक पहुंच रहा है। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत यहां हजारों पक्के घर बने हैं, एक लाख से अधिक परिवारों को मुफ्त बिजली कनेक्शन मिला है और साढ़े तीन लाख घरों तक नल से जल पहुंच चुका है। आयुष्मान भारत योजना से ढाई लाख से ज्यादा मरीजों को मुफ्त इलाज मिला है, जिससे गरीबों के लगभग साढ़े तीन सौ करोड़ रुपये की बचत हुई है।
प्रधानमंत्री ने शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में हुए बदलावों का भी उल्लेख किया। चुराचांदपुर में मेडिकल कॉलेज तैयार हो चुका है और अब पहाड़ी जिलों में स्वास्थ्य सुविधाएं तेजी से विकसित हो रही हैं। पांच जिलों में आधुनिक हेल्थ सर्विसेज का विस्तार हो रहा है और मणिपुर में अठारह एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय बन रहे हैं। ट्राइबल युवाओं को बेहतर शिक्षा देने और बेटियों को सुविधा पहुंचाने के लिए सरकार वर्किंग वुमेन हॉस्टल भी बना रही है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि मणिपुर की धरती आशा और उम्मीद की भूमि है, लेकिन हिंसा ने इस शानदार क्षेत्र को प्रभावित किया था। वह हिंसा प्रभावित परिवारों से भी मिले और भरोसा दिलाया कि अब शांति की नई सुबह दस्तक दे रही है। उन्होंने कहा कि बेघर हुए परिवारों के लिए सात हजार नए घर बनाए जा रहे हैं, विस्थापितों के लिए पांच सौ करोड़ रुपये का विशेष प्रावधान किया गया है और हाल ही में तीन हजार करोड़ रुपये का विशेष पैकेज भी स्वीकृत हुआ है।
उन्होंने सभी संगठनों और समुदायों से अपील की कि वे शांति के रास्ते पर आगे बढ़ें, संवाद और आपसी सम्मान के साथ अपने बच्चों का भविष्य सुरक्षित करें। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत सरकार मणिपुर के हर व्यक्ति के साथ है और विकास की गंगा हर घर तक पहुंचाने के लिए संकल्पित है। उन्होंने कहा, “हम मणिपुर को पीस, प्रॉस्पेरिटी और प्रोग्रेस का प्रतीक बनाकर रहेंगे।”
मोदी ने आइजोल को दिल्ली से रेल नेटवर्क से जोड़ने वाली राजधानी एक्सप्रेस, दो अन्य ट्रेन को दिखाई हरी झंडी
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को मिजोरम की राजधानी आइजोल को रेल नेटवर्क से जोड़ने वाली बरबई से सायरंग तक बनी नयी रेल लाइन पर ट्रेन परिचालन का शुभारंभ करने के साथ ही सायरंग से दिल्ली जाने वाली राजधानी एक्सप्रेस, सायरंग से कोलकाता और सायरंग से गुवाहाटी जाने वाली ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।श्री मोदी मौसम की खराब के कारण समारोह स्थल तक नहीं पहुंच पाये और उन्होंने हवाई अड्डा से आभासी माध्यम से इन ट्रेनों को हरी झंडी दिखाई।आइजोल से दिल्ली जाने वाली इस राजधानी एक्सप्रेस के शुरू होने के बाद यह पूर्वोत्तर राज्यों की चौथी राजधानी हो गयी है, जो देश की राजधानी से रेल मार्ग से जुड़ गयी।
श्री मोदी ने 05609 बरबई से कोलकाता, 05610 सायरंग से गुवाहाटी ओर सायरंग से आनंद विहार टर्मिनल (दिल्ली) के बीच चलने वाली ट्रेनों को वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।रेलवे बोर्ड के कार्यकारी निदेशक (सुचना एवं प्रचार ) दिलीप कुमार ने बताया कि बरबई से सायरंग के बीच बनी नयी रेल लाइन पर्वतीय क्षेत्र होकर गुजरी है, इस क्षेत्र में रेल लाइन बनाना बड़ा दुष्कर कार्य था, लेकिन रेलवे के अभियंताओं और कर्मचारियों ने कठिन परिश्रम से यह कार्य पूरा कर दिखाया है।उन्होंने बताया कि इस लाइन पर 45 सुरंगे और 55 बड़े तथा 88 छोटे पुल हैं। पांच रोड ओवर ब्रिज और छह रोड अंडर ब्रिज हैं। पुल क्रमांक 144 तो रेलवे पुलों में दूसरा सबसे ऊँचा पुल है। इसकी ऊंचाई दिल्ली की कुतुब मीनार से भी अधिक है, 114 मीटर ऊंचा यह पुल कुतुब मीनार से 42 मीटर ऊंचा है। बरबई से सायरंग के बीच की पूरी रेल लाइन हरे-भरे पहाड़ों और घाटियों के बीच होकर गुजरती है।
श्री कुमार ने बताया कि इस लाइन के बन जाने से मिजोरम की राजधानी आइजोल रेल नेटवर्क से जुड़ जायेगी। इससे यहां के लोगों को देश के अन्य स्थानों पर आने-जाने में बड़ी सहूलियत होगी। देश के अन्य भागों से यहां माल ढुलाई आसान हो जायेगी तथा यहां के उत्पाद दूसरी जगहों पर भी रेल मार्ग से भेजा जा सकेगा। उन्होंने कहा कि इससे रोजगार के अवसर बढ़ने के साथ ही यहां के लोगों की आय भी बढ़ेगी। आवागमन के साधन सुलभ हो जाने से यहां पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। (वार्ता)
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