
आतंकवाद की सुविधानुसार निंदा मानवता के साथ विश्वासघात : मोदी
ब्रिक्स देशों का आतंकवाद पर सख्त रुख, पहलगाम आतंकवादी हमले की कड़ी निंदा की.विकासशील देशों को दोहरे मापदंडों का दंश झेलना पड़ा है, वैश्विक संस्थानों में मिले उचित जगह-मोदी.
नयी दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यहां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के मंच से आतंकवाद को ‘मानवता के लिए सबसे गंभीर चुनौती’ बताते हुए रविवार को कहा कि आतंकवाद की निंदा केवल सुविधा के हिसाब से करना मानवता के साथ विश्वासघात है।श्री मोदी ने पहलगाम आतंकवादी हमले की निंदा करने और भारत के साथ संवेदना तथा समर्थन जताने वाले देशों का आभार जताया। श्री मोदी ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के पहले दिन यहां ‘शांति और सुरक्षा पर ब्रिक्स सत्र के दौरान’ भारत की ओर वक्तव्य में कहा, ‘आतंकवाद की निंदा हमारा ‘सिद्धांत’ होना चाहिए, केवल ‘सुविधा’ नहीं। अगर पहले यह देखेंगे कि हमला किस देश में हुआ, किसके विरुद्ध हुआ, तो यह मानवता के खिलाफ विश्वासघात होगा।
‘प्रधानमंत्री ने कहा , ‘मित्रों आतंकवाद, आज मानवता के लिए सबसे गंभीर चुनौती बनकर खड़ा है। हाल ही में भारत ने एक अमानवीय और कायरतापूर्ण आतंकी हमले का सामना किया। 22 अप्रैल को पहलगाम में हुआ आतंकी हमला, भारत की आत्मा, अस्मिता और गरिमा पर सीधा प्रहार था।’उन्होेंने कहा कि पहलगाम आतंकवादी हमला केवल भारत पर नहीं, पूरी मानवता पर आघात था।श्री मोदी ने कहा, ‘इस दुख की घड़ी में, जो मित्र देश हमारे साथ खड़े रहे, जिन्होंने समर्थन और संवेदना व्यक्त की, मैं उनका हार्दिक आभार व्यक्त करता हूँ।’गौरतलब है कि पाकिस्तान की शह पर काम करने वाले आतंकवादियों ने गत 22 अप्रैल को 26 लोगों की नृशंस हत्या कर दी थी जिनमें से एक नेपाली नागरिक था।
प्रधानमंत्री कार्यालय की एक विज्ञप्ति के अनुसार श्री मोदी ने अपने वक्तव्य में कहा कि ‘वैश्विक शांति और सुरक्षा केवल एक आदर्श नहीं है, ये हम सभी के साझा हितों और भविष्य की बुनियाद है।’ उन्होंने कहा कि एक शांतिपूर्ण और सुरक्षित वातावरण में ही मानवता का विकास संभव है।श्री मोदी ने कहा, ‘इस उद्देश्य को पूरा करने में ब्रिक्स की अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका है। हमारी साझा चुनौतियों का सामना करने के लिए हमें एकजुट होकर, सामूहिक प्रयास करने होंगे। मिलकर आगे बढ़ना होगा।’उन्होंने कहा कि आतंकवादियों के खिलाफ प्रतिबंध लगाने पर कोई संकोच नहीं होना चाहिए। आतंकवाद के पीड़ितों और समर्थकों को एक ही तराजू में नहीं तौला जाना चाहिए। प्रधानमंत्री ने कहा कि निजी या राजनीतिक स्वार्थ के लिए, आतंकवाद को मूक सम्मति देना, आतंक या आतंकियों का साथ देना, किसी भी अवस्था में स्वीकार्य नहीं होना चाहिए।
श्री मोदी ने कहा, ‘आतंकवाद को लेकर कथनी और करनी में कोई अंतर नहीं होना चाहिए। अगर हम यह नहीं कर सकते तो यह प्रश्न स्वाभाविक है कि क्या आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई को लेकर हम गंभीर हैं भी या नहीं।’प्रधानमंत्री ने पश्चिम एशिया से लेकर यूरोप तक फैले तनाव का भी जिक्र किया। उन्होंने गाजा में वर्तमान मानवीय स्थिति को बड़ी चिंता का कारण बताया। इसी संदर्भ में श्री मोदी ने कहा, ‘भारत का अडिग विश्वास है कि परिस्थितियाँ चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, मानवता की भलाई के लिए शांति का पथ ही एकमात्र विकल्प है।’श्री मोदी ने कहा कि भारत भगवान बुद्ध और महात्मा गांधी की भूमि है और हमारे लिए युद्ध और हिंसा का कोई स्थान नहीं है। उन्होंने कहा कि भारत हर उस प्रयास का समर्थन करता है जो विश्व को विभाजन और संघर्ष से बाहर निकालकर, संवाद, सहयोग और समन्वय की ओर अग्रसर करे, एकजुटता और विश्वास बढ़ाए।श्री मोदी ने कहा कि भारत इस दिशा में सभी मित्र देशों के साथ सहयोग और साझेदारी के लिए प्रतिबद्ध है।प्रधानमंत्री ने सम्मेलन में उपस्थित नेताओं को अगले वर्ष भारत की अध्यक्षता में होने जा रही ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए भारत आने का न्योता भी दिया।
मोदी ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में क्यूबा, मलेशिया, वियतनाम, अन्य नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकें कीं
प्रधानमंत्री नरेेन्द्र मोदी ने ब्राजील में 17वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान क्यूबा, मलेशिया और वियतनाम के नेताओं के साथ अलग-अलग ‘अच्छी बैठकें’ कीं उनसे विभिन्न क्षेत्रों में भारत के सहयोग पर चर्चा की।श्री मोदी ने इन बैठकों की जानकारी सोशल मीडिया पर साझा की। प्रधानमंत्री ने क्यूबा के राष्ट्रपति मिगुएल डियाज-कैनेल बरमूडेज़ से मुलाकात के बाद कहा कि मुलाकात अच्छी रही। उन्होंने कहा, “इस बातचीत में हमने कई विषयों पर चर्चा की। आने वाले समय में हमारे देशों के बीच आर्थिक संबंधों में बहुत वृद्धि की संभावना है। प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य सेवा और ऊर्जा जैसे क्षेत्र भी उतने ही आशाजनक हैं।”प्रधानमंत्री ने इससे पहले 2023 में जोहान्सबर्ग में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में राष्ट्रपति डियाज-कैनेल से मुलाकात की थी, जहाँ क्यूबा विशेष आमंत्रित था। दोनों नेताओं ने आर्थिक सहयोग, विकास साझेदारी, फिनटेक, क्षमता निर्माण, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, आपदा प्रबंधन और स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा की। डिजिटल क्षेत्र में भारत की विशेषज्ञता को स्वीकार करते हुए, राष्ट्रपति डियाज-कैनेल ने भारत के सार्वजनिक बुनियादी ढांचे और यूपीआई में रुचि व्यक्त की।
श्री मोदी ने कहा कि क्यूबा में आयुर्वेद की बढ़ती स्वीकार्यता निश्चित रूप से एक बड़ी बात है। दोनों नेताओं ने आपदा प्रबंधन तंत्र को मजबूत करने के तरीकों पर भी चर्चा की। प्रधानमंत्री ने क्यूबा द्वारा आयुर्वेद को मान्यता दिए जाने की सराहना की और क्यूबा की सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली में आयुर्वेद को एकीकृत करने के लिए समर्थन दिया। प्रधानमंत्री ने क्यूबा द्वारा भारतीय फार्माकोपिया को मान्यता दिए जाने का प्रस्ताव रखा, जिससे भारतीय जेनेरिक दवाओं तक पहुंच सुनिश्चित होगी।दोनों नेताओं ने स्वास्थ्य, महामारी और जलवायु परिवर्तन के क्षेत्रों सहित वैश्विक दक्षिण के लिए चिंता के मुद्दों पर काम करने पर सहमति व्यक्त की। उन्होंने बहुपक्षीय क्षेत्र में दोनों देशों के बीच सहयोग की सराहना की।प्रधानमंत्री ने मलेशिया के अपने समकक्ष श्री अनवर इब्राहिम से मुलाकात के बाद कहा कि मलेशिया भारत के लिए महत्वपूर्ण है। भारत की “महासागर” के विचार और ‘एक्ट ईस्ट ’ (पूरब के देशों के साथ मिल कर काम करने) की नीति में मलेशिया का महत्वपूर्ण स्थान है।
श्री मोदी ने कहा कि इस मुलाकात में उन्होंने प्रधानमंत्री इब्राहिम से उनकी भारत यात्रा के बाद से हुई प्रगति सहित अपने द्विपक्षीय संबंधों में शामिल किए गए क्षेत्रों में सहयोग की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी), नवीकरणीय ऊर्जा और बुनियादी ढांचे जैसे भविष्य के क्षेत्र ऐसे हैं जहां द्विपक्षीय संबंध मजबूती से बढ़ रहे हैं।दोनों नेताओं ने द्विपक्षी निवेश और व्यापार संबंधों के विस्तार पर भी चर्चा की।वियतनाम के प्रधानमंत्री फाम मिन्ह चीन्ह से अच्छी बातचीत हुई।
ब्रिक्स देशों का आतंकवाद पर सख्त रुख, पहलगाम आतंकवादी हमले की कड़ी निंदा की
ब्रिक्स देशों ने पहलगाम आतंकवादी हमले की कड़ी निंदा करते हुए सभी तरह के आतंकवाद से सख्ती से निपटने की प्रतिबद्धता जतायी है और संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित आतंकवादियों तथा आतंकवादी गुटों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का आह्वान किया है।ब्रिक्स देशों के 17 वें शिखर सम्मेलन में रविवार देर रात यहां जारी संयुक्त घोषणा पत्र में सभी सदस्य देशों ने आतंकवादी कृत्यों की जोरदार शब्दों में कड़ी निंदा की और वैश्विक संस्थाओंं को समय की जरूरत के अनुसार अधिक समावेशी बनाने पर जोर देते हुए सतत शासन के लिए ग्लोबल साउथ सहयोग को मजबूत करने का आह्वान किया।घोषणा पत्र में सदस्य देशों की ओर से कहा गया है, “ हम आपसी सम्मान और समझ, संप्रभु समानता, एकजुटता, लोकतंत्र, खुलेपन, समावेशिता, सहयोग और आम सहमति की ब्रिक्स भावना के प्रति अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि करते हैं। हम राजनीतिक और सुरक्षा, आर्थिक और वित्तीय, सांस्कृतिक और लोगों के बीच सहयोग के तीन स्तंभों के तहत विस्तारित ब्रिक्स में सहयोग को मजबूत करने और शांति, अधिक प्रतिनिधित्व, निष्पक्ष अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था, एक पुनर्जीवित और सुधार पर आधारित बहुपक्षीय प्रणाली, सतत विकास और समावेशी विकास को बढ़ावा देने के माध्यम से लोगों के लाभ के लिए रणनीतिक साझेदारी को बढ़ाने के लिए खुद को प्रतिबद्ध करते हैं।
”उन्होंने वर्ष 2026 में भारत को ब्रिक्स की अध्यक्षता सौंपे जाने और भारत में 18 वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के आयोजन के लिए पूर्ण समर्थन का आश्वासन भी दिया।सदस्य देशों ने आतंकवाद को कतई न बर्दाश्त करने और आतंकवाद से निपटने में दोहरे मानदंडों को खारिज करते हुए कहा दोषियों को न्याय के कठघरे में लाने के लिए मिलकर काम करने की वचनबद्धता प्रकट की।उन्होंने पहलगाम आतंकवादी हमले की निंदा करते हुए कहा , “ हम आतंकवाद के किसी भी कृत्य की कड़ी निंदा करते हैं, चाहे वह किसी भी उद्देश्य से किया गया हो, जब भी, जहाँ भी और किसी के द्वारा भी किया गया हो। हम 22 अप्रैल 2025 को जम्मू और कश्मीर में हुए आतंकवादी हमले की कड़ी निंदा करते हैं, जिसमें 26 लोग मारे गए और कई अन्य घायल हुए। हम आतंकवादियों की सीमा पार आवाजाही, आतंकवाद के वित्तपोषण और सुरक्षित पनाहगाहों सहित सभी रूपों और अभिव्यक्तियों में आतंकवाद का मुकाबला करने की अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि करते हैं।
”ब्रिक्स देशों ने आतंकवादी गतिविधियों का समर्थन करने वाले देशों को कड़ा संदेश देते हुए कहा , “ हम दोहराते हैं कि आतंकवाद को किसी भी धर्म, राष्ट्रीयता, सभ्यता या जातीय समूह से नहीं जोड़ा जाना चाहिए और आतंकवादी गतिविधियों और उनके समर्थन में शामिल सभी लोगों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए और प्रासंगिक राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय कानून के अनुसार न्याय के कटघरे में लाया जाना चाहिए। हम आतंकवाद के लिए शून्य सहिष्णुता सुनिश्चित करने और आतंकवाद का मुकाबला करने में दोहरे मानदंडों को अस्वीकार करने का आग्रह करते हैं।”उन्होंने सभी देशों से आतंकवाद का मुकाबला करने के लिए अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करने तथा अंतर्राष्ट्रीय कानूनों के अनुपालन में मदद करने का भी आह्वान किया।
उन्होंने कहा, “ हम आतंकवाद से निपटने में देशों की प्राथमिक जिम्मेदारी पर जोर देते हैं और आतंकवादी खतरों को रोकने और उनका मुकाबला करने के वैश्विक प्रयासों को अंतर्राष्ट्रीय कानून के तहत अपने दायित्वों का पूरी तरह से पालन करना चाहिए, जिसमें संयुक्त राष्ट्र का चार्टर, विशेष रूप से इसके उद्देश्य और सिद्धांत, और प्रासंगिक अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन और प्रोटोकॉल, विशेष रूप से अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार कानून, अंतर्राष्ट्रीय शरणार्थी कानून और अंतर्राष्ट्रीय मानवीय कानून, जैसा भी लागू हो। हम ब्रिक्स आतंकवाद विरोधी कार्य समूह और ब्रिक्स आतंकवाद विरोधी रणनीति, ब्रिक्स आतंकवाद विरोधी कार्य योजना और स्थिति पत्र पर आधारित इसके पांच उपसमूहों की गतिविधियों का स्वागत करते हैं।”सदस्य देशों ने आतंकवाद रोधी सहयोग को मजबूत करने पर जोर देते हुए कहा , “ हम आतंकवाद विरोधी सहयोग को और गहरा करने की आशा करते हैं। हम संयुक्त राष्ट्र के ढांचे में अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद पर व्यापक समझौते को शीघ्र अंतिम रूप देने और अपनाने का आह्वान करते हैं। हम संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित सभी आतंकवादियों और आतंकवादी संस्थाओं के खिलाफ ठोस कार्रवाई का आह्वान करते हैं।”
ब्रिक्स देशों ने जलवायु वित्त पर रूपरेखा घोषणापत्र और कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर ब्रिक्स नेताओं के वक्तव्य को अपनाने के महत्व का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि वे सामाजिक रूप से निर्धारित रोगों के उन्मूलन के लिए ब्रिक्स साझेदारी के शुभारंभ का समर्थन करते हैं। यह पहल वैश्विक मुद्दों के लिए समावेशी और टिकाऊ समाधान को बढ़ावा देने के संयुक्त प्रयासों को दर्शाती हैं।सदस्य देशों ने ब्रिक्स सदस्य के रूप में इंडोनेशिया का स्वागत किया और कहा कि वे बेलारूस , बोलिविया, कजाकिस्तान, क्यूबा , नाइजीरिया , मलेशिया, थाईलैंड , वियतनाम , युगांडा और उज्बेकिस्तान का ब्रिक्स भागीदार देशों के रूप में स्वागत करते हैं।ब्रिक्स देशों के घोषणा पत्र में बहुपक्षवाद को मजबूत करने और वैश्विक शासन में सुधार करने पर जोर देते हुए कहा गया ,“ हम व्यापक परामर्श, संयुक्त योगदान और साझा लाभों की भावना में एक अधिक न्यायसंगत, समतापूर्ण, चुस्त, प्रभावी, कुशल, उत्तरदायी, प्रतिनिधित्व, वैध, लोकतांत्रिक , जवाबदेह अंतर्राष्ट्रीय और बहुपक्षीय प्रणाली को बढ़ावा देकर वैश्विक शासन में सुधार के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हैं। इस संबंध में हम भविष्य के शिखर सम्मेलन में भविष्य की संधि को अपनाने पर ध्यान देते हैं, जिसमें वैश्विक डिजिटल कॉम्पैक्ट और भविष्य की पीढ़ियों की घोषणा शामिल हैं।
”उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद, विश्व व्यापार संगठन तथा अन्य वैश्विक संस्थानों में विकासशील देशों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं दिये जाने का उल्लेख करते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि इन देशों को इन संस्थाओं में उचित प्रतिनिधित्व दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा , “ समकालीन वास्तविकताओं को बेहतर ढंग से प्रतिबिंबित करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय संबंधों की वर्तमान व्यवस्था पर हम बहुपक्षवाद के प्रति अपनी प्रतिबद्धता और संयुक्त राष्ट्र के चार्टर में निहित उद्देश्यों और सिद्धांतों सहित अंतर्राष्ट्रीय कानून को उनकी संपूर्णता और अंतर्संबंध में इसके अपरिहार्य आधार के रूप में बनाए रखने और अंतर्राष्ट्रीय प्रणाली में संयुक्त राष्ट्र की केंद्रीय भूमिका की पुष्टि करते हैं।घोषणा पत्र में वैश्विक संस्थाओं में महिलाओं की भूमिका और भागीदारी को महत्व देते हुए कहा गया है , “ हम समयबद्ध तरीके से संयुक्त राष्ट्र सचिवालय और अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठनों में समान भौगोलिक प्रतिनिधित्व का आह्वान करते हैं। इन संगठनों में नेतृत्व और जिम्मेदारियों के सभी स्तरों पर महिलाओं की भूमिका और हिस्सेदारी बढ़ाने का भी हम आह्वान करते हैं। हम संयुक्त राष्ट्र के कार्यकारी प्रमुखों और वरिष्ठ पदों के चयन और नियुक्ति प्रक्रिया को पारदर्शिता और समावेशिता के सिद्धांतों द्वारा निर्देशित करने और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 101 के सभी प्रावधानों के अनुसार किए जाने की आवश्यकता पर बल देते हैं, जिसमें यथासंभव व्यापक भौगोलिक आधार पर कर्मचारियों की भर्ती और महिलाओं की बढ़ती भागीदारी पर उचित ध्यान दिया जाता है।
उन्होंने सुरक्षा परिषद सहित संयुक्त राष्ट्र में व्यापक सुधार के लिए समर्थन दोहराते कहा कि इन्हें और अधिक लोकतांत्रिक, प्रतिनिधित्वपूर्ण, प्रभावी और कुशल बनाने के लिए इनमें विकासशील देशों का प्रतिनिधित्व बढ़ाने पर भी जोर दिया जिससे कि ये संस्था मौजूदा वैश्विक चुनौतियों का समाधान कर सके।संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार को ग्लोबल साउथ की आवाज करार देते हुए उन्होंने वर्ष 2022 बीजिंग और 2023 जोहान्सबर्ग- दो में नेताओं की घोषणाओं को याद किया। इन घोषणाओं में संयुक्त राष्ट्र में सुरक्षा परिषद सहित एक बड़ी भूमिका निभाने के लिए ब्राजील और भारत की आकांक्षाओं के प्रति समर्थन व्यक्त किया गया था।सदस्य देशों ने कहा कि वे जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए बहुपक्षवाद को बनाए रखने के लिए अपनी प्रतिबद्धता पर बल देते है।
उन्होंने कहा, “ हम पेरिस समझौते के उद्देश्य और लक्ष्यों तथा यूएनएफसीसीसी के उद्देश्यों की प्राप्ति में एकजुट रहने का संकल्प लेते हैं और सभी देशों से यूएनएफसीसीसी और इसके पेरिस समझौते के पक्षकारों के रूप में अपनी मौजूदा प्रतिबद्धता को बनाए रखने और जलवायु परिवर्तन से निपटने के अपने प्रयासों को बनाए रखने और बढ़ाने का आह्वान करते हैं। हम यूएनएफसीसीसी के उद्देश्य की प्राप्ति में जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए पेरिस समझौते के पूर्ण और प्रभावी कार्यान्वयन को मजबूत करने की अपनी दृढ़ प्रतिबद्धता की पुष्टि करते हैं, जिसमें विभिन्न राष्ट्रीय परिस्थितियों के मद्देनजर समानता और साझा लेकिन विभेदित जिम्मेदारियों और संबंधित क्षमताओं के सिद्धांत को प्रतिबिंबित करते हुए विकासशील देशों को शमन, अनुकूलन और कार्यान्वयन के साधनों के प्रावधान से संबंधित प्रावधान शामिल हैं।”उन्होंने कोप-30 के समझौतों तथा उद्देश्यों के प्रति वचनबद्धता प्रकट करते हुए 2028 में इसकी मेजबानी के लिए भारत की उम्मीदवारी का स्वागत किया।
विकासशील देशों को दोहरे मापदंडों का दंश झेलना पड़ा है, वैश्विक संस्थानों में मिले उचित जगह-मोदी
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने विकासशील देशों को दोहरे मापदंडों का शिकार बताते हुए कहा है कि इन देशों के हितों को कभी प्राथमिकता नहीं दी गयी और उन्हें वैश्विक संस्थानों में उचित प्रतिनिधित्व नहीं दिये जाने से इन संस्थानों के पास 21 वीं सदी की चुनौतियों का समाधान नहीं है।श्री मोदी ने रविवार शाम 17 वें ब्रिक्स सम्मेलन में वैश्विक शासन से संबंधित सत्र में जोर देकर कहा कि अब समय आ गया है कि विकासशील देशों को वैश्विक संस्थानों में पर्याप्त प्रतिनिधित्व दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत ने हमेशा अपने हितों से ऊपर उठकर मानवता के हित में काम करना अपना दायित्व समझा है। उन्होंंने कहा कि भारत ब्रिक्स देशों के साथ मिलकर सभी विषयों पर रचनात्मक योगदान देने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है।विकासशील देशों के साथ होते आये भेदभाव का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इन देशों को अक्सर दोहरे मापदंडोंं का दंश झेलना पड़ा है।
उन्होंने कहा ,’ग्लोबल साउथ अक्सर दोहरे मापदंडों का शिकार रहा है। चाहे विकास की बात हो, संसाधनों का वितरण हो, या सुरक्षा से जुड़े विषय हों, ग्लोबल साउथ के हितों को प्राथमिकता नहीं मिली है। जलवायु वित्त, सतत विकास और प्रौद्योगिकी तक पहुंच जैसे विषयों पर ग्लोबल साउथ को अक्सर प्रतीकात्मक हिस्सेदारी के अलावा कुछ नहीं मिला।’वैश्विक संस्थानों में विकासशील देशोंं को उचित प्रतिनिधित्व नहीं मिलने का मुद्दा उठाते हुए उन्होंने कहा कि इन देशों को कभी निर्णय लेने वाली मेजों पर बैठने का अवसर नहीं दिया गया। बिना विकासशील देशों के इन संस्थानों का कोई औचित्य नहीं है। इनका वजूद बिना सिम के मोबाइल फोन जैसा है।उन्होंने कहा , ’20 वीं सदी में बने ग्लोबल संस्थानों में मानवता के दो-तिहाई हिस्से को पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिला है। जिन देशों का, आज की वैश्विक अर्थव्यवस्था में बड़ा योगदान है, उन्हें निर्णय लेने वाली टेबल पर बिठाया नहीं गया है। यह केवल प्रतिनिधित्व का प्रश्न नहीं है, बल्कि विश्वसनीयता और प्रभावशाीली होने का भी प्रश्न है। बिना ग्लोबल साथ के ये संस्थाएँ वैसी ही लगती हैं जैसे मोबाइल में सिम तो है, पर नेटवर्क नहीं। यह संस्थान, 21 वीं सेंचुरी की चुनौतियों से निपटने में असमर्थ हैं।
विश्व के अलग-अलग हिस्सों में चल रहे संघर्ष हों, महामारी हों, आर्थिक संकट हों, या साइबर और स्पेस में नयी उभरती चुनौतियाँ, इन संस्थानों के पास कोई समाधान नहीं है।’बदलती परिस्थितियों में बहुध्रुवीय और समावेशी विश्व व्यवस्था की जरूरत पर देते हुए उन्होंने वैश्विक संस्थानों मेंं सुधारोंं तथा विकासशील देशों की चुनौतियों को प्राथमिकता दिये जाने की जरूरत पर बल दिया। उन्होंंने कहा , ‘आज विश्व को नए बहुध्रुवीय और समावेशी विश्व व्यवस्था की जरूरत है। इसकी शुरुआत वैश्विक संस्थानों में व्यापक सुधारों से करनी होगी। सुधार केवल सांकेतिक नहीं होने चाहिए, बल्कि इनका वास्तविक असर भी दिखना चाहिए। शासकीय ढांचे , मताधिकार और नेतृत्व में बदलाव आना चाहिए। ग्लोबल साउथ के देशों की चुनौतियों को नीति निर्माण में प्राथमिकता देनी चाहिए।’ब्रिक्स को समय के अनुसार बदलने की क्षमता रखने वाला संगठन बताते हुए उन्होंने कहा , ‘ब्रिक्स का विस्तार, नए मित्रों का जुड़ना, इस बात का प्रमाण है कि ब्रिक्स एक ऐसा संगठन है, जो समय के अनुसार खुद को बदलने की क्षमता रखता है। अब यही इच्छाशक्ति हमें संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद, विश्व व्यापार संगठन और बहुपक्षीय विकास बैंक संस्थानों में सुधार के लिए दिखानी होगी।
ए आई के युग में, जहां हर हफ्ते टेक्नॉलजी उन्नत होती है,ऐसे में ग्लोबल इन्स्टिट्युशन का अस्सी वर्ष में एक बार भी अपडेट न होना स्वीकार्य नहीं है। इक्कीसवीं सदी की सोफ्टवेयर को बीसवीं सदी के टाइपराईटर से नहीं चलाया जा सकता।’श्री मोदी ने उम्मीद जतायी कि ब्राजील की अध्यक्षता में ब्रिक्स देशों के सहयोग को नयी गति और ऊर्जा मिलेगी। उन्होंने इंडोनेशिया के ब्रिक्स परिवार में शामिल होने के लिए वहां के राष्ट्रपति को बधाई भी दी। प्रधानमंत्री ने कहा ,’17 वीं ब्रिक्स समिट के शानदार आयोजन के लिए मैं राष्ट्रपति लूला का हार्दिक आभार व्यक्त करता हूँ। ब्राजील की अध्यक्षता में ब्रिक्स के अंतर्गत हमारे सहयोग को नई गति और उर्जा मिली है। जो नई ऊर्जा मिली है — वो डबल एस्प्रेसो है, इसके लिए मैं राष्ट्रपति लूला की दूरदर्शिता और उनकी अटूट प्रतिबद्धता की सराहना करता हूँ। इंडोनेशिया के ब्रिक्स परिवार से जुड़ने पर मैं अपने मित्र, राष्ट्रपति प्रबोवो को भारत की ओर से बहुत-बहुत बधाई और शुभकामनाएं देता हूँ।'(वार्ता)
चिकित्सा, समाजसेवा और उत्कृष्ट योगदान के लिए चिकित्सकों व संस्थाओं को किया गया सम्मानित



