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सारनाथ की पौराणिक व धार्मिक पहचान है सारंगनाथ मंदिर

सारंगनाथ आने वाले शिव भक्तों को सुविधा व स्थानीय लोगों को रोजगार मुहैया कराने को तत्पर प्रदेश सरकार

  • दुनिया में बौद्ध धर्म स्थली के रूप से जाना जाता है सारनाथ
  • एक ही अरघे में विराजमान हैं भगवान शिव और उनके साले सारंगनाथ
  • मंदिर के आसपास सुविधाओं का विकास करने जा रही है योगी सरकार

वाराणसी : सारनाथ में सारंगनाथ मंदिर की पौराणिक व धार्मिक पहचान है। इस मंदिर में भगवान महादेव व उनके साले सारंगनाथ एक ही अरघे में विराजमान हैं। इस कारण मंदिर की विशेष धार्मिक मान्यता है। योगी सरकार मंदिर प्रांगण और आसपास सुविधाओं का विकास करने जा रही है, जिससे सारंगनाथ मंदिर में आने वाले शिव भक्तों को सुविधा व स्थानीय लोगों को रोजगार मिल सके। सर्वविदित है कि सारनाथ को दुनिया में प्रमुख बौद्ध धर्म स्थली के रूप से जाना जाता है।

आसपास के क्षेत्रों का कायाकल्प करने जा रही योगी सरकार

योगी सरकार धार्मिक आस्था की मान्यता वाले सारंगनाथ मंदिर प्रांगण व आसपास के क्षेत्र का कायाकल्प करने जा रही है। यूपीपीसीएल के प्रोजेक्ट मैनेजर शैलेश सिंह ने बताया कि सारंगनाथ मंदिर और तालाब के पास पर्यटकों के सुविधा के लिए गेट, ड्रिंकिंग वाटर किसॉक, बेंच, डस्टबिन, पार्किंग, यात्रियों के लिए शेड, शौचालय, पाथवे, लाइटिंग, रैंप आदि को व्यवस्थित और विकसित किया जाएगा। प्रोजेक्ट मैनेजर ने बताया कि 37488 स्क्वायर फिट में 343.5 लाख से विकास कार्य होना है। इसके लिए शासन से प्रस्ताव पास हो चुका है। तकनीकी स्वीकृति के लिए जल्द ही प्रस्ताव भेजा जाएगा।

एक ही अरघे में विराजमान हैं बाबा भोलेनाथ व सारंगनाथ

काशी के सारनाथ स्थित सारंगनाथ मंदिर ऐसा अनोखा मंदिर है, जहां एक ही अरघे में दो शिवलिंग हैं। लोगों की मान्यता है कि बाबा पूरे सावन महीने में माता पार्वती के साथ यहां विश्राम करने आते हैं। सारंगनाथ मंदिर में हर दिन बड़ी संख्या में शिव भक्त आते हैं। शिव रात्रि में यहाँ शिव भक्तों की उमड़ती आस्था और यहाँ लगने वाले मेले में श्रद्धालु बहुत दूर-दूर से आते है।

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