Varanasi

वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता डॉ संदीप पाण्डेय को पद यात्रा करने से पुलिस द्वारा रोका गया

आजमगढ़ में प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट के भूमिग्रहण के खिलाफ चल रहे आंदोलन के समर्थन में प्रस्तावित थी पदयात्रा .लोकतंत्र में विरोध करने करने का संवैधानिक अधिकार है, यात्रा करने से रोकना इन अधिकारों का हनन है: डॉ संदीप पाण्डेय .

वाराणसी : किसान पद यात्रा में शामिल होने आ रहे मैग्सेसे सम्मान से समानित वरिष्ठ समाजसेवी डॉ संदीप पाण्डेय को साथियों सहित शनिवार की सुबह वाराणसी कैंट स्टेशन पर पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। ये पदयात्रा डॉ अम्बेडकर प्रतिमा कचहरी से प्रारंभ होकर आजमगढ़ में प्रस्तावित एयरपोर्ट तक जाने वाली थी.आजमगढ़ में प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट के भूमिग्रहण के खिलाफ चल रहे आंदोलन के समर्थन में पदयात्रा का आयोजन विभिन्न जन संगठनों द्वारा किया गया था । संदीप पाण्डेय और उनके साथियों को वाराणसी पुलिस द्वारा दोपहर 12:30 तक पुलिस लाइन गेस्ट हाउस में निरुद्ध करने के बाद पुलिस अभिरक्षा में वापस लखनऊ भेज दिया गया। उनके समर्थन में सुबह 6:00 बजे से 12:00 बजे तक पुलिस लाईन में वाराणसी के तमाम सामाजिक और राजनीतिक कार्यकर्ताओं का जमावड़ा लगा रहा है।

पत्रकारों को संबोधित करते हुए डॉ संदीप पाण्डेय ने कहा कि आजमगढ़ पूर्वी उत्तर प्रदेश का एक जीवंत जिला है। यहां के लोगों की उद्यमिता के गुण के कारण इसे उत्तर प्रदेश का केरल भी कहा जाता है। यहां से पूरे देश में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी लोग काम करने के लिए जाते हैं। आजमगढ़ से मजदूर के रूप कुछ पीढ़ी पहले त्रिनीदाद व टोबागो गए एक परिवार के वंशज बासुदेव पाण्डेय वहां के प्रधान मंत्री भी बने। पूर्व में आजमगढ़ से पलायन करने वाले अधिकांश लोग हवाई जहाज से बाहर नहीं गए। उन्होंने आगे कहा कि अब आजमगढ़ में मन्दुरी हवाई पट्टी का विस्तार कर एक अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा बनाने का प्रस्ताव है। इसमें 8 गांवों – हसनपुर, कादीपुर हरिकेश, जमुआ हरिराम, जमुआ जोलहा, गदनपुर छिन्दन पट्टी, मन्दुरी जिगिना करमपुर व जेहरा पिपरी – की 670 एकड़ जमीन अधिग्रहित की जाएगी व करीब दस हजार लोग प्रभावित होंगे। यहां की जमीन बहुत उपजाऊ है।

लोग यह पूछ रहे हैं कि आजमगढ़ के आस-पास वाराणसी, कुशीनगर, गोरखपुर, अयोध्या और अब तो लखनऊ भी, क्योंकि पूर्वांचल एक्सप्रेसवे बन जाने से दो-ढाई घंटे में लखनऊ पहुंचा जा सकता है, आखिर यहां हवाई अड्डे की क्या जरूरत है और दूसरा बनाना भी है तो उपजाऊ जमीन पर क्यों बनाया जा रहा, कोई बंजर भूमि क्यों नहीं चुनी गई? फिर कुछ लोगों का यह भी कहना है कि दूसरी जगहों पर सरकार हवाई अड्डों को अडाणी को सौंप चुकी है, फिर वह यहां क्यों हवाई अड्डा बनाना चाह रही है? क्या यह हवाई अड्डा भी बना कर अडाणी को ही सौंपा जाना है? यदि ऐसा है तो अडाणी को ही हवाई अड्डा बनाना चाहिए। सरकार क्या किसानों की जमीन लेकर उन्हें रियायती शर्तों पर एक पूंजीपति के हवाले करना चाह रही है?

उन्होंने आगे बताया कि हमें समझना चाहिए कि दुनिया जलवायु परिवर्तन के दबाव में किस तरह बदल रही है। एक तरफ विकसित देश के लोग अब अपनी जीवन शैली के प्रति ज्यादा सजग हो रहे हैं और कोशिश कर रहे हैं कि कार्बन उत्सर्जन में उनका योगदान कम हो जाए तो भारत व चीन अभी भी उसी विकास का आंख मूंद कर अनुसरण कर रहे हैं जो ज्यादा कार्बन उत्सर्जन के लिए जिम्मेदार होगा। हम एक तरीके से अपने पैर पर कुल्हाड़ी मार रहे हैं और आने वाली पीढ़ी के लिए जिंदगी और कठिन बना रहे हैं। हम तो प्रदूषण कर के चले जाएंगे लेकिन हमारे किए का परिणाम आने वाली पीढ़ी को झेलना पड़ेगा।पदयात्रा को रोकने की कार्यवाही पर रोष व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में आम नागरिक को विरोध दर्ज कराने का अधिकार है सरकार पुलिस को आगे करके हमसे वह लोकतांत्रिक अधिकार छीन रही है ।

इस अवसर पर वीरेंद्र यादव, राजीव यादव, मनीष शर्मा, जागृति राही, नंदलाल मास्टर, महेश कुमार, उर्मिला , कमर जहाँ, फादर आनंद, संजीव सिंह, सुजीत यादव, लक्कड़ पहलवान, वल्लभाचार्य पाण्डेय, राम जनम. लक्ष्मण प्रसाद, अमित मौर्या, सौरभ सिंह, रंजू सिंह, डॉ इंदु पांडेय, धनंजय, सतीश सिंह, डॉ अनूप श्रमिक, अपर्णा, प्रेम सोनकर आदि विशेष रूप से उपस्थित रहे ।

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