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देवी महालक्ष्मी और गणेश देव का पूजन पर्व सोमवार को

धन की अधिष्ठात्री देवी महालक्ष्मी और शुभ के देवता गणेश का पूजन पर्व दीपावली सोमवार को मनाई जाएगी। यह पर्व कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की अमावस्या को मनाया जाता है। ऐसा माना जाता है कि भगवान श्रीराम के 14वर्ष के वनवास काल राक्षस राज रावण का वध कर अयोध्या वापस पर आने पर प्रजा ने खुश्यिां मनाई थीं और अपने घर मे दीपों की अवली सजाई थी। तभी से इस दिन अपने घरों को साफ-सुथरा कर दीपोत्सव करने का विधान है।

एक यह भी मान्यता है कि इस रात्रि में देवी महालक्ष्मी रात्रि में विचरण करती है, जहां स्वच्छता होती वहां देवी निवास करती है। इसलिए भी लोग अपने घरों को सजाकर देवी का स्वागत करते हैं। दीपावली पूजन का सर्वश्रेष्ठ समय वृषभ लग्न माना गया है। यह समय शाम को 6ः45 से रात्रि 8ः39 तक विद्यमान रहेगा। इसलिए वृषभ लग्न में घर में पूजन करना सर्वाेत्तम रहेगा। कार्तिक कृष्ण पक्ष अमावस्या तिथि 24 अक्टूबर को शाम 5ः27 से प्रारंभ होकर दूसरे दिन सांयकाल 4ः17 तक रहेगी। इसके अलावा प्रदोष काल का समय शाम 5ः 43 से 8ः19 तक रहेगा। निशीथ काल रात्रि 8ः19 से 10ः55 तक विद्यमान रहेगा।

वाराणसी के आचार्य शशिकांत तिवारी ‘संजय‘ के मुताबिक निर्णय सिंधु के अनुसार मध्यान्ह या अपराहन के समय में व्याप्त कार्तिकी अमावस्या हो तो पित्र कार्य को करें और प्रदोष काल में व्याप्त हो तो धन की देवी महालक्ष्मी का पूजन करके खुशी मनाएं तो वर्ष में अपार धन समृद्धि प्राप्त होती है। इस वर्ष प्रदोष और निशीथ काल व्यापिनी कार्तिक की अमावस्या होने से दीपावली का पर्व 24 अक्टूबर को मनाना शास्त्र सम्मत होगा। इस वर्ष कार्तिक कृष्ण पक्ष अमावस्या तिथि 24 अक्टूबरको शाम 5ः27 से प्रारंभ होकर दूसरे दिन सांयकाल 4ः17 तक रहेगी।

पं. शशि कांत तिवारी बताते हैं कि दीपावली पूजन के शुभ लग्नों में वृश्चिक लग्न सुबह में 8ः12 से 10ः29 तक है। कुंभ लग्न दोपहर 2ः17 से शाम 3ः44 तक रहेगी। वृषभ लग्न शाम को 6 बजकर 45 मिनट से 8 बजकर 39 मिनट तक है। सिंह लग्न मध्य रात्रि 1ः14 से 3 बजकर से 32 मिनट तक है। ये सभी स्थिर लग्न हैं, अतः स्थिर लग्न में मां भगवती लक्ष्मी का पूजन करने से मां लक्ष्मी का वास चिरकाल तक स्थाई रहता है। अतः अपने कार्य व्यवसाय या घर आदि में स्थिर लग्न अथवा शुभ चौघड़िया में पूजन करना सर्वश्रेष्ठ रहेगा।

पंडित तिवारी ने बताया कि सुबह 9ः27 से 10ः50 तक शुभ की चौघड़िया रहेगी। इसके बाद दोपहर 1ः36 से 2ः58 तक धन की चौघड़िया विद्यमान रहेगी। दोपहर 2ः58 से शाम को 4ः20 तक लाभ की चौघड़िया विद्यमान रहेगी। शाम को 4ः20 से 5ः43 तक अमृत की चौघड़िया रहेगी। इन चौघड़िया में भी दीपावली का पूजन करना शुभ फलदायक एवं समृद्धिशाली होता है ।(हि.स.)

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