Varanasi

चंद्रावती में जैन तीर्थ का नया अध्याय: 17 करोड़ से बना भव्य घाट, पीएम मोदी करेंगे लोकार्पण

वाराणसी के पास चंद्रावती गांव में भगवान चंद्रप्रभु की जन्मस्थली पर 17.06 करोड़ रुपये की लागत से आधुनिक तीन-स्तरीय घाट तैयार किया गया है। नरेंद्र मोदी 28 अप्रैल को इसका लोकार्पण कर सकते हैं। यह घाट जैन सर्किट योजना के तहत विकसित हुआ है, जिससे धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। आधुनिक सुविधाओं और हेरिटेज लुक से युक्त यह स्थल भविष्य में वैश्विक तीर्थ केंद्र बनने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

  • काशी के धार्मिक पर्यटन को मिलेगा वैश्विक विस्तार, जैन सर्किट से जुड़ा ऐतिहासिक स्थल

वाराणसी :  धर्म, अध्यात्म और सांस्कृतिक विरासत की नगरी काशी एक बार फिर धार्मिक पर्यटन के वैश्विक मानचित्र पर अपनी नई पहचान बनाने जा रही है। शिव की नगरी, भगवान बुद्ध की प्रथम उपदेश स्थली, गोस्वामी तुलसीदास, बाबा कीनाराम, संत कबीर और संत शिरोमणि रविदास की पावन धरती काशी अब जैन धर्म के अनुयायियों के लिए भी और अधिक आकर्षण का केंद्र बनने जा रही है।

वाराणसी मुख्यालय से लगभग 20 किलोमीटर दूर गाजीपुर रोड स्थित चंद्रावती गांव में जैन धर्म के आठवें तीर्थंकर भगवान चंद्रप्रभु जी की जन्मस्थली पर योगी सरकार द्वारा जैन सर्किट योजना के अंतर्गत 17.06 करोड़ रुपये की लागत से आधुनिक तीन-स्तरीय घाट का निर्माण कराई है। करीब 200 मीटर लंबे इस घाट का लोकार्पण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने 28 अप्रैल के प्रस्तावित वाराणसी दौरे के दौरान कर सकते हैं।

चंद्रावती जैन आस्था का प्रमुख केंद्र है, यहां श्वेतांबर और दिगंबर दोनों परंपराओं के मंदिर स्थित हैं, जहां देश-विदेश से हर वर्ष लाखों श्रद्धालु दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं। काशी में भगवान चंद्रप्रभु जी की जन्मस्थली पर बना यह भव्य घाट धार्मिक पर्यटन, सांस्कृतिक संरक्षण और आधुनिक विकास का अद्भुत संगम साबित होगा।

वाराणसी के पास चंद्रावती गांव में भगवान चंद्रप्रभु की जन्मस्थली पर 17.06 करोड़ रुपये की लागत से आधुनिक तीन-स्तरीय घाट तैयार किया गया है। नरेंद्र मोदी 28 अप्रैल को इसका लोकार्पण कर सकते हैं। यह घाट जैन सर्किट योजना के तहत विकसित हुआ है, जिससे धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। आधुनिक सुविधाओं और हेरिटेज लुक से युक्त यह स्थल भविष्य में वैश्विक तीर्थ केंद्र बनने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

काशी से लगभग 20 किलोमीटर दूर स्थित चंद्रावती जैन धर्मावलंबियों के लिए पवित्र स्थल है। यह स्थान जैन धर्म के 8वें तीर्थंकर भगवान चंद्रप्रभु के जन्म और उनके जीवन यात्रा से जुड़ा है। जहां भगवान चंद्रप्रभु जी के चार कल्याणक च्यवन, जन्म, दीक्षा और केवल ज्ञान,से जुड़ी मान्यताएं हैं।  यहां स्थित मंदिर करीब 500 वर्ष से अधिक प्राचीन है। जैन ग्रंथों के अनुसार,भगवान चंद्रप्रभु का जन्म राजा महासेन और रानी लक्ष्मणा देवी के यहां हुआ था। उन्होंने गंगा तट के किनारे नाग वृक्ष के नीचे तपस्या कर केवल ज्ञान प्राप्त किया था।

पर्यटन विभाग के अनुसार घाट के पुनरुद्धार और सुविधाओं के विस्तार से यह स्थान आने वाले समय में तीर्थाटन का बड़ा केंद्र बनकर उभरेगा। भविष्य में इस घाट को जलमार्ग से जोड़ने की भी योजना है, ताकि श्रद्धालु और पर्यटक नाव या क्रूज के माध्यम से यहां आसानी से पहुंच सकें। उत्तर प्रदेश सरकार आध्यात्मिक पर्यटन को विस्तार देने में जुटी है  यह प्रयास न केवल धार्मिक स्थलों को वैश्विक पहचान दिलाएगी, बल्कि सतत विकास के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता भी दर्शाती है।

पर्यटन विभाग के अधिकारियो के अनुसार इसे  आधुनिक रिवर फ्रंट के रूप में विकसित किया गया है, जो एक ओर घाट किनारे स्थित मंदिर को कटाव से सुरक्षित रखने में सक्षम है, पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए घाट का निर्माण कम कार्बन फुटप्रिंट वाली तकनीक से किया गया है। पूरे घाट का हेरिटेज लुक होगा,गैबियन (GABION ) और रिटेनिंग  वाल से घाट तैयार किया गया है ,जिससे ये देखने में पुराने घाटों की तरह होगा और बाढ़ में घाट सुरक्षित रहेगा , घाट पर तीन प्लेटफॉर्म, सीढ़ियां, टॉयलेट ब्लॉक, पोर्टेबल चेंजिंग रूम, साइनेज, पार्किंग, पत्थर की बेंच, सुंदर रेलिंग जैसी सुविधाएं विकसित की गई  हैं।

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