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46 वर्ष पहले जिन दरिंदों ने संभल के अंदर नरसंहार किया, उन्हें आज तक सजा क्यों नहीं मिलीः योगी

संभल में इतना प्राचीन मंदिर, बजरंग बली की प्राचीन मूर्ति व ज्योतिर्लिंग रातों रात नहीं आई, इस मंदिर ने वास्तविकता को सबके सामने रख दियाः मुख्यमंत्री.परिवार विशेष की बपौती समझने वालों को हो रही परेशानी, किसान के बेटे को उपराष्ट्रपति पद पर देखना नहीं हो रहा हजमः मुख्यमंत्री.

  • बोले-भारत की विरासत के प्रति बोलने वालों को मिलती है धमकी
  • दुनिया में बहुसंख्यक समाज जो कहता है, व्यवस्था वैसे ही संचालित होती हैः योगी
  • माननीय न्यायमूर्ति ने समान नागरिक संहिता की कही बात तो इन लोगों ने दी नोटिसः सीएम
  • सच बोलने वालों को दिखाते हैं धौंस, ऐसे लोगों को करना चाहिए नंगाः मुख्यमंत्री

लखनऊ : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक बार फिर कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों की नीतियों को आईना दिखाया। शनिवार को मुंबई और रविवार को लखनऊ में मुख्यमंत्री इन दलों पर हमलावर रहे। सीएम ने संभल, उपराष्ट्रपति व माननीय न्यायमूर्ति को लेकर विपक्ष के मुद्दों को जनता के समक्ष रखते हुए कहा कि भारत की विरासत के प्रति बोलने वालों को धमकी दी जाती है। सीएम ने सच को दबाने वाले, संविधान का गला घोंटने वाले ऐसे दलों के लोगों की मानसिकता को उजागर करने की अपील की। सीएम ने बेबाकी से कहा कि 46 वर्ष पहले जिन दरिंदों ने संभल के अंदर नरसंहार किया, उन्हें आज तक सजा क्यों नहीं मिली।

संभल में जिस मंदिर को बंद कर दिया गया था, वह फिर से सबके सामने आ गया

सीएम योगी ने कहा कि कल संसद में चर्चा संविधान पर हो रही थी और मुद्दा संभल का उठ रहा था। विपक्षियों पर हमला करते हुए उन्होंने कहा कि इन्हीं के समय में 46 वर्ष पहले संभल में जिस मंदिर को बंद कर दिया गया, वह मंदिर फिर से सबके सामने आ गया और इनकी वास्तविकता को प्रस्तुत कर दिया। संभल में इतना प्राचीन मंदिर, बजरंग बली की प्राचीन मूर्ति व ज्योतिर्लिंग रातों रात तो नहीं आया होगा। उन्होंने कहा कि 46 वर्ष पहले जिन दरिंदों ने संभल के अंदर नरसंहार किया था, उन्हें आज तक सजा क्यों नहीं मिली। संभल में जिनकी निर्मम हत्या हुई, उन निर्दोषों का क्या कसूर था। जो भी सच बोलेगा, उसे धमकी दी जाएगी, मुंह बंद कराने का प्रयास होगा।

भारत की विरासत के प्रति बोलने वालों को मिलती है धमकी

सीएम ने कांग्रेस के दोहरे चरित्र को उजागर करते हुए कहा कि जो लोग भारत का ठेका लेकर घूमते हैं और डिस्कवरी ऑफ इंडिया को भारत का सबसे प्राचीन ग्रंथ मानते हैं। वे संविधान के नाम पर पाखंड कर रहे हैं। 9 नवंबर 2019को उच्चतम न्यायालय ने श्रीराम जन्मभूमि से संबंधित फैसला दिया, लेकिन ऐसे लोग आज भी जज को धमकी देते हैं। राज्यसभा के सभापति (उप राष्ट्रपति) के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाकर उनकी आवाज को दबाना चाहते हैं। सभापति ने कर्तव्यों के निर्वहन की बात की और कहा कि सदन चलना चाहिए। जनता से जुड़े मुद्दे सदन में रखे जाने चाहिए। इस पर इन लोगों (विपक्षियों) ने पक्षपात का आरोप लगाते हुए अविश्वास प्रस्ताव की नोटिस दी।

सच को दबाने वाले लोगों को नंगा करना चाहिए

सीएम योगी ने कहा कि उपराष्ट्रपति अपनी योग्यता व क्षमता के बल पर संवैधानिक मर्यादा का पालन करते हुए उच्च सदन का संचालन कर रहे हैं। विरोधियों को चिंता है वे कर्तव्यों का निर्वहन न कर सकें, कि किसान का पुत्र कैसे वहां तक चला गया। यह परिवार विशेष की बपौती हुआ करती थी। न्यायमूर्ति एक नागरिक के रूप में सच्चाई को रखते हैं तो उन्हें धौंस दी जाती है। यह लोग सच बोलने वाले को महाभियोग का धौंस देकर उसके मुंह को बंद करने का प्रयास करेंगे, फिर भी संविधान की दुहाई देंगे। यह दोहरा चरित्र नहीं चलेगा। सच को दबाने वाले ऐसे लोगों को नंगा करना चाहिए।

माननीय न्यायमूर्ति ने समान नागरिक संहिता की कही बात तो इन लोगों ने दी नोटिस

सीएम योगी ने कहा कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय के माननीय न्यायमूर्ति ने समान नागरिक संहिता की बात कही। दुनिया में बहुसंख्यक समाज की भावना का सम्मान हर हाल में होता है। भारत में बहुसंख्यक समाज के हितों की चर्चा हुई, सच्चाई बोलना अपराध नहीं है। राज्यसभा में इन लोगों ने माननीय न्यायमूर्ति के खिलाफ महाभियोग की नोटिस दी है। यह खुद को लोकतांत्रिक कहते हैं। संविधान की पुस्तक साथ लेकर चलते हैं, लेकिन इन्हें शर्म नहीं है। यह संविधान का गला घोंटने वाले लोग हैं।

दुनिया में बहुसंख्यक समाज जो कहता है, व्यवस्था वैसे ही संचालित होती है

सीएम योगी ने कहा कि देश में हर हाल में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) होना चाहिए। दुनिया में बहुसंख्यक समाज जो कहता है, व्यवस्था वैसे संचालित होती है। भारत कह रहा है कि अल्पसंख्यक व बहुसंख्यक का भेद समाप्त होना चाहिए। सब लोगों पर समान कानून लागू होना चाहिए। बहुसंख्यक समाज कह रहा है कि अल्पसंख्यक व बहुसंख्यक का भेद समाप्त होना चाहिए, लेकिन यह लोग धौंस दे रहे हैं। संविधान का गला घोंटकर जबरन अपने दम पर देश की व्यवस्था चलाना चाहते हैं। देश तमाशा देख रहा है। अपनी दबंगई से सच को दबाने की कोशिश करने वालों को एक्सपोज किए जाने की आवश्यकता है।

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