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वेदांता पावर प्लांट हादसा: मृतकों की संख्या 17 पहुंची, प्रशासन ने जारी किए नाम

छत्तीसगढ़ के सक्ती स्थित वेदांता पावर प्लांट में बॉयलर विस्फोट से 17 लोगों की मौत हो गई। प्रशासन ने मृतकों के नाम जारी कर दिए हैं। हादसे में कई कर्मचारी गंभीर रूप से घायल हैं, जिनका इलाज जारी है। घटना के बाद सुरक्षा मानकों पर सवाल उठे हैं। सरकार ने जांच के आदेश देते हुए परिजनों को मुआवजा देने की घोषणा की है।

  • सक्ति जिले में बॉयलर विस्फोट से मचा था हड़कंप, कई घायल अब भी गंभीर; जांच के आदेश

रायपुर/सक्ति : छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले स्थित वेदांता लिमिटेड के तापीय विद्युत संयंत्र में हुए भीषण हादसे में मृतकों की संख्या बढ़कर 17 हो गई है। जिला प्रशासन ने देर रात मृतकों के नामों की आधिकारिक सूची जारी कर दी है। हादसे में घायल हुए कई कर्मचारियों की हालत अब भी गंभीर बनी हुई है, जिससे मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

मंगलवार दोपहर करीब 2:30 बजे प्लांट के बॉयलर सेक्शन में अचानक जोरदार विस्फोट हुआ। विस्फोट के बाद संयंत्र परिसर में अफरा-तफरी मच गई और कई कर्मचारी मलबे व गर्म भाप की चपेट में आ गए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार धमाका इतना तेज था कि आसपास काम कर रहे श्रमिक दूर जा गिरे और कुछ गंभीर रूप से झुलस गए।

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि बॉयलर पाइप में अत्यधिक दबाव और तापमान बढ़ने के कारण विस्फोट हुआ। गर्म भाप के संपर्क में आने से कई कर्मचारियों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए।

जिला प्रशासन द्वारा जारी सूची के अनुसार मृतकों में अधिकांश ठेका श्रमिक शामिल हैं, जो उस समय ड्यूटी पर तैनात थे। प्रशासन ने सभी मृतकों की पहचान कर परिजनों को सूचित कर दिया है। वहीं, कई घायल कर्मचारियों का इलाज रायगढ़ और रायपुर के विभिन्न अस्पतालों में चल रहा है।

हादसे के बाद पुलिस, प्रशासन और SDRF की टीमों ने तत्काल राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। मलबे में फंसे कर्मचारियों को बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया। एहतियातन संयंत्र के प्रभावित यूनिट को बंद कर दिया गया है।

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। राज्य सरकार ने मृतकों के परिजनों को मुआवजा देने की घोषणा की है। वहीं, वेदांता प्रबंधन ने भी हादसे की जांच कराने और प्रभावित परिवारों को हर संभव सहायता देने का आश्वासन दिया है।

इस घटना के बाद औद्योगिक इकाइयों में सुरक्षा मानकों को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते तकनीकी निगरानी और सुरक्षा उपायों का पालन किया जाता, तो इस तरह की बड़ी दुर्घटना को टाला जा सकता था। फिलहाल प्रशासन द्वारा हादसे के कारणों की विस्तृत जांच की जा रही है और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात कही जा रही है।

मृतकों के नाम

हादसे में जान गंवाने वाले मजदूरों के नाम इस प्रकार हैं: रितेश कुमार, अमृत लाल पटेल,ठंडाराम लहरे, तरुण कुमार ओझा,अकीब खान,सुशांता जाना,अब्दुल करीम,उदब सिंह यादव,शेख सैफुदिन,पप्पू कुमार,अशोक परहिया,मानस गिरी,बृजेश कुमार,रामेश्वर महिलांगे,कार्तिक महतो,नदीम मंसारी, शिबनाथ मुर्मू ।

सीएम साय ने मुआवजे और जांच के दिए आदेश

सक्ती जिले के सिंघीतराई स्थित वेदांता पावर प्लांट में हुए भीषण हादसे के बाद हालात चिंताजनक बने हुए हैं। हादसे में अब तक 17 मजदूरों की मौत हो चुकी है, जबकि 35 से अधिक घायल श्रमिकों का अस्पतालों में इलाज जारी है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए मृतकों और घायलों के लिए आर्थिक सहायता की घोषणा की है। उन्होंने मृत मजदूरों के परिजनों को 5-5 लाख रुपए और घायलों को 50-50 हजार रुपए देने का ऐलान किया है। सीएम ने कहा कि इस कठिन समय में राज्य सरकार पूरी संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता के साथ प्रभावित परिवारों के साथ खड़ी है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि सभी घायलों का समुचित और निःशुल्क उपचार सुनिश्चित किया जाए। साथ ही इलाज में किसी भी प्रकार की लापरवाही न हो, इसकी सख्त हिदायत दी गई है।

जांच के आदेश, दोषियों पर होगी सख्त कार्रवाई

घटना की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री ने बिलासपुर कमिश्नर को जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने साफ कहा है कि हादसे के लिए जो भी जिम्मेदार पाया जाएगा, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। वहीं, कलेक्टर अमृत विकास तोपनो ने अनुविभागीय दंडाधिकारी, डभरा (जिला सक्ती) को जांच अधिकारी नियुक्त किया है। जांच में यह स्पष्ट किया जाएगा कि हादसा कब और कैसे हुआ, उस समय कितने मजदूर काम कर रहे थे, किनकी मौत और कौन घायल हुए, और किन परिस्थितियों में यह घटना घटी। इसके अलावा औद्योगिक सुरक्षा निरीक्षण, तकनीकी या मानवीय कारणों की भूमिका, जिम्मेदार व्यक्तियों की पहचान और भविष्य में ऐसे हादसों की रोकथाम के उपायों की भी जांच की जाएगी। जांच अधिकारी को 30 दिनों के भीतर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।

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