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यूएई ने ओपेक से अलग होने का किया ऐलान, वैश्विक तेल बाजार में बढ़ी हलचल

OPEC से लगभग 60 वर्षों बाद United Arab Emirates के अलग होने के फैसले ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में नई हलचल पैदा कर दी है। पश्चिम एशिया संकट के बीच लिया गया यह निर्णय तेल उत्पादन और व्यापार नीति में बड़े बदलाव का संकेत है। इससे ओपेक की आपूर्ति नियंत्रण क्षमता कमजोर हो सकती है और कीमतों में उतार-चढ़ाव बढ़ने की आशंका है। यूएई अब उत्पादन बढ़ाने और वैकल्पिक मुद्रा में व्यापार करने की दिशा में आगे बढ़ेगा।

  • ऊर्जा रणनीति में बदलाव के तहत 1 मई से अलग होगा यूएई, तेल कीमतों में अनिश्चितता के संकेत

नयी दिल्ली : पश्चिम एशिया संकट और वैश्विक ऊर्जा बाजार में जारी उथल-पुथल के बीच संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने एक मई से पेट्रोलियम निर्यातक देशों के संगठन ओपेक और ओपेक प्लस से अलग होने की घोषणा की है। यूएई की सरकारी समाचार एजेंसी डब्ल्यूएएम ने मंगलवार को बताया कि यह निर्णय देश की दीर्घकालिक रणनीतिक और आर्थिक दृष्टि तथा बदलते ऊर्जा प्रोफाइल को दर्शाता है।करीब 60 वर्षों तक ओपेक का सदस्य रहने के बाद यूएई का यह फैसला वर्तमान ऊर्जा संकट के दौरान वैश्विक तेल बाजार पर ओपेक के प्रभाव के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।

यूएई ने कहा, “ यह निर्णय हमारी दीर्घकालिक रणनीतिक और आर्थिक दृष्टि को दर्शाता है, जिसमें घरेलू ऊर्जा उत्पादन में तेजी से निवेश शामिल है, और यह वैश्विक ऊर्जा बाजार में एक जिम्मेदार, विश्वसनीय और भविष्य उन्मुख भूमिका के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को मजबूत करता है। ”ओपेक से बाहर होने के बाद यूएई को अमेरिकी डॉलर के बजाय स्थानीय मुद्राओं में तेल व्यापार करने की अधिक स्वतंत्रता मिलेगी।घोषणा से पहले यूएई ओपेक के सबसे प्रभावशाली सदस्यों में से एक था और तेल उत्पादन में सऊदी अरब और इराक के बाद तीसरे स्थान पर था।

यूएई के बाहर होने से ओपेक के पास वैश्विक तेल बाजार को स्थिर करने का एक महत्वपूर्ण साधन कम हो जायेगा, जिससे कीमतों में अधिक अनिश्चित उतार-चढ़ाव हो सकता है।यूएई के निकलने से ओपेक अपनी कुल उत्पादन क्षमता का लगभग 15 प्रतिशत खो देगा।ओपेक छोड़ने के बाद यूएई अब सख्त उत्पादन कोटा से बंधा नहीं रहेगा। उसने 2027 तक अपनी उत्पादन क्षमता लगभग 40 लाख बैरल प्रतिदिन से बढ़ाकर 50 लाख बैरल प्रतिदिन करने की योजना बनायी है, ताकि “बाजार की तात्कालिक जरूरतों को पूरा किया जा सके।

”ओपेक, जो वैश्विक तेल उद्योग का एक शीर्ष अंतर-सरकारी संगठन है, 12 सदस्य देशों से मिलकर बना है, जो तेल बाजार को स्थिर रखने के लिए नीतियों का समन्वय करते हैं और दुनिया के लगभग 80 प्रतिशत प्रमाणित कच्चे तेल के भंडार पर अधिकार रखते हैं।ओपेक प्लस दरअसल ओपेक का विस्तार है और इसमें 22 तेल निर्यातक देश शामिल हैं, जो नियमित रूप से यह तय करने के लिए मिलते हैं कि विश्व बाजार में कितना कच्चा तेल बेचा जाये। इसमें 12 ओपेक देशों के अलावा अजरबैजान, बहरीन, ब्रुनेई, कजाकिस्तान, रूस, मैक्सिको, मलेशिया, दक्षिण सूडान, सूडान और ओमान शामिल हैं।

विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम संगठन के भीतर अस्थिरता या अन्य देशों के बाहर निकलने की “डोमिनो प्रभाव” की शुरुआत कर सकता है, जिससे समूह की वैश्विक आपूर्ति समन्वय क्षमता स्थायी रूप से कमजोर हो सकती है।अंतर्राष्ट्रीय बाजार में आज कच्चा तेल दो प्रतिशत से अधिक चढ़कर 110 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया। गत 28 फरवरी को ईरान पर अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमले के पहले यह 70 डॉलर प्रति बैरल के करीब था। (वार्ता)

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