
रजत मंडित हुई माँ अन्नपूर्णा के मंदिर की दीवार,पहली बार करेंगी ख़जाना वितरित
खजाना वितरण धनतेरस वाले दिन 23 तारीख की सुबह से शुरू होकर 4 दिनों तक चलेगा
- कनाडा से 108 साल बाद काशी वापस आई है माता अन्नपूर्णा की मूर्ति
- पहली बार भक्तों को प्रसाद के रूप में करेंगी ख़जाना वितरित
- दक्षिण भारत के भक्त ने मंदिर की दीवार को कराया रजत मंडित
- माँ अन्नपूर्णा की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा में सीएम योगी स्वयं बने थे यजमान
- पीएम मोदी के प्रयासों से एक सदी बाद काशी लौटी थी माँ अन्नपूर्णा की मूर्ति
वाराणसी । सनातन धर्म के लिए धनतेरस काशी में ऐतिहासिक होने वाला है। कनाडा से करीब 108 साल बाद वापस आई माता अन्नपूर्णा की मूर्ति पहली बार भक्तों को प्रसाद के रूप में ख़जाना वितरित करेंगी। इसके लिए श्री काशी विश्वनाथ धाम के मंदिर परिसर को भव्य रूप से सजाया गया है। माता अन्नपूर्णा का मंडप बना है और झांकियां सजी हैं। पीएम मोदी के प्रयासों से माँ अन्नपूर्णा की मूर्ति करीब एक सदी बाद भारत लौटी है। इस मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वयं यजमान बन कर किया था। माँ की डोली भी अपने कंधों पर उठाकर मंदिर प्रांगण में पहुंचाया था। वहीं अब दक्षिण भारत के भक्त ने माँ अन्नपूर्णा को चांदी दान किया है, जिससे मंदिर की दीवार को रजत मंडित किया गया है।
भगवान शिव की नगरी काशी को अन्न क्षेत्र भी कहा जाता है। भगवान शिव ने काशी में माँ अन्नपूर्णा से भिक्षा मांगी थी। इस लिए काशी में माँ अन्नपूर्णा का विशेष महत्व है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सदियों पहले काशी से गायब हुई माँ अन्नपूर्णा की मूर्ति को काशी विश्वनाथ धाम में प्राण प्रतिष्ठा किये थे। अब उन्हीं माँ अन्नपूर्णा का खजाना भक्तों को वितरित किया जाएगा। श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी सुनील वर्मा ने बताया कि करीब एक सदी बाद कनाडा से वापस आई माँ अन्नपूर्णा की मूर्ति पहली बार विश्वनाथ धाम में अपने भक्तों को खजाना वितरित करेंगी, जिसमे सिक्के, लावा आदि होगा। इसके लिए पूरे मंदिर को भव्य रूप से सजाया गया है, मंडप बनाया गया है और माँ अन्नपूर्णा के दरबार में झांकियां सजाई गई हैं।
मुख्य कार्यपालक अधिकारी ने बताया कि माँ अन्नपूर्णा का दर्शन धनतेरस वाले दिन 23 तारीख की सुबह से शुरू होगा और 4 दिनों तक चलेगा। मंदिर के द्वार परंपरागत समय से खुलेंगे और बंद होंगे व निर्धारित समय पर आरती होगी। मुख्य कार्यपालक अधिकारी ने बताया कि दक्षिण भारत के भक्त द्वारा दान में दिए गए चांदी से माँ अन्नपूर्णा मंदिर की दीवार को रजत मंडित कराया गया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने श्री काशी विश्वनाथ धाम के दिव्य व भव्य स्वरूप का उद्घाटन 13 दिसम्बर 2021 को करके इस दिन को सनातन धर्म के इतिहास में दर्ज करा चुके हैं। वहीं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 108 वर्ष पूर्व गायब मूर्ति को कनाडा से वापसी के बाद श्री काशी विश्वनाथ धाम में प्राण प्रतिष्ठा करके हिन्दू धर्म का एक और धार्मिक इतिहास रचा था। इससे पहले 1780 में इंदौर की रानी अहिल्याबाई होल्कर ने काशी विश्वनाथ मंदिर का जीर्णोद्धार कराया था और महाराजा रणजीत सिंह ने 1833 में सोने का छत्र बनवाया था।

धनतेरस पर्व पर श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर में पहली बार श्रद्धालुओं में बंटेगा खजाना
धनतेरस पर्व पर रविवार को पहली बार श्री काशी विश्वनाथ धाम स्थित अन्नपूर्णा मंदिर में अन्न धन का खजाना बांटा जाएगा। इस परंपरा की शुरुआत भोर में प्रातः काल 4 बजे अभिजीत मुहूर्त में शुरू किया जाएगा। मंगला आरती के पश्चात माता की स्वर्णमयी प्रतिमा और करीब 108 साल बाद कनाडा से वापस श्री काशी विश्वनाथ धाम में पहुंची अन्नपूर्णा माता की प्रतिमा का दर्शन शुरू होगा। यही नहीं इस बार एक ही परिसर में माता और बाबा विश्वनाथ जी के दर्शन भी भक्त कर सकेंगे। इस दर्शन व्यवस्था के लिए मंदिर प्रशासन ने तैयारियां पूरी कर ली हैं। शनिवार को ये जानकारी काशी विश्वनाथ मंदिर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी सुनील कुमार वर्मा ने दी।
उन्होंने बताया कि सभी श्रद्धालुओं को मंदिर परिसर के पूर्वी प्रवेश द्वार से प्रवेश कराकर माता का भव्य दर्शन कराया जाएगा। वहीं, अन्न और धन का खजाना भी सभी दर्शनार्थियों को वितरित किया जाएगा। इसके अलावा मंदिर परिसर में भव्य सजावट और झांकी भी सजाई गई है। ताकि भक्तों को एक अलग अनुभव कराया जा सके। सुनील कुमार वर्मा ने बताया कि पहले की अपेक्षा श्री काशी विश्वनाथ धाम कई गुना बड़ा हो गया है। माता अन्नपूर्णा का दरबार भी पहले से भव्य हो चुका है। रजत जणित दीवारों के बीच स्थापित माता की स्वर्णमयी प्रतिमा के अलावा कनाडा से श्री काशी विश्वनाथ मंदिर पहुंची मां की दुर्लभ प्रतिमा भी विराजमान है।
श्री काशी विश्वनाथ न्यास परिषद के अध्यक्ष प्रो. नागेंद्र पाण्डेय और न्यास के अन्य सदस्यों द्वारा लिए गए निर्णय के अनुसार इन प्रतिमाओं के दर्शन के लिए इस बार मंदिर प्रशासन ने व्यवस्था की है। धनतेरस से लेकर अन्नकूट तक चलने वाले इस भव्य आयोजन में दर्शन करने आने वाले सभी दर्शनार्थियों को खजाना स्वरूप सिक्का और लावा का वितरण होगा। मान्यता यह है की अन्नपूर्णा दरबार से आर्शीवाद स्वरूप मिले इस खजाना से घर परिवार में कभी अन्न और धन की कमी नहीं होती है। इसी श्रद्धा भाव को देखते हुए श्रद्धालु माता अन्नपूर्णा के दर्शन करने काशी पहुंचते हैं। देश.विदेश से आने वाले सभी दर्शनार्थियों के लिए मंदिर में उचित दर्शन की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। इसके लिए बैरिकेडिंग और प्रवेश निकास की व्यवस्था भी अलग से की गई है। इस दौरान किसी प्रकार की दर्शनार्थियों को परेशानी न हो इसके लिए पुलिस और मंदिर प्रशासन की ओर से कर्मचारियों की ड्यूटी भी लगाई गई है।
श्री काशी विश्वनाथ धाम में माता अन्नपूर्णा दरबार से बांटने वाले खजाना को लेकर न सिर्फ दर्शनार्थी बल्कि श्रद्धालु और आसपास के सभी व्यापारी भी काफी प्रसन्न है। उन्होंने धाम में इस भव्य परंपरा की शुरुआत करने के लिए मंदिर प्रशासन को बधाई दी है। श्री काशी विश्वनाथ मंदिर व्यापार मंडल के सदस्यों की ओर से शनिवार को मुख्य कार्यपालक अधिकारी को 11 हजार रुपए का दान दिया गया है और उन्होंने अपील की कि विश्वनाथ मंदिर में दर्शनार्थियों की भावनाओं को देखते हुए बहुत ही अच्छा कदम उठाया है । यह परंपरा हर साल निर्विघ्न रुप से अनवरत चलती रहे। ताकि एक ही दरबार में बाबा विश्वनाथ के साथ.साथ मां का भी आशीर्वाद भक्तों को मिल सके।(हि.स.)



