नफरत नहीं सच उजागर करती है ‘द कश्मीर फाइल्स’
कश्मीरी पंडितों के नरसंहार की जांच के लिए ट्रिब्यूनल के गठन की मांग
नई दिल्ली । ‘द कश्मीर फाइल्स’ फिल्म पर मचे घमासान के बीच ग्लोबल कश्मीरी पंडित डायसपोरा के सदस्यों ने नरसंहार की जांच के साथ-साथ दोषियों को फांसी की मांग की है। सोमवार को आईडब्लूपीसी में आयोजित प्रेसवार्ता में ग्लोबल कश्मीरी पंडित डायसपोरा के पदाधिकारियों ने कहा कि यह साल 1990 में कश्मीर में हुए कश्मीरी पंडितों के नरसंहार के 700 भुक्त भोगियों के सच्चे अनुभवों पर बनी फिल्म है । ये किसी समुदाय से नफरत नहीं बल्कि आतंकवाद किस कदर एक समुदाय को खत्म कर देता है उसकी कहानी है। इस फिल्म को हिन्दू-मुस्लिम के बीच दरार पैदा करने के मुद्दे के रूप में न देखा जाए ।
ग्लोबल कश्मीरी पंडित डायसपोरा की संयुक्त राज्य अमेरिका की ह्यूस्टन इकाई के प्रमुख डॉ सुरेंद्र कौल ने बताया कि 32 साल में उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री के लगभग सभी फिल्म निर्माताओं को कश्मीरी पंडितों के नरसंहार पर फिल्म बनाने को कहा लेकिन कोई भी इस विषय को छूने तक को तैयार नहीं था । विवेक अग्निहोत्री और पल्लवी जोशी ने बहुत हिम्मत दिखायी और जो सच्चाई आज तक छुपा कर रखी गयी थी उसे दुनिया के सामने लाए । सच्चाई को पूरी दुनिया देख रही है और भारत में ये सफलता के सभी रिकॉर्ड तोड़ रही है ।
भारतीय इकाई के अध्यक्ष उत्पल कौल ने कहा कि ‘द कश्मीर फाइल्स’ सौ फीसदी सच पर आधारित है । पांच लाख कश्मीरी पंडित देश भर में पिकनिक मनाने के लिए अपना घर छोड़ कर नहीं निकले थे । उन्होंने सोनिया गांधी और राहुल गांधी को ये फिल्म देखने के लिए आमंत्रित किया । उन्होंने कहा नेहरू परिवार को भी अपने समुदाय की तकलीफ का पता चलना चाहिए । कश्मीर पर एक नहीं सौ फिल्में भी बनायी जाएं तो कम हैं । उत्पल कौल ने यासीन मलिक और बिट्टा कराटे को फांसी देने की मांग की ।
उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि कश्मीरी पंडितों के नरसंहार की जांच के लिए एक ट्रिब्यूनल का गठन किया जाना चाहिए । कश्मीरी पंडितों को न्याय मिलना चाहिए । कश्मीरी पंडितों के 2 हज़ार घर उस समय जला दिए गए थे बाकी पर कब्जा कर लिया गया । कुलमिला कर आज की तारीख में 35 बिलियन अमेरिकी डॉलर की संपत्ति का नुकसान कश्मीरी पंडितों को हुआ है । कश्मीरी पंडित अगर घर वापसी करें भी तो कैसे करें उनके पास अपने घर ही नहीं है ।(हि.स.)


